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Shravasti News: रखें सावधानी, सीओपीडी के मरीजों पर नहीं भारी पड़ेगी ठंड
Tue, 06 Jan 2026 01:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 06 Jan 2026 01:04 AM IST
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जिला चिकित्सालय में दमा रोगी को सलाह देते चिकित्सक। - संवाद
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श्रावस्ती। ठंड का प्रकोप जैसे-जैसे बढ़ रहा है, जिला अस्पताल में सांस से संबंधित मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इन मरीजों में निमोनिया व सीओपीडी के मरीजों की संख्या अधिक रहती है। चिकित्सक मरीजों को ठंड से बचाव का उपाय सुझा रहे हैं।
तराई में पूरे दिन छाए बादल व गलन लोगों को बेहाल कर रही है। ऐसे में सांस संबंधी मरीजों को अधिक दिक्कत हो रही है। जिला चिकित्सालय में सोमवार को लगभग 532 मरीज पहुंचे। इनमें से 65 मरीज सांस रोग की समस्या से पीड़ित रहे।
चेस्ट फिजीशियन डॉ. शिवम प्रियदर्शी ने बताया कि ठंड के मौसम में सांस के मरीजों की संख्या अधिक हो जाती है। कारण यह है कि ठंड में हवा में नमी अधिक होती है। ऐसे में धूल के कण भी हवा के साथ फेफड़ों में चले जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है।
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बताया कि फेफड़ों की धमनियां ठंड के कारण सूज जाती हैं। बलगम अधिक बनने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीजों को अधिक परेशानी होती है। इसी तरह बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की वजह से वायु थैलियों में सूजन आने से निमोनिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
सांस के मरीजों को ये सावधानियां बरतें
चिकित्सक ने बताया कि ठंड के मौसम में भले ही धूप निकली हो, फिर भी नाक व कान को अच्छी तरह से ढंक कर रखना चाहिए, जिससे सीओपीडी व दमा के मरीजों को धूल, प्रदूषण और ठंडी हवा से बचाव हो सके। फ्लू और निमोनिया का टीका अवश्य लगवाएं, धूम्रपान का सेवन न करें। घर के अंदर ही व्यायाम करें और हमेशा अपना इन्हेलर साथ रखें। साथ ही स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दें। अलाव तापने से बचें और गुनगुना पानी ही पिएं। किसी भी प्रकार की समस्या हो, तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। इन सावधानियों को अपनाने से ठंड के मौसम में भी समस्या से बच सकते हैं।
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तराई में पूरे दिन छाए बादल व गलन लोगों को बेहाल कर रही है। ऐसे में सांस संबंधी मरीजों को अधिक दिक्कत हो रही है। जिला चिकित्सालय में सोमवार को लगभग 532 मरीज पहुंचे। इनमें से 65 मरीज सांस रोग की समस्या से पीड़ित रहे।
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चेस्ट फिजीशियन डॉ. शिवम प्रियदर्शी ने बताया कि ठंड के मौसम में सांस के मरीजों की संख्या अधिक हो जाती है। कारण यह है कि ठंड में हवा में नमी अधिक होती है। ऐसे में धूल के कण भी हवा के साथ फेफड़ों में चले जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है।
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बताया कि फेफड़ों की धमनियां ठंड के कारण सूज जाती हैं। बलगम अधिक बनने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीजों को अधिक परेशानी होती है। इसी तरह बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की वजह से वायु थैलियों में सूजन आने से निमोनिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
सांस के मरीजों को ये सावधानियां बरतें
चिकित्सक ने बताया कि ठंड के मौसम में भले ही धूप निकली हो, फिर भी नाक व कान को अच्छी तरह से ढंक कर रखना चाहिए, जिससे सीओपीडी व दमा के मरीजों को धूल, प्रदूषण और ठंडी हवा से बचाव हो सके। फ्लू और निमोनिया का टीका अवश्य लगवाएं, धूम्रपान का सेवन न करें। घर के अंदर ही व्यायाम करें और हमेशा अपना इन्हेलर साथ रखें। साथ ही स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दें। अलाव तापने से बचें और गुनगुना पानी ही पिएं। किसी भी प्रकार की समस्या हो, तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। इन सावधानियों को अपनाने से ठंड के मौसम में भी समस्या से बच सकते हैं।