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पांच छात्र पहुंचे घर, दो अभी भी बंकर में फंसे
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यूक्रेन से वापस लौटे छात्र इकौना कस्बा निवासी सद्दाम रायनी
- फोटो : SRAWASTI
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इकौना (श्रावस्ती)। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे जिले के आठ छात्र वहां फंसे थे। जिनमें से पांच छात्र वापस अपने घर पहुंच चुके हैं। दो छात्र अभी भी सूमी स्थित अपने हॉस्टल के बंकर में फंसे हैं। जिनको निकालने के लिए दूतावास प्रयास कर रहा है। बंकर में फंसे छात्रों के परिवारीजन की चिंताएं सबसे अधिक है।
यूक्रेन में एमबीबीएस की पड़ाई करने के लिए गए जिले के आठ छात्रों में से पांच छात्र अपने घर पहुंच चुके हैं। इसमें से दो छात्र बुधवार देर रात को घर पहुंचे हैं। घर पहुंचते ही सबसे पहले यूक्रेन में फंसे छात्रों ने केंद्र सरकार की ओर से उन्हें बाहर निकालने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। इस दौरान यूक्रेन से लौटे इकौना कस्बा के गौतम नगर निवासी आर्यन प्रताप सिंह पुत्र अभय पत्राप सिंह ने बताया कि युद्ध के चलते कई दिनों सेल्टर हाउस में बिताने के बाद भारतीय एंबेसी की मदद से वह अपने साथियों के साथ लवीव शहर पहुंचे। वहां से रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। जहां से उन्हें हवाई जहाज से दिल्ली लाया गया। दिल्ली से इनोवा गाड़ियों से छात्रों को गंतव्य तक भेजा गया।
यूक्रेन से वापस आए इकौना कस्बे के ही शास्त्री नगर निवासी छात्र सद्दाम राइनी पुत्र इसरार उर्फ बब्बू राइनी ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध के दौरान सभी छात्रों की कक्षाएं बंद हो चुकी थीं। ऑनलाइन क्लास भी नहीं चल रही थी। हालात अचानक बिगड़ जाने के कारण हम लोग परेशान हो गए। उस समय भारतीय एंबेसी के लोगों ने हम लोगों की मदद की। अपने साथियों के साथ हम लोग रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। वहां हम लोगों को करीब 48 घंटे लाइन में लगना पड़ा। वहां पर कई बार लाठी चार्ज भी हुआ। यहां पर कई देशों के करीब 10 हजार से अधिक छात्र बार्डर पार करने के लिए खड़े थे। किसी तरह हम लोग बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंचे। वहां से हम सभी छात्र भारतीय एंबेसी के माध्यम से हवाई जहाज से दिल्ली पहुंचे। दिल्ली से हमें सरकार ने ही घर तक पहुंचाया। घर पहुंचे छात्रों व उनके परिवारीजन ने भारतीय एंबेसी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके अलावा घर पहुंचने वालों में अवधेश प्रताप सिंह पुत्र विजय कुमार सिंह निवासी परेवपुर गिलौला व अभिषेक गुप्ता पुत्र राम आधार गुप्ता निवासी पुरानी बाजार दक्षिणी भिनगा शामिल हैं। वहीं भिनगा के कुन्ननपुर नौशहरा निवासी मुर्तजा पुत्र निसार अहमद पहले ही अपने घर पहुंचे चुके हैं जबकि एक छात्र रास्ते में है।
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वहां यह आ रही समस्या
यूक्रेन से आए छात्रों का कहना था कि वहां की भौगोलिक स्थिति असामान्य है। आबादी सघन नहीं है। कोई पांच सौ किलोमीटर दूर रहता है तो कोई एक हजार किलोमीटर। युद्ध के समय एक शहर से दूसरे शहर को पार करना कठिन हो जाता है। जब युद्ध विराम होता है तो भारतीय एंबेसी किसी तरह युद्ध क्षेत्र में फंसे रहने वाले छात्रों को बॉर्डर पार कराती है। बॉर्डर पार करने के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है। बॉर्डर पार करते ही नए देश में भारतीय एंबेसी के लोग छात्रों को रिसीव करते हैं। उन्हें खाना सहित अन्य सुविधाएं भारतीय शेल्टर होम में मिलती है। यदि किसी का सामान छूट गया हो तो उन्हें कपड़ा आदि भी भारतीय दूतावास उपलब्ध कराता है। लेकिन युद्ध क्षेत्र में कुछ खास नहीं हो पाता है।
सूमी में अभी फंसे जिले के दो छात्र
सूमी स्थित अपने छात्रावास के बंकर में चैनपुर भटपुरवा कला निवासी दिनेश कुमार चौहान व राहुल चौधरी अभी भी फंसे हुए हैं। सूमी में लगातार बमबारी हो रही है। ऐसे हालात में भारतीय दूतावास इन्हें बाहर नहीं निकाल पा रहा है। दोनों छात्र भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। दूतावास इनके परिवारीजनों से बातचीत अपने संसाधनों से करा रहे हैं। छात्र सुरक्षित हैं, लेकिन परिवारीजन डरे हुए हैं।
जिले से जिनके परिवार के सदस्य या बच्चे यूक्रेन में फंसे हैं। वह सभी लोग अपने परिवार के सदस्य या बच्चों का नाम, पता, मोबाइल नंबर, यूक्रेन का पता, यूक्रेन का मोबाइल नंबर और किस कार्य से यूक्रेन गए हैं। आपसे बात हो पा रही या नहीं। आदि का विस्तृत विवरण उप जिला मजिस्ट्रेट रोहित के मोबाइल नंबर 9794952862 पर दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त राज्य कंट्रोल रूम टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 0522-1070 पर जानकारी दे सकते हैं। -नेहा प्रकाश, डीएम
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यूक्रेन में एमबीबीएस की पड़ाई करने के लिए गए जिले के आठ छात्रों में से पांच छात्र अपने घर पहुंच चुके हैं। इसमें से दो छात्र बुधवार देर रात को घर पहुंचे हैं। घर पहुंचते ही सबसे पहले यूक्रेन में फंसे छात्रों ने केंद्र सरकार की ओर से उन्हें बाहर निकालने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। इस दौरान यूक्रेन से लौटे इकौना कस्बा के गौतम नगर निवासी आर्यन प्रताप सिंह पुत्र अभय पत्राप सिंह ने बताया कि युद्ध के चलते कई दिनों सेल्टर हाउस में बिताने के बाद भारतीय एंबेसी की मदद से वह अपने साथियों के साथ लवीव शहर पहुंचे। वहां से रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। जहां से उन्हें हवाई जहाज से दिल्ली लाया गया। दिल्ली से इनोवा गाड़ियों से छात्रों को गंतव्य तक भेजा गया।
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यूक्रेन से वापस आए इकौना कस्बे के ही शास्त्री नगर निवासी छात्र सद्दाम राइनी पुत्र इसरार उर्फ बब्बू राइनी ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध के दौरान सभी छात्रों की कक्षाएं बंद हो चुकी थीं। ऑनलाइन क्लास भी नहीं चल रही थी। हालात अचानक बिगड़ जाने के कारण हम लोग परेशान हो गए। उस समय भारतीय एंबेसी के लोगों ने हम लोगों की मदद की। अपने साथियों के साथ हम लोग रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। वहां हम लोगों को करीब 48 घंटे लाइन में लगना पड़ा। वहां पर कई बार लाठी चार्ज भी हुआ। यहां पर कई देशों के करीब 10 हजार से अधिक छात्र बार्डर पार करने के लिए खड़े थे। किसी तरह हम लोग बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंचे। वहां से हम सभी छात्र भारतीय एंबेसी के माध्यम से हवाई जहाज से दिल्ली पहुंचे। दिल्ली से हमें सरकार ने ही घर तक पहुंचाया। घर पहुंचे छात्रों व उनके परिवारीजन ने भारतीय एंबेसी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके अलावा घर पहुंचने वालों में अवधेश प्रताप सिंह पुत्र विजय कुमार सिंह निवासी परेवपुर गिलौला व अभिषेक गुप्ता पुत्र राम आधार गुप्ता निवासी पुरानी बाजार दक्षिणी भिनगा शामिल हैं। वहीं भिनगा के कुन्ननपुर नौशहरा निवासी मुर्तजा पुत्र निसार अहमद पहले ही अपने घर पहुंचे चुके हैं जबकि एक छात्र रास्ते में है।
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वहां यह आ रही समस्या
यूक्रेन से आए छात्रों का कहना था कि वहां की भौगोलिक स्थिति असामान्य है। आबादी सघन नहीं है। कोई पांच सौ किलोमीटर दूर रहता है तो कोई एक हजार किलोमीटर। युद्ध के समय एक शहर से दूसरे शहर को पार करना कठिन हो जाता है। जब युद्ध विराम होता है तो भारतीय एंबेसी किसी तरह युद्ध क्षेत्र में फंसे रहने वाले छात्रों को बॉर्डर पार कराती है। बॉर्डर पार करने के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है। बॉर्डर पार करते ही नए देश में भारतीय एंबेसी के लोग छात्रों को रिसीव करते हैं। उन्हें खाना सहित अन्य सुविधाएं भारतीय शेल्टर होम में मिलती है। यदि किसी का सामान छूट गया हो तो उन्हें कपड़ा आदि भी भारतीय दूतावास उपलब्ध कराता है। लेकिन युद्ध क्षेत्र में कुछ खास नहीं हो पाता है।
सूमी में अभी फंसे जिले के दो छात्र
सूमी स्थित अपने छात्रावास के बंकर में चैनपुर भटपुरवा कला निवासी दिनेश कुमार चौहान व राहुल चौधरी अभी भी फंसे हुए हैं। सूमी में लगातार बमबारी हो रही है। ऐसे हालात में भारतीय दूतावास इन्हें बाहर नहीं निकाल पा रहा है। दोनों छात्र भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। दूतावास इनके परिवारीजनों से बातचीत अपने संसाधनों से करा रहे हैं। छात्र सुरक्षित हैं, लेकिन परिवारीजन डरे हुए हैं।
जिले से जिनके परिवार के सदस्य या बच्चे यूक्रेन में फंसे हैं। वह सभी लोग अपने परिवार के सदस्य या बच्चों का नाम, पता, मोबाइल नंबर, यूक्रेन का पता, यूक्रेन का मोबाइल नंबर और किस कार्य से यूक्रेन गए हैं। आपसे बात हो पा रही या नहीं। आदि का विस्तृत विवरण उप जिला मजिस्ट्रेट रोहित के मोबाइल नंबर 9794952862 पर दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त राज्य कंट्रोल रूम टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 0522-1070 पर जानकारी दे सकते हैं। -नेहा प्रकाश, डीएम