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Shravasti News: सर्पदंश से बचाव की एडवाइजरी जारी
Fri, 25 Jul 2025 12:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 25 Jul 2025 12:21 AM IST
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- डीएम ने की दिशा निर्देशों का पालन करने की अपीलसंवाद न्यूज एजेंसी श्रावस्ती। जिले में बढ़ रही सर्पदंश की घटनाओं से प्रभावितों को बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने लोगों से दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
डीएम ने बताया कि सर्पदंश एक गंभीर आपदा के रूप में सामने आई है। इसे राज्य आपदा की श्रेणी में शामिल किया गया है। बरसात में सर्प अक्सर बाहर निकल आते हैं। सर्पदंश से बचाव व उसके लक्षण के विषय में जानकारी प्राप्त कर स्वयं बचे तथा दूसरे को भी बचाने का प्रयास करें। भारत में अन्य देशों की तुलना में विषैले सर्प मात्र 15 प्रतिशत ही हैं। इसके बावजूद मौत का आंकड़ा अधिक है। इसका कारण लोगों में अज्ञानता व समय से उपचार न कराकर झाड़ फूंक आदि पर ज्यादा विश्वास करना है।
सर्पदंश में यह करें उपाय
काटे स्थान को साबुन व पानी से धोएं, दांत के निशान की जांच करें, कहीं जहरीले सर्प के काटने का दो दांत का निशान तो नहीं, कटे अंग को हृदय के लेवल से नीचे रखें। सर्पदंश वाले अंग को स्थिर (फिक्स) करें, घाव पर बैंडेज लगाएं। घायल व्यक्ति को सांत्वना दे, घबराहट से हृदय गति तेज चलने से रक्त संचरण तेज हो जाएगा और जहर सारे शरीर में जल्द फैल जाएगा। मरीज को अस्पताल ले जाकर एंटी वेनम लगवाएं।
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यह कदापि न करें
बर्फ या अन्य गर्म पदार्थ का इस्तेमाल काटे स्थान पर न करें, प्रभावित व्यक्ति के कटे स्थान पर टूर्निकेट न बॉधे। इससे संबंधित अंग में रक्त प्रवाह पूरी तरह रुक सकता है और संबंधित अंग की क्षति हो सकती है। काटे स्थल पर चीरा न लगाए। यह आगे नुकसान पहुंचाता है, घायल को चलने से रोकें, शराब व नींद आने की कोई दवा न दें, मुंह से कटे हुए स्थान को न चूसे, मंत्र या तांत्रिक के झांसे में न आएं व भय एवं चिंता न करें सभी सांप जहरीले नहीं होते हैं।
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डीएम ने बताया कि सर्पदंश एक गंभीर आपदा के रूप में सामने आई है। इसे राज्य आपदा की श्रेणी में शामिल किया गया है। बरसात में सर्प अक्सर बाहर निकल आते हैं। सर्पदंश से बचाव व उसके लक्षण के विषय में जानकारी प्राप्त कर स्वयं बचे तथा दूसरे को भी बचाने का प्रयास करें। भारत में अन्य देशों की तुलना में विषैले सर्प मात्र 15 प्रतिशत ही हैं। इसके बावजूद मौत का आंकड़ा अधिक है। इसका कारण लोगों में अज्ञानता व समय से उपचार न कराकर झाड़ फूंक आदि पर ज्यादा विश्वास करना है।
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सर्पदंश में यह करें उपाय
काटे स्थान को साबुन व पानी से धोएं, दांत के निशान की जांच करें, कहीं जहरीले सर्प के काटने का दो दांत का निशान तो नहीं, कटे अंग को हृदय के लेवल से नीचे रखें। सर्पदंश वाले अंग को स्थिर (फिक्स) करें, घाव पर बैंडेज लगाएं। घायल व्यक्ति को सांत्वना दे, घबराहट से हृदय गति तेज चलने से रक्त संचरण तेज हो जाएगा और जहर सारे शरीर में जल्द फैल जाएगा। मरीज को अस्पताल ले जाकर एंटी वेनम लगवाएं।
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यह कदापि न करें
बर्फ या अन्य गर्म पदार्थ का इस्तेमाल काटे स्थान पर न करें, प्रभावित व्यक्ति के कटे स्थान पर टूर्निकेट न बॉधे। इससे संबंधित अंग में रक्त प्रवाह पूरी तरह रुक सकता है और संबंधित अंग की क्षति हो सकती है। काटे स्थल पर चीरा न लगाए। यह आगे नुकसान पहुंचाता है, घायल को चलने से रोकें, शराब व नींद आने की कोई दवा न दें, मुंह से कटे हुए स्थान को न चूसे, मंत्र या तांत्रिक के झांसे में न आएं व भय एवं चिंता न करें सभी सांप जहरीले नहीं होते हैं।