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खेत में पराली न जलाएं किसान करें अवशेष प्रबंधन
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श्रावस्ती। विकास भवन सभागार में गुरुवार को जिला स्तरीय कृषक जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी ने किया। इस दौरान उप कृषि निदेशक ने मौजूद किसानों को प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फार इन-सीटू मैनेजमेन्ट फार काप रेजिड् योजना के बारे में जानकारी दी।
कृषक जागरूकता कैंप में उप कृषि निदेशक कमल कटियार ने फसल अवशेष को जलाने से होने वाले दुष्परिणाम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि समय पर इसकी रोकथाम नहीं की गई तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ी को झेलना पड़ेगा। साथ ही बताया कि फसल अवशेष को जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है। जिससे मानव के स्वास्थ्य पर इसका काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेष को खेत में ही छोड़ देने से भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। इस दौरान उन्होंने इन-सीटू योजना के तहत फसल अवशेष के यत्रों जैसे कि मल्वर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्राचॉपर, एसएमएस आदि के बारे में कृषकों को जानकारी दी। जिनसे कृषक फसल अवशेष प्रबंधन कर सकते है। साथ ही बताया कि इन-सीटू योजनान्तर्गत कृषक कृषक उत्पादक संगठन एवं समूह का गठन कर फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना कर योजना से 80 प्रतिशत का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं।
इसके साथ ही एकल यंत्र लेकर कृषक 50 प्रतिशत अथवा सरकार द्वारा अनुमन्य अधिकतम अनुदान की राशि को अनुदान के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए सीडीओ ईशान प्रताप सिंह ने भी सलाह दी। इस मौके पर जिला कृषि अधिकारी आरपी राना, भूमि संरक्षण अधिकारी शिशिर वर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी सहित अन्य विभागों के अधिकारी व किसान मौजूद रहे।
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कृषक जागरूकता कैंप में उप कृषि निदेशक कमल कटियार ने फसल अवशेष को जलाने से होने वाले दुष्परिणाम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि समय पर इसकी रोकथाम नहीं की गई तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ी को झेलना पड़ेगा। साथ ही बताया कि फसल अवशेष को जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है। जिससे मानव के स्वास्थ्य पर इसका काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेष को खेत में ही छोड़ देने से भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। इस दौरान उन्होंने इन-सीटू योजना के तहत फसल अवशेष के यत्रों जैसे कि मल्वर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्राचॉपर, एसएमएस आदि के बारे में कृषकों को जानकारी दी। जिनसे कृषक फसल अवशेष प्रबंधन कर सकते है। साथ ही बताया कि इन-सीटू योजनान्तर्गत कृषक कृषक उत्पादक संगठन एवं समूह का गठन कर फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना कर योजना से 80 प्रतिशत का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं।
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इसके साथ ही एकल यंत्र लेकर कृषक 50 प्रतिशत अथवा सरकार द्वारा अनुमन्य अधिकतम अनुदान की राशि को अनुदान के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए सीडीओ ईशान प्रताप सिंह ने भी सलाह दी। इस मौके पर जिला कृषि अधिकारी आरपी राना, भूमि संरक्षण अधिकारी शिशिर वर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी सहित अन्य विभागों के अधिकारी व किसान मौजूद रहे।
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