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राप्ती बैराज पर घटा जलस्तर, कई गांव में घुसा बाढ़ का पानी
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श्रावस्ती के मध्यनगर गांव में भरा राप्ती नदी का पानी।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। जिले में गुरुवार शाम से बरसात थम गई है। इसके साथ ही राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर सामान्य हो रहा है। इसके बावजूद कछार के करीब 18 गांव में नदी का पानी घुसने से वहां कटान शुरू हो गई है। ऐसे में ग्रामीण घरों का सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ ही अपने हाथ से आशियाना तोड़ उसका मलवा समेट रहे हैं। वहीं बाढ़ का पानी आ जाने से कई मार्ग कट गए। इससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
तराई सहित नेपाल व पहाड़ों पर गुरुवार शाम से बरसात थम गई है। इससे जमुनहा स्थित राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। गुरुवार को नदी की लहरें खतरे के निशान 127.70 मीटर को पार कर 127.75 मीटर पर पहुंच गईं थी। दोपहर बाद नदी का जलस्तर तेजी से घटने लगा, जो शुक्रवार सुबह 8 बजे 127.15 मीटर पर पहुंच गया।
वहीं नदी का पानी कछार में बसे गिलौला के मध्यनगर, गौहनिया, सेहनियां, रामनगर व गड़धोई आदि गांव के चारों तरफ फैल गया है। इससे गांव में कटान शुरू हो गई है। मध्यनगर में नदी की लहरें मंदिर व लोगों के घरों को काट रही है। इससे ग्रामीण अपने घरों का सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
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कई ग्रामीण अपने हाथ से अपना आशियाना तोड़कर उसकी ईंट, खिड़की, दरवाजा आदि निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं। कई अन्य गांव में नदी की लहरें खेतों को जलमग्न करते हुए फसल को काट रही हैं। इससे कछार में बसे गांव के लोगों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।
तराई में लगातार हुई बरसात के कारण भिनगा बहराइच फोरलेन मार्ग दिकौली नहर के करीब धंस गया है। इससे वहां आने जाने वाले वाहनों को दूसरी पटरी से गुजारा जा रहा है। जमुनहा बहराइच मार्ग उल्टहवा पुल के निकट कटने से वाहनों के पलटने का खतरा उत्पन्न है।
वहीं भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग रेहली के निकट कट गया था। इस पर क्षेत्रवासियों ने डिप पर ईट डाला था, लेकिन केन नाले के उफान के कारण सड़क पर पानी बढ़ने से आवागमन प्रभावित है। वहीं जमुनहा के मनकौरा जाने वाला मुख्य संपर्क मार्ग कट गया है। इससे मनकौरा, कुंडा, मधनगरा, परसोहना, रतैहिया, अकालपुरवा, परसोहनी, लोखड़ियनपुरवा, भगवानपुर, दमोंदरा, चनैनी आदि गांवों के ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो गया है।
अभी भी तालाब बने कार्यालय परिसर
जिले में हुई मूसलाधार बारिश का पानी अब भी जगह-जगह एकत्र है। जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण मल्हीपुर थाना परिसर, कलेक्ट्रेट व विकास भवन के आसपास, भिनगा तहसील में आवासीय परिसर, कृषि भवन, सब्जी मंडी मार्ग, पुरानी बाजार, खलवा बाजार, खैरीमोड़, खरगौरा मोड़ आदि स्थानों पर मार्ग तालाब बने हैं। जहां लोग पानी व कीचड़ के बीच से होकर आवागमन को विवश हैं।
क्षतिग्रस्त मार्ग बना कमाई का जरिया
भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली गांव के निकट सड़क क्षतिग्रस्त होने के साथ ही इस पर पानी बह रहा है। इसका स्थानीय ग्रामीण फायदा उठा रहे हैं। ग्रामीण इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों से स्कूटी, बाइक को कंधे पर रख कर पार कराने के लिए 100 रुपये तथा साइकिल व लोगों को पार कराने के लिए 20 से 50 रुपये तक ले रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों के लिए कटी सड़क उनके कमाई का जरिया बनी हुई है। वहीं क्षतिग्रस्त फोरलेन सहित अन्य प्रमुख मार्ग पर विभाग की ओर से ठेकेदारों के माध्यम से ईंट रोड़े डलवाए जा रहें हैं। इसमें ठेकेदार पीली, अधपकी व घटिया ईट डालकर अव्वल ईंट प्रयोग करने का भुगतान ले रहे हैं।
किसानों के खिले चेहरे, खेती किसानी तेज
जिले में हुई बरसात के बाद सिरसिया व हरिहरपुररानी के तराई सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में खेत जलमग्न हैं। जिसे देखकर किसान खेत का पानी कम होने से पूर्व उसमें धान की रोपाई करने को बेताब हैं। ऐसे में खेती किसानी के काम में काफी तेजी आ गई है। सभी क्षेत्रों में किसान परिवारीजनों सहित धान की नर्सरी से बेरन उखाड़ कर उसकी रोपई में जुटे हुए है। इस दौरान खेतों में महिलाओं द्वारा गाए जा रहे रोपाई गीत से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
बादलों की लुकाछिपी से घट-बढ़ रहीं धड़कनें
जिले में शुक्रवार को भले ही बरसात न हुई हो, फिर भी बादलों की लुकाछिपी का खेल जारी रहा। लगातार बरसात के कारण लोगों के घरों में कपड़े व भोजन पकाने के लिए एकत्र ईंधन गीला हो गया था। ऐसे में लोग धूप देख उसे सुखाने में लगे हुए नजर आए। वहीं बदरी देख कछार में बसे गांव के ग्रामीणों की धड़कने तेज हो रही हैं। बादलों की लुकाछिपी के कारण उमस काफी बढ़ गई है। उमस बढ़ने के कारण व्याप्त जलभराव व गंदगी से लोगों में संक्रामक रोग का खतरा बढ़ गया है। जिससे लोग परेशान देखे जा रहे हैं।
दो वर्ष बाद भी नहीं दुरुस्त हुई नहर
गिलौला क्षेत्र के ग्राम तुलसीपुर के मजरा अड़राई के पास स्थिति सरयू मुख्य नहर में 2017 में बाढ़ के दौरान काफी पानी छोड़ा गया था। इससे नहर कटने लगी थी। ग्रामीणों ने किसी तरह नहर कटने से बचा ली थी। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने कई बार उच्च अधिकारियों से की, इसके बावजूद उस पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में बाढ़ की संभावना को देखते हुए ग्रामीण परेशान हैं।
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तराई सहित नेपाल व पहाड़ों पर गुरुवार शाम से बरसात थम गई है। इससे जमुनहा स्थित राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। गुरुवार को नदी की लहरें खतरे के निशान 127.70 मीटर को पार कर 127.75 मीटर पर पहुंच गईं थी। दोपहर बाद नदी का जलस्तर तेजी से घटने लगा, जो शुक्रवार सुबह 8 बजे 127.15 मीटर पर पहुंच गया।
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वहीं नदी का पानी कछार में बसे गिलौला के मध्यनगर, गौहनिया, सेहनियां, रामनगर व गड़धोई आदि गांव के चारों तरफ फैल गया है। इससे गांव में कटान शुरू हो गई है। मध्यनगर में नदी की लहरें मंदिर व लोगों के घरों को काट रही है। इससे ग्रामीण अपने घरों का सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
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कई ग्रामीण अपने हाथ से अपना आशियाना तोड़कर उसकी ईंट, खिड़की, दरवाजा आदि निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं। कई अन्य गांव में नदी की लहरें खेतों को जलमग्न करते हुए फसल को काट रही हैं। इससे कछार में बसे गांव के लोगों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।
तराई में लगातार हुई बरसात के कारण भिनगा बहराइच फोरलेन मार्ग दिकौली नहर के करीब धंस गया है। इससे वहां आने जाने वाले वाहनों को दूसरी पटरी से गुजारा जा रहा है। जमुनहा बहराइच मार्ग उल्टहवा पुल के निकट कटने से वाहनों के पलटने का खतरा उत्पन्न है।
वहीं भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग रेहली के निकट कट गया था। इस पर क्षेत्रवासियों ने डिप पर ईट डाला था, लेकिन केन नाले के उफान के कारण सड़क पर पानी बढ़ने से आवागमन प्रभावित है। वहीं जमुनहा के मनकौरा जाने वाला मुख्य संपर्क मार्ग कट गया है। इससे मनकौरा, कुंडा, मधनगरा, परसोहना, रतैहिया, अकालपुरवा, परसोहनी, लोखड़ियनपुरवा, भगवानपुर, दमोंदरा, चनैनी आदि गांवों के ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो गया है।
अभी भी तालाब बने कार्यालय परिसर
जिले में हुई मूसलाधार बारिश का पानी अब भी जगह-जगह एकत्र है। जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण मल्हीपुर थाना परिसर, कलेक्ट्रेट व विकास भवन के आसपास, भिनगा तहसील में आवासीय परिसर, कृषि भवन, सब्जी मंडी मार्ग, पुरानी बाजार, खलवा बाजार, खैरीमोड़, खरगौरा मोड़ आदि स्थानों पर मार्ग तालाब बने हैं। जहां लोग पानी व कीचड़ के बीच से होकर आवागमन को विवश हैं।
क्षतिग्रस्त मार्ग बना कमाई का जरिया
भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली गांव के निकट सड़क क्षतिग्रस्त होने के साथ ही इस पर पानी बह रहा है। इसका स्थानीय ग्रामीण फायदा उठा रहे हैं। ग्रामीण इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों से स्कूटी, बाइक को कंधे पर रख कर पार कराने के लिए 100 रुपये तथा साइकिल व लोगों को पार कराने के लिए 20 से 50 रुपये तक ले रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों के लिए कटी सड़क उनके कमाई का जरिया बनी हुई है। वहीं क्षतिग्रस्त फोरलेन सहित अन्य प्रमुख मार्ग पर विभाग की ओर से ठेकेदारों के माध्यम से ईंट रोड़े डलवाए जा रहें हैं। इसमें ठेकेदार पीली, अधपकी व घटिया ईट डालकर अव्वल ईंट प्रयोग करने का भुगतान ले रहे हैं।
किसानों के खिले चेहरे, खेती किसानी तेज
जिले में हुई बरसात के बाद सिरसिया व हरिहरपुररानी के तराई सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में खेत जलमग्न हैं। जिसे देखकर किसान खेत का पानी कम होने से पूर्व उसमें धान की रोपाई करने को बेताब हैं। ऐसे में खेती किसानी के काम में काफी तेजी आ गई है। सभी क्षेत्रों में किसान परिवारीजनों सहित धान की नर्सरी से बेरन उखाड़ कर उसकी रोपई में जुटे हुए है। इस दौरान खेतों में महिलाओं द्वारा गाए जा रहे रोपाई गीत से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
बादलों की लुकाछिपी से घट-बढ़ रहीं धड़कनें
जिले में शुक्रवार को भले ही बरसात न हुई हो, फिर भी बादलों की लुकाछिपी का खेल जारी रहा। लगातार बरसात के कारण लोगों के घरों में कपड़े व भोजन पकाने के लिए एकत्र ईंधन गीला हो गया था। ऐसे में लोग धूप देख उसे सुखाने में लगे हुए नजर आए। वहीं बदरी देख कछार में बसे गांव के ग्रामीणों की धड़कने तेज हो रही हैं। बादलों की लुकाछिपी के कारण उमस काफी बढ़ गई है। उमस बढ़ने के कारण व्याप्त जलभराव व गंदगी से लोगों में संक्रामक रोग का खतरा बढ़ गया है। जिससे लोग परेशान देखे जा रहे हैं।
दो वर्ष बाद भी नहीं दुरुस्त हुई नहर
गिलौला क्षेत्र के ग्राम तुलसीपुर के मजरा अड़राई के पास स्थिति सरयू मुख्य नहर में 2017 में बाढ़ के दौरान काफी पानी छोड़ा गया था। इससे नहर कटने लगी थी। ग्रामीणों ने किसी तरह नहर कटने से बचा ली थी। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने कई बार उच्च अधिकारियों से की, इसके बावजूद उस पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में बाढ़ की संभावना को देखते हुए ग्रामीण परेशान हैं।