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घटते जलस्तर के साथ ही राप्ती की लहरें तेजी से कर रहीं कटान
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श्रावस्ती। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हुई बरसात के बाद बीते दिनों राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। जो घटकर अब सामान्य स्तर पर आ चुका है। घटते जलस्तर के बावजूद राप्ती की लहरों ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दिया है। इसके चलते कछार में बसे ककरदरी सहित कई अन्य गांवों में खड़ी फसल पर खतरा मंडराने लगा है। अब तक कई किसानों क खेत व खलिहान कट कर नदी की धारा में विलीन होेचुके हैं।
नदी के घटते जलस्तर के बावजूद राप्ती नदी की लहरों ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दी है। इसके चलते राप्ती नदी के कछार में बसे हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र के ग्राम ककरदरी में राप्ती नदी की धारा ने किसान महेश कुमार का 5 बीघा, सीताराम का 2 बीघा, रिकीराम का 6 बीघा, रामकुमार का 4 बीघा, रामखेलावन का 5 बीघा, चेतराम का 5 बीघा, भाईलाल का 5 बीघा, मनसा राम का 4 बीघा, कैसर अली का 4 बीघा, ननकू का 4 बीघा, छोटेलाल का 5 बीघा, ननकू यादव का 10 बीघा, बादल पासी का 10 बीघा, रामजस का 8 बीघा, पवन कुमार का 5 बीघा, जुमाई का 7 बीघा, सिकंदर का 15 बीघा, मुकद्दर का 10 बीघा, कुंवारे का 10 बीघा, फारुक का 8 बीघा, टोके यादव का 5 बीघा सहित करीब 127 बीघा कृषि भूमि फसल सहित कट कर नदी की धारा में समाहित हो चुकी है।
यही स्थिति राप्ती की कछार में बसे मनिकापुर, ओरीपुरवा, भुड़कुलवा सहित अन्य गांव की भी है। जहां राप्ती की लहरें फसल सहित खेत व खलिहान को काट कर अपने में समेट रही है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कटान को रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गयी है। एडीएम योगानंद पांडे बताते हैं कि कछार में हो रही कटान की जांच हल्का लेखपाल से करा कर किसानों की हर संभव मदद करायी जाएगी।
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नदी के घटते जलस्तर के बावजूद राप्ती नदी की लहरों ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दी है। इसके चलते राप्ती नदी के कछार में बसे हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र के ग्राम ककरदरी में राप्ती नदी की धारा ने किसान महेश कुमार का 5 बीघा, सीताराम का 2 बीघा, रिकीराम का 6 बीघा, रामकुमार का 4 बीघा, रामखेलावन का 5 बीघा, चेतराम का 5 बीघा, भाईलाल का 5 बीघा, मनसा राम का 4 बीघा, कैसर अली का 4 बीघा, ननकू का 4 बीघा, छोटेलाल का 5 बीघा, ननकू यादव का 10 बीघा, बादल पासी का 10 बीघा, रामजस का 8 बीघा, पवन कुमार का 5 बीघा, जुमाई का 7 बीघा, सिकंदर का 15 बीघा, मुकद्दर का 10 बीघा, कुंवारे का 10 बीघा, फारुक का 8 बीघा, टोके यादव का 5 बीघा सहित करीब 127 बीघा कृषि भूमि फसल सहित कट कर नदी की धारा में समाहित हो चुकी है।
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यही स्थिति राप्ती की कछार में बसे मनिकापुर, ओरीपुरवा, भुड़कुलवा सहित अन्य गांव की भी है। जहां राप्ती की लहरें फसल सहित खेत व खलिहान को काट कर अपने में समेट रही है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कटान को रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गयी है। एडीएम योगानंद पांडे बताते हैं कि कछार में हो रही कटान की जांच हल्का लेखपाल से करा कर किसानों की हर संभव मदद करायी जाएगी।
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