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बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं
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विधिक शिविर में ग्रामीणों को जानकारी देते न्यायिक अधिकारी।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से ग्राम पंचायत परसा डेहरिया स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय डेहरिया में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य विषय बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, निशुल्क कानूनी सहायता, लोक अदालत का महत्व, आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता एवं अन्य कानूनी जानकारी देना था। इसकी शुरूआत प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की।
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के संदेश से जन जन को जागरूक करना है। अब बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। उन्होंने बालिकाओं को मिलने वाली निशुल्क शिक्षा, पॉक्सो एक्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों व कानूनों का ज्ञान नहीं होगा तब तक महिलाएं सशक्त नहीं होंगी।
उन्होंने आह्वान किया कि वह अत्याचारों को सहन न करें। सरकार की ओर से बनाए गए कानूनों का उपयोग कर अपने अधिकारों की रक्षा करें। मौजूदा दौर में लिंगानुपात में बालिकाओं की संख्या कम होना चिंता का विषय है। पूरी दुनिया में महिलायें अब कला, विज्ञान, निर्माण, प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और नेतृत्व आदि में पुरुषों के साथ बराबरी कर एक विकसित समाज की बुनियाद रख रही हैं। ऐसे में महिलाओं के साथ बढ़ती घटनायें लोगों को झकझोर देती हैं।
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महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए विशेष कानून बनाये गये हैं। कानून अभियुक्त को सजा देकर पीड़ित को न्याय दिलाते हैं। उन्होंने बताया कि 14 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अलग अलग मामलों की सुनवाई के लिए पीठों का गठन किया गया है। पुराने सुलह होने वाले मामलों के निपटारे के लिए इस तरह की लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।
इसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सुलह के आधार पर मामलों का निपटारा किया जायेगा। खंड शिक्षाधिकारी अखिलेश कुमार ने कहा कि गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग का आधुनिक तकनीकों के जरिये पता लगाना दंडनीय अपराध है। शिविर को अधिवक्ता पंकज देव गुप्ता, अनूप श्रीवास्तव, सुरेंद्र कुमार आर्य, अतुल कुमार, रज्जब अली सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के संदेश से जन जन को जागरूक करना है। अब बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। उन्होंने बालिकाओं को मिलने वाली निशुल्क शिक्षा, पॉक्सो एक्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों व कानूनों का ज्ञान नहीं होगा तब तक महिलाएं सशक्त नहीं होंगी।
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उन्होंने आह्वान किया कि वह अत्याचारों को सहन न करें। सरकार की ओर से बनाए गए कानूनों का उपयोग कर अपने अधिकारों की रक्षा करें। मौजूदा दौर में लिंगानुपात में बालिकाओं की संख्या कम होना चिंता का विषय है। पूरी दुनिया में महिलायें अब कला, विज्ञान, निर्माण, प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और नेतृत्व आदि में पुरुषों के साथ बराबरी कर एक विकसित समाज की बुनियाद रख रही हैं। ऐसे में महिलाओं के साथ बढ़ती घटनायें लोगों को झकझोर देती हैं।
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महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए विशेष कानून बनाये गये हैं। कानून अभियुक्त को सजा देकर पीड़ित को न्याय दिलाते हैं। उन्होंने बताया कि 14 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अलग अलग मामलों की सुनवाई के लिए पीठों का गठन किया गया है। पुराने सुलह होने वाले मामलों के निपटारे के लिए इस तरह की लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।
इसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सुलह के आधार पर मामलों का निपटारा किया जायेगा। खंड शिक्षाधिकारी अखिलेश कुमार ने कहा कि गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग का आधुनिक तकनीकों के जरिये पता लगाना दंडनीय अपराध है। शिविर को अधिवक्ता पंकज देव गुप्ता, अनूप श्रीवास्तव, सुरेंद्र कुमार आर्य, अतुल कुमार, रज्जब अली सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।