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Shravasti News: दो माह से घर बैठीं कस्तूरबा की 56 छात्राएं

Thu, 28 Aug 2025 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Thu, 28 Aug 2025 12:33 AM IST
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56 students of Kasturba have been sitting at home for two months
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सिरसिया। -संवाद
श्रावस्ती। जहां एक ओर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है, तो वहीं जिले में जिम्मेदारों के ढुलमुल रवैये से 56 छात्राओं की पढ़ाई बाधित है। स्कूल में दाखिले के बाद भी दो माह से छात्राएं घर पर बैठी हैं। छात्राएं अब दूसरे स्कूल में एडमिशन भी नहीं करवा पा रही हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब बालिकाओं को बेहतर आवासीय शिक्षा देने के लिए जिले के दो कस्तूरबा विद्यालयों को उच्चीकृत किया गया है। कस्तूरबा विद्यालय सिरसिया व इकौना को कक्षा आठ से इंटरमीडिएट तक उच्चीकृत किया गया है।
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शासन-प्रशासन की इस कवायद के बाद सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। ग्रामीणों ने बढ़चढ़ कर अपनी बेटियों का एडमिशन करवाया, दोनों विद्यालयों में 28-28 छात्राओं का दाखिला हो चुका है।
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सभी छात्राओं को जुलाई से पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन अगस्त बीतने को है, फिर भी पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका है।


बिल्डिंग हैंडओवर होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शिक्षकों को जल्द ही नियुक्ति पत्र भी वितरित कर दिया जाएगा। अगले एक सप्ताह के भीतर भव्य उद्घाटन के साथ शिक्षण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
-नीलम, डीसी गर्ल्स




पिछड़ रही पढ़ाई
बेहतर शिक्षा पाने के लिए कस्तूरबा विद्यालय में दाखिला लिया था, लेकिन शिक्षण कार्य शुरू न होने से घर बैठी हूं। कोर्स पिछड़ रहा है।
-रिया राना, सिरसिया
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मां का हाथ बंटाना मजबूरी
जुलाई से ही पढ़ाई शुरू होने की जानकारी मिली थी, लेकिन दो माह बाद भी पढ़न-पाठन शुरू नहीं हुआ। घर में रहकर घरेलू कार्यों में मां का हाथ बंटाना मजबूरी है।

-वैष्णवी राना, सिरसिया
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देरी से बढ़ेगा कोर्स का बोझ
लगभग दो माह बीतने को हैं फिर भी शिक्षण कार्य शुरू नहीं हुआ। देरी से पढ़ाई शुरू होने पर कोर्स का बोझ बढ़ेगा और शिक्षण की गुणवत्ता में कमी आएगी।
-बिंदू वर्मा, सिरसिया
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साथी सहेलियां जा रहीं स्कूल
बेहतर पढ़ाई के साथ आवासीय सुविधा मिलने की उम्मीद में केजीबी में दाखिला लिया था, लेकिन सब बर्बाद हो गया। सहेलियां प्रतिदिन स्कूल जाती हैं। उनसे मेरी पढ़ाई पिछड़ रही है।
-ममता, सिरसिया
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