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पीसीएफ के पांच क्रय केंद्र होंगे बंद
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श्रावस्ती। पीसीएफ की ओर से संचालित पांच क्रय केंद्रों को डीएम ने बंद करने का आदेश दिया है। इन क्रय केंद्रों के प्रभारियों के खिलाफ विगत दिनों केस दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरी ओर जिले के अन्य 31 क्रय केंद्रों पर अघोषित रूप से धान की खरीद 15 दिन पहले से ही बंद कर दी गई थी। उधर धान खरीद बंद होने की घोषणा न होने के कारण किसान अब भी केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के लिए पहुंच रहे हैं।
जिले में धान खरीदने के लिए कुल 36 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इसमें 29 क्रय केंद्र पीसीएफ की ओर से संचालित किए जा रहे थे। जबकि सात क्रय केंद्र खाद्य विभाग की ओर से संचालित किए जा रहे थे। पीसीएफ की ओर से संचालित क्रय केंद्रों में से पांच क्रय केंद्र जमुनहा के इमलियाकरनपुर, गिलौला का तुलसीपुर, हरिहरपुररानी के मोहम्मदपुरकला, सिरसिया के बनकटवा जुड़पनिया व एकघरवा के क्रय केंद्र प्रभारियों पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया गया था। इसी के बाद इन क्रय केंद्रों पर दूसरे प्रभारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इस पर प्रभारियों ने अतिरिक्त केंद्र पर काम करने से मना कर दिया था। इससे इन पांच क्रय केंद्र के ताले नहीं खुल सके। इन्हीं केंद्रों को अब डीएम ने बंद करने का आदेश दिया है। वहीं दूसरी ओर जिले के बचे 31 क्रय केंद्रों पर विगत 15 दिनों से अघोषित रूप से धान खरीद का कार्य बंद है। इसके चलते किसान अपनी उपज को बेचने के चक्कर में क्रय केंद्रों में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
धान खरीद का लक्ष्य जिले में करीब 36 हजार एमटी निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष जिले में करीब 120 प्रतिशत धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने का दावा प्रशासन कर रहा है। इस दावे के सापेक्ष देखा जाए तो करीब आठ करोड़ रुपया अभी भी किसानों का बाकी है। वहीं दूसरी ओर जिले में अभी भी हजारों की संख्या में किसान ऐसे हैं जा अपनी उपज बेचने के लिए क्रय केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं।
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क्रय केंद्र खुलने के साथ ही किसानों ने आरोप लगाया था कि ऑनलाइन पंजीकरण के बाद भी उनका धान नहीं खरीदा जा रहा है। ऐसी ही शिकायत केवलपुर के दीनापुरवा निवासी किशोरी लाल वर्मा ने कुछ दिन पूर्व डीएम से मिल कर की थी। उनका दावा था कि उन्होंने धान बेचने के लिए अपना पंजीकरण कराया था। उनके पास कुल 37 क्विंटल धान था। महीनों चक्कर लगाने के बाद भी धान की खरीद नहीं हुई। अब उनके केंद्र पर धान खरीद बंद है।
धान खरीद का कार्य शुरुआती दौर से ही विवादित रहा। 12 जनवरी को इस विवाद को उस समय और हवा मिली जब पीसीएफ की ओर से संचालित 29 क्रय केंद्र प्रभारियों ने डीएम को पत्र लिख कर खाद्य विपणन अधिकारी के ऊपर पचास रुपये प्रति क्विंटल धन उगाही का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि खाद्य विपणन विभाग की ओर से ही सात क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। वहां पर कभी कोई जांच नहीं हुई। जबकि पीसीएफ की ओर से संचालित केंद्रों के प्रभारियों को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान किया जाता है।
एडीएम योगानंद पांडे का कहना है कि कुछ दिन पूर्व पांच क्रय केंद्र प्रभारियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके चलते यह क्रय केंद्र बंद चल रहे थे। इन क्रय केंद्रों को अब बंद करने का आदेश हुआ है।
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जिले में धान खरीदने के लिए कुल 36 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इसमें 29 क्रय केंद्र पीसीएफ की ओर से संचालित किए जा रहे थे। जबकि सात क्रय केंद्र खाद्य विभाग की ओर से संचालित किए जा रहे थे। पीसीएफ की ओर से संचालित क्रय केंद्रों में से पांच क्रय केंद्र जमुनहा के इमलियाकरनपुर, गिलौला का तुलसीपुर, हरिहरपुररानी के मोहम्मदपुरकला, सिरसिया के बनकटवा जुड़पनिया व एकघरवा के क्रय केंद्र प्रभारियों पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया गया था। इसी के बाद इन क्रय केंद्रों पर दूसरे प्रभारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इस पर प्रभारियों ने अतिरिक्त केंद्र पर काम करने से मना कर दिया था। इससे इन पांच क्रय केंद्र के ताले नहीं खुल सके। इन्हीं केंद्रों को अब डीएम ने बंद करने का आदेश दिया है। वहीं दूसरी ओर जिले के बचे 31 क्रय केंद्रों पर विगत 15 दिनों से अघोषित रूप से धान खरीद का कार्य बंद है। इसके चलते किसान अपनी उपज को बेचने के चक्कर में क्रय केंद्रों में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
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धान खरीद का लक्ष्य जिले में करीब 36 हजार एमटी निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष जिले में करीब 120 प्रतिशत धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने का दावा प्रशासन कर रहा है। इस दावे के सापेक्ष देखा जाए तो करीब आठ करोड़ रुपया अभी भी किसानों का बाकी है। वहीं दूसरी ओर जिले में अभी भी हजारों की संख्या में किसान ऐसे हैं जा अपनी उपज बेचने के लिए क्रय केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं।
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क्रय केंद्र खुलने के साथ ही किसानों ने आरोप लगाया था कि ऑनलाइन पंजीकरण के बाद भी उनका धान नहीं खरीदा जा रहा है। ऐसी ही शिकायत केवलपुर के दीनापुरवा निवासी किशोरी लाल वर्मा ने कुछ दिन पूर्व डीएम से मिल कर की थी। उनका दावा था कि उन्होंने धान बेचने के लिए अपना पंजीकरण कराया था। उनके पास कुल 37 क्विंटल धान था। महीनों चक्कर लगाने के बाद भी धान की खरीद नहीं हुई। अब उनके केंद्र पर धान खरीद बंद है।
धान खरीद का कार्य शुरुआती दौर से ही विवादित रहा। 12 जनवरी को इस विवाद को उस समय और हवा मिली जब पीसीएफ की ओर से संचालित 29 क्रय केंद्र प्रभारियों ने डीएम को पत्र लिख कर खाद्य विपणन अधिकारी के ऊपर पचास रुपये प्रति क्विंटल धन उगाही का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि खाद्य विपणन विभाग की ओर से ही सात क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। वहां पर कभी कोई जांच नहीं हुई। जबकि पीसीएफ की ओर से संचालित केंद्रों के प्रभारियों को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान किया जाता है।
एडीएम योगानंद पांडे का कहना है कि कुछ दिन पूर्व पांच क्रय केंद्र प्रभारियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके चलते यह क्रय केंद्र बंद चल रहे थे। इन क्रय केंद्रों को अब बंद करने का आदेश हुआ है।