फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shravasti News ›   Buddhist followers pray on the gandh kuti

बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटि पर की प्रार्थना

Sat, 26 Oct 2019 12:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2019 12:03 AM IST
विज्ञापन
Buddhist followers pray on the gandh kuti
बौद्ध तपोस्थली में विशेष पूजा करते बौद्ध अनुयायी। - फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को अनुयायियों से गुलजार रही। बर्मा से आए अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु ओबाथा के नेतृत्व में अपने रीति रिवाज से गंध कुटि पर पूजन किया। इसके बाद दल के सदस्यों ने तपोस्थली का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी भी लिया।
विज्ञापन

गंधकुटि पर पूजन के दौरान बौद्ध भिक्षु ओवाथा ने बताया कि एक बार भिक्षु पिंडोल भारद्वाज राजगृह में भ्रमण कर रहे थे। वहां उन्होंने एक श्रेष्ठी को एक ऊंची लाठी पर चंदन की लकड़ी का एक कटोरा लटकवाते देखा। कारण पूछने पर उन्हें ज्ञात हुआ कि उस श्रेष्ठी को न तो आध्यात्मिक सिद्धियों पर विश्वास था और न ही किसी सिद्ध संयासी पर। अत: संयासियों का माखौल उड़ाने के उद्देश्य से उसने उस बांस के लंबे डंडे पर वह कटोरा लटकवाया था।
विज्ञापन

भिक्षु पिंडोल भारद्वाज ने श्रेष्ठी के अभिमान को दूर करने के लिए उड़ते हुए उस बांस के शीर्ष पर से चंदन के उस कटोरे को उतार लिया। बुद्ध ने जब भिक्षु पिंडोल भारद्वाज द्वारा राहगीर को दिखाए गये उस रास्ते के चमत्कार की चर्चा सुनी तो उन्होंने भिक्षुओं को जनसाधारण को बीच चमत्कार न दिखाने का आदेश दिया। तब वह कई छोटे सन्यासियों को अपने चमत्कार दिखाकर उन्हें प्रभावित करने और बौद्धों को पाखंडी घोषित करने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

जब मगधराज बिम्बिसार को इसकी सूचना मिली तो वह बुद्ध के पास पहुंचे। और उनसे श्रावस्ती में चमत्कार दिखाने की प्रार्थना की। चूंकि गौतम बुद्ध के पूर्वोत्तर बुद्धों ने भी श्रावस्ती में चमत्कार दिखाए थे। अत: गौतम ने भी बिम्बिसार की प्रार्थना स्वीकार की और श्रावस्ती में अपने चमत्कार दिखाये। वहां उन्होंने रत्नों की एक छत बनाई और उड़ते हुए उस पर पहुंच चक्रमण करने लगे।

तब कुछ प्रचलित लोक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने स्वयं को हजार रूपों में एक साथ प्रकट किया। फिर अन्य बुद्धों की तरह ही तीन पगों में तावलिंस लोक पहुंच गये। बुद्ध के इन चमत्कारों से उनके आलोचक श्रावस्ती छोड़कर भाग खड़े हुए। कहा जाता है कि पूरण कस्सप ने भी तभी श्रावस्ती छोड़ा और रास्ते में उनका अंतकाल हुआ था। पूजा के बाद अनुयायियों ने जेतवन आदि का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed