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Shravasti News: वियतनाम के अनुयायियों का 40 सदस्यीय पहुंचा श्रावस्ती
Fri, 27 Mar 2026 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:50 PM IST
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गंध कुटी में पूजा करते वियतनाम से आए अनुयायी।-
कटरा। वियतनाम के अनुयायियों का 40 सदस्यीय दल शुक्रवार को दर्शन-पूजन के लिए बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी अनुयायियों ने भिक्षु भवरानंद के नेतृत्व में गंधकुटी पर पारंपरिक तरीके से दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु भंवरानंद ने कहा कि दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करने वाला बोधिसत्व कहलाता है। बोधिसत्व जब दस बलों या भूमियों को प्राप्त कर लेते हैं, तब बुद्ध कहलाते हैं। बुद्ध बनना ही बोधिसत्व के जीवन की पराकाष्ठा है, जिसे बोधि यानी ज्ञान कहा गया है। बुद्ध शाक्यमुनि केवल एक बुद्ध नहीं हैं, उनके पहले भी कई बुद्ध हुए और भविष्य में भी होंगे। कोई भी व्यक्ति दस पारमिताओं का पालन कर बोधिसत्व और फिर बुद्धत्व प्राप्त कर सकता है। बौद्ध धर्म का अंतिम लक्ष्य संपूर्ण मानव समाज से दुख का अंत करना है। बुद्ध ने अपने उपदेश में कहा था कि मैं सिखाता हूं कि दुख है, दुख का कारण है और दुख के निरोध का मार्ग है। अनुयायियों ने तपोस्थली के अन्य स्थानों का भ्रमण कर उनके इतिहास की भी जानकारी ली।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु भंवरानंद ने कहा कि दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करने वाला बोधिसत्व कहलाता है। बोधिसत्व जब दस बलों या भूमियों को प्राप्त कर लेते हैं, तब बुद्ध कहलाते हैं। बुद्ध बनना ही बोधिसत्व के जीवन की पराकाष्ठा है, जिसे बोधि यानी ज्ञान कहा गया है। बुद्ध शाक्यमुनि केवल एक बुद्ध नहीं हैं, उनके पहले भी कई बुद्ध हुए और भविष्य में भी होंगे। कोई भी व्यक्ति दस पारमिताओं का पालन कर बोधिसत्व और फिर बुद्धत्व प्राप्त कर सकता है। बौद्ध धर्म का अंतिम लक्ष्य संपूर्ण मानव समाज से दुख का अंत करना है। बुद्ध ने अपने उपदेश में कहा था कि मैं सिखाता हूं कि दुख है, दुख का कारण है और दुख के निरोध का मार्ग है। अनुयायियों ने तपोस्थली के अन्य स्थानों का भ्रमण कर उनके इतिहास की भी जानकारी ली।
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