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पारंपरिक छोड़ आधुनिक खेती पर ध्यान दें किसान : डीएम
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श्रावस्ती। अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग एवं मजदूरों की किल्लत के कारण पारंपरिक खेती घाटे का सौदा बन चुकी है। इससे निपटने के लिए किसानों को चाहिए कि वे पारंपरिक खेती किसानी छोड़कर आधुनिक खेती पर ध्यान दें। रबी के मौसम में सिर्फ गेहूं व मसूर ही नहीं फल व सब्जियों की खेती भी करें। साथ ही ज्यादा से ज्यादा जैविक उर्वरक व बर्मी कंपोस्ट का सहारा लें। जिससे आय में बढ़ोत्तरी हो सके। ये बातें शनिवार शाम सिरसिया के मोतीपुर कला में नाबार्ड द्वारा आयोजित गोष्ठी में जिलाधिकारी टीके शिबु ने कहीं।
डीएम ने कहा कि देश व प्रदेश के विकास का रास्ता गांव की गलियों से होकर निकलता है। गांव का किसान खुशहाल होगा तो निश्चित ही देश खुशहाल होगा। किसानों की तरक्की के लिए सरकार तमाम योजनाओं का संचालन कर रही है। किसान सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से जुड़कर लाभ लें। किसानों को अब अपनी परंपरागत खेती त्यागकर आधुनिक खेती करनी होगी। उन्हें अपने खेतों में धान व गेहूं के स्थान पर सब्जी व फलों की खेती पर विशेष ध्यान देना होगा। किसान व स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जो भी सामग्री बनाएं या उत्पादित करें, उन्हें वाजिब मूल्य दिलाने के लिए कारगर कदम उठाए जाएं। इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारी विशेष ध्यान दें। जिससे स्वयं सहायता समूह को आर्थिक रूप से फायदा मिल सके। सिंचाई के लिए तालाबों के जीर्णोद्धार को मनरेगा के तहत कार्रवाई की जाए। जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी आसानी से मिल सके। जिले में मातृ एवं शिशु मृत्युदर अन्य जिलों की तुलना में अधिक है। जो चिंता का विषय है। ऐसे में जिलेवासी अपने बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए टीके अवश्य लगाएं। कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहने पाए। मिशन शक्ति कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लोग ये प्रतिज्ञा करें कि वे अपनी बेटियों का बाल विवाह नहीं करेंगे। बेटियों को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाएंगे। साथ ही उनमें कोई भेदभाव नहीं करेंगे। इस दौरान सीडीओ ईशान प्रताप सिंह ने किसानों को बर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करने की सलाह दी। इस दौरान डीडीएम नाबार्ड एमपी बर्नवाल, जिला कृषि अधिकारी आरपी राना आदि ने गांव में पौधरोपण भी किया। इस मौके पर यहां मशरूम उत्पादन, मसाला उद्योग, पोषण वाटिका, बर्मी कंपोस्ट बनाने संबंधी स्टाल भी लगाए गए।
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डीएम ने कहा कि देश व प्रदेश के विकास का रास्ता गांव की गलियों से होकर निकलता है। गांव का किसान खुशहाल होगा तो निश्चित ही देश खुशहाल होगा। किसानों की तरक्की के लिए सरकार तमाम योजनाओं का संचालन कर रही है। किसान सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से जुड़कर लाभ लें। किसानों को अब अपनी परंपरागत खेती त्यागकर आधुनिक खेती करनी होगी। उन्हें अपने खेतों में धान व गेहूं के स्थान पर सब्जी व फलों की खेती पर विशेष ध्यान देना होगा। किसान व स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जो भी सामग्री बनाएं या उत्पादित करें, उन्हें वाजिब मूल्य दिलाने के लिए कारगर कदम उठाए जाएं। इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारी विशेष ध्यान दें। जिससे स्वयं सहायता समूह को आर्थिक रूप से फायदा मिल सके। सिंचाई के लिए तालाबों के जीर्णोद्धार को मनरेगा के तहत कार्रवाई की जाए। जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी आसानी से मिल सके। जिले में मातृ एवं शिशु मृत्युदर अन्य जिलों की तुलना में अधिक है। जो चिंता का विषय है। ऐसे में जिलेवासी अपने बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए टीके अवश्य लगाएं। कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहने पाए। मिशन शक्ति कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लोग ये प्रतिज्ञा करें कि वे अपनी बेटियों का बाल विवाह नहीं करेंगे। बेटियों को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाएंगे। साथ ही उनमें कोई भेदभाव नहीं करेंगे। इस दौरान सीडीओ ईशान प्रताप सिंह ने किसानों को बर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करने की सलाह दी। इस दौरान डीडीएम नाबार्ड एमपी बर्नवाल, जिला कृषि अधिकारी आरपी राना आदि ने गांव में पौधरोपण भी किया। इस मौके पर यहां मशरूम उत्पादन, मसाला उद्योग, पोषण वाटिका, बर्मी कंपोस्ट बनाने संबंधी स्टाल भी लगाए गए।
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