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Shravasti News: श्रीलंका से आए अनुयायियों ने की फूल पूजा
Sun, 24 Aug 2025 01:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 24 Aug 2025 01:18 AM IST
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तपोस्थली स्थित गंध कुटी को अनुयायियों ने फूलों से सजाया। -संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को अनुयायियों से गुलजार रही। श्रीलंका से 213 अनुयायियों का दल तपोस्थली पहुंचा। अनुयायियों ने भिक्षु माता सुमेधा थेरो के नेतृत्व में गंध कुटी में फूल पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा के दौरान माता सुमेधा थेरो ने कहा कि बौद्ध दर्शन के दो प्रमुख सिद्धांत हैं। पहला यह समझ लेना कि वास्तव में ज्ञान इस संसार से परे की किसी शक्ति को जानना नहीं, अपितु दुख का निवारण करने के उपाय तलाश कर उन पर आचरण करना है।
उन्होंने कहा कि अध्यात्म मनुष्य का दुख दूर नहीं करता, बल्कि केवल यह जानकारी देता है कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है। इसलिए दुख की अवस्था भी अवश्य बीतेगी और सुख आएगा। दुख का निवारण चार सत्य को जान लेने से संभव हो जाता है।
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संसार में दुख है, इस दुख का कारण है, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है, मध्यम मार्ग पर आचरण करने से दुख दूर होता है। मध्यम या माध्यमिक मार्ग ही बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा है। माध्यमिक मार्ग से अभिप्राय है कि किसी भी वस्तु, गुण अथवा प्रवृति का न तो आधिक्य हो और न ही कमी या सर्वथा अभाव। सब कुछ संतुलित अनुपात में हो।
इस संतुलन की अवस्था को आचरण का माध्यमिक मार्ग कहा गया है और माध्यमिक के लिए ही दूसरी संज्ञा है सम्यक। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग सम्यक ज्ञान, सम्यक विचार, सम्यक आचरण, सम्यक समाधि इत्यादि। इसका व्यक्ति को पालन करना चाहिए।
इसके बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर बुद्धम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया।
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बौद्ध सभा के दौरान माता सुमेधा थेरो ने कहा कि बौद्ध दर्शन के दो प्रमुख सिद्धांत हैं। पहला यह समझ लेना कि वास्तव में ज्ञान इस संसार से परे की किसी शक्ति को जानना नहीं, अपितु दुख का निवारण करने के उपाय तलाश कर उन पर आचरण करना है।
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उन्होंने कहा कि अध्यात्म मनुष्य का दुख दूर नहीं करता, बल्कि केवल यह जानकारी देता है कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है। इसलिए दुख की अवस्था भी अवश्य बीतेगी और सुख आएगा। दुख का निवारण चार सत्य को जान लेने से संभव हो जाता है।
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संसार में दुख है, इस दुख का कारण है, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है, मध्यम मार्ग पर आचरण करने से दुख दूर होता है। मध्यम या माध्यमिक मार्ग ही बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा है। माध्यमिक मार्ग से अभिप्राय है कि किसी भी वस्तु, गुण अथवा प्रवृति का न तो आधिक्य हो और न ही कमी या सर्वथा अभाव। सब कुछ संतुलित अनुपात में हो।
इस संतुलन की अवस्था को आचरण का माध्यमिक मार्ग कहा गया है और माध्यमिक के लिए ही दूसरी संज्ञा है सम्यक। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग सम्यक ज्ञान, सम्यक विचार, सम्यक आचरण, सम्यक समाधि इत्यादि। इसका व्यक्ति को पालन करना चाहिए।
इसके बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर बुद्धम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया।