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कब्रों से बाहर आने लगीं लाशें, फैली दुर्गंध
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कब्रों से बाहर आने लगी लाशें, फैली दुर्गंध
-- पानी उतरने के साथ ही बढ़ा संक्रामक रोगों का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। बाढ़ के कम होते पानी के बावजूद प्रभावित इलाकों में लोगों की दुश्वारियां थमने का नाम नहीं ले रही। इलाके के कब्रिस्तान में बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही कब्र में दफनाई लाशें भी पानी के साथ निकल कर बाहर उतराती तो कही मिट्टी में आधी धंसी दिखाई दे रही है। इंसानों के साथ ही मवेशियों की लाशें भी बाढ़ नियंत्रण के लिए लगाए परकूपाइन में फंसी नजर आ रही हैं। पानी में सड़ रही इन लाशों के कारण चारों तरफ तेज दुर्गंध के साथ ही संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
बाढ़ के कारण कब्रिस्तान इलाके में पहले तो नदी की धारा में ही यदा कदा कोई लाश बहती दिख रही थी लेकिन बाढ़ का पानी घटने के साथ ही कब्र से निकली लाशें अब जगह जगह फैली दिख रही है। शनिवार को तिलकपुर तटबंध के निकट परकूपाइन में एक इंसानी लाश के साथ ही कई मवेशियों की लाशें भी फंसी दिखाई दी। कब्रों से निकल रही इंसानी लाशों के साथ ही कछारी क्षेत्र में मृत मवेशियों की लाशें भी दुर्गंध फैला रही हैं। विगत दो दिनों से निकल रही धूप के बाद स्थिति और बिगड़ने लगी है। तेज बदबू व गंदगी के कारण नदी के तटीय इलाके से गुजरना तक मुहाल हो गया है। हालांकि प्रभावित इलाकों में संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर पंचायत राज विभाग के स्तर पर सफाई कर्मियों द्वारा गांवों में चूना व ब्लीचिंग के छिड़काव के साथ ही फागिंग का कार्य भी कराया जा रहा है। लेकिन गांव क्षेत्र के बाहर निरोधात्मक कार्रवाई न होने से तटीय इलाकों में परेशानी लगातार बढ़ रही है।
आंकड़ों में उलझा पशु टीकाकरण
पशु टीकाकरण के लिए जिले में बारह शिविर लगाए गए हैं। इन पशु शिविरों में अब तक 19900 पशुओं के टीकाकरण का दावा किया जा रहा है। यही नहीं प्रतिदिन 900 पशुओं के टीकाकरण का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया जबकि बाढ़ के कारण गोआश्रय केंद्रों के पशुओं को छोड़ दिया गया था। गांवों में आज भी कीचड़ व जलभराव की स्थिति है तो इतने पशु शिविर में टीम को टीकाकरण के लिए कहां से मिल गए। इस पर जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
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-- पानी उतरने के साथ ही बढ़ा संक्रामक रोगों का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। बाढ़ के कम होते पानी के बावजूद प्रभावित इलाकों में लोगों की दुश्वारियां थमने का नाम नहीं ले रही। इलाके के कब्रिस्तान में बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही कब्र में दफनाई लाशें भी पानी के साथ निकल कर बाहर उतराती तो कही मिट्टी में आधी धंसी दिखाई दे रही है। इंसानों के साथ ही मवेशियों की लाशें भी बाढ़ नियंत्रण के लिए लगाए परकूपाइन में फंसी नजर आ रही हैं। पानी में सड़ रही इन लाशों के कारण चारों तरफ तेज दुर्गंध के साथ ही संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
बाढ़ के कारण कब्रिस्तान इलाके में पहले तो नदी की धारा में ही यदा कदा कोई लाश बहती दिख रही थी लेकिन बाढ़ का पानी घटने के साथ ही कब्र से निकली लाशें अब जगह जगह फैली दिख रही है। शनिवार को तिलकपुर तटबंध के निकट परकूपाइन में एक इंसानी लाश के साथ ही कई मवेशियों की लाशें भी फंसी दिखाई दी। कब्रों से निकल रही इंसानी लाशों के साथ ही कछारी क्षेत्र में मृत मवेशियों की लाशें भी दुर्गंध फैला रही हैं। विगत दो दिनों से निकल रही धूप के बाद स्थिति और बिगड़ने लगी है। तेज बदबू व गंदगी के कारण नदी के तटीय इलाके से गुजरना तक मुहाल हो गया है। हालांकि प्रभावित इलाकों में संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर पंचायत राज विभाग के स्तर पर सफाई कर्मियों द्वारा गांवों में चूना व ब्लीचिंग के छिड़काव के साथ ही फागिंग का कार्य भी कराया जा रहा है। लेकिन गांव क्षेत्र के बाहर निरोधात्मक कार्रवाई न होने से तटीय इलाकों में परेशानी लगातार बढ़ रही है।
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आंकड़ों में उलझा पशु टीकाकरण
पशु टीकाकरण के लिए जिले में बारह शिविर लगाए गए हैं। इन पशु शिविरों में अब तक 19900 पशुओं के टीकाकरण का दावा किया जा रहा है। यही नहीं प्रतिदिन 900 पशुओं के टीकाकरण का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया जबकि बाढ़ के कारण गोआश्रय केंद्रों के पशुओं को छोड़ दिया गया था। गांवों में आज भी कीचड़ व जलभराव की स्थिति है तो इतने पशु शिविर में टीम को टीकाकरण के लिए कहां से मिल गए। इस पर जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
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