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तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण : माता सुमेधा
Fri, 08 Aug 2025 01:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 08 Aug 2025 01:04 AM IST
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तपोस्थली का भ्रमण करते अनुयायी। संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों से गुलजार रही। सभी 45 अनुयायियों ने माता सुमेधा महाथेरो के नेतृत्व में गंध कुटी पर प्रार्थना की और तपोस्थली का भ्रमण किया।
तपोस्थली में पूजन के बाद आयोजित बौद्धसभा के दौरान माता सुमेधा ने बताया कि तृष्णा ही सब दुखों का मूल कारण है। तृष्णा के कारण ही संसार की विभिन्न वस्तुओं की ओर मनुष्य प्रवृत्त होता है और जब वह उन वस्तुओं को प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसे अपार दुख होता है।
आगे बताया कि तृष्णा के साथ मृत्यु प्राप्त करने वाला प्राणी फिर से जन्म लेता है और संसार के दुख-चक्र में पिसता रहता है। तृष्णा को त्याग देने का मार्ग ही मुक्ति का मार्ग है। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग दुख के निदान का मार्ग बताता है।
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तपोस्थली में पूजन के बाद आयोजित बौद्धसभा के दौरान माता सुमेधा ने बताया कि तृष्णा ही सब दुखों का मूल कारण है। तृष्णा के कारण ही संसार की विभिन्न वस्तुओं की ओर मनुष्य प्रवृत्त होता है और जब वह उन वस्तुओं को प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसे अपार दुख होता है।
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आगे बताया कि तृष्णा के साथ मृत्यु प्राप्त करने वाला प्राणी फिर से जन्म लेता है और संसार के दुख-चक्र में पिसता रहता है। तृष्णा को त्याग देने का मार्ग ही मुक्ति का मार्ग है। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग दुख के निदान का मार्ग बताता है।
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