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Shravasti News: तानों को अनदेखा करके हर महीने 35 हजार कमा रहीं अंजू
Mon, 15 Dec 2025 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 15 Dec 2025 12:39 AM IST
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कटरा निवासी अंजू। - संवाद
वीरपुर। कटरा निवासी अंजू स्वयं सहायता समूह से मिले 50 हजार रुपये के ऋण से पार्लर चलाकर अब हर महीने 35 हजार रुपये कमा रही हैं। स्थानीय महिलाओं व बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें भी अपने पार्लर में प्रशिक्षण दे रही हैं।
अपने संघर्षों को बयां करते हुए अंजू ने बताया कि उनके पति राम अक्षयवर वर्मा पर पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदार थी। वह उनकी मदद करना चाहती थीं, लेकिन बेहतर साधन नहीं मिल रहा था। इस बीच समूह की दीदियों ने उनसे बचत करने व स्वरोजगार के लिए समूह से ऋण प्राप्त करने की योजना बताई।
इसके बाद उन्होंने समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर पार्लर शुरू किया। पार्लर खोलने पर उन्हें तानों का सामना करना पड़ा और कई लोगो ने घर की महिला के काम करने की भी बात कही। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने काम में लगी रहीं।
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अंजू बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें बस चार हजार रुपये की आमदनी ही हो पा रही थी, इस पर सभी ने काम बंद करने के लिए कहा। एक साल के बच्चे का पालन-पोषण करने के साथ-साथ काम संभालना भी मुश्किल भरा था। बावजूद इसके, वह अपने काम में लगी रहीं और हिम्मत नहीं हारी।
पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद अब वह हर महीने 35 हजार रुपये कमा रही हैं। साथ ही स्थानीय महिलाओं व युवतियों को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए आत्मनिर्भर बना रही हैं।
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अपने संघर्षों को बयां करते हुए अंजू ने बताया कि उनके पति राम अक्षयवर वर्मा पर पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदार थी। वह उनकी मदद करना चाहती थीं, लेकिन बेहतर साधन नहीं मिल रहा था। इस बीच समूह की दीदियों ने उनसे बचत करने व स्वरोजगार के लिए समूह से ऋण प्राप्त करने की योजना बताई।
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इसके बाद उन्होंने समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर पार्लर शुरू किया। पार्लर खोलने पर उन्हें तानों का सामना करना पड़ा और कई लोगो ने घर की महिला के काम करने की भी बात कही। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने काम में लगी रहीं।
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अंजू बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें बस चार हजार रुपये की आमदनी ही हो पा रही थी, इस पर सभी ने काम बंद करने के लिए कहा। एक साल के बच्चे का पालन-पोषण करने के साथ-साथ काम संभालना भी मुश्किल भरा था। बावजूद इसके, वह अपने काम में लगी रहीं और हिम्मत नहीं हारी।
पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद अब वह हर महीने 35 हजार रुपये कमा रही हैं। साथ ही स्थानीय महिलाओं व युवतियों को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए आत्मनिर्भर बना रही हैं।