{"_id":"5c51f075bdec220bb35c2cfc","slug":"51548873845-shravasti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्तित्व में आए ब्लाक तो दूर हो लोगों की दुश्वारियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्तित्व में आए ब्लाक तो दूर हो लोगों की दुश्वारियां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रावस्ती। लक्ष्मनपुर क्षेत्र के लोगों को ब्लाक संबंधित कार्यों के लिए आज भी चालीस किलोमीटर की गणेश परिक्रमा करनी पड़ती है।
इससे निजात दिलाने के लिए पूर्व सरकार द्वारा सिरसिया, इकौना व हरिहरपुररानी के गांवों को काट कर लक्ष्मनपुर ब्लाक का गठन किया गया था। जहां प्रभारी खंड विकास अधिकारी की तैनाती भी की गई थी।
सत्ता परिवर्तन के बाद घोषणा पर अमल नहीं हुआ। जिससे लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं। सीमावर्ती सिरसिया विकास क्षेत्र के लक्ष्मनपुर बाजार व उसके आसपास के ग्रामीणों को ब्लॉक स्तरीय कार्य के लिए आज भी सिरसिया का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
लक्ष्मनपुर सिरसिया मार्ग पर पड़ने वाले पहाड़ी नाले के कारण मार्ग पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में या तो लोगों को निजी संसाधनों से जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
उन्हें पहले पंद्रह किलोमीटर भिनगा फिर भिनगा से पच्चीस किलोमीटर वापस सिरसिया जाना पड़ता है। लक्ष्मनपुर को ब्लॉक मुख्यालय का दर्जा देने की मांग कई दशक से की जा रही थी।
पूर्व सरकार में स्थानीय विधायक के प्रयास के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा 18 अक्टूबर को आयुक्त ग्राम्य विकास की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
समिति की संस्तुति के बाद मुख्यमंत्री द्वारा सिरसिया, इकौना व हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र के करीब सात न्याय पंचायतों में शामिल गांवों को शामिल कर लक्ष्मनपुर ब्लॉक बनाया गया था।
जिसका मुख्यालय लक्ष्मनपुर बाजार को बनाया गया था। उस समय तत्कालीन सीडीओ द्वारा प्रभारी खंड विकास अधिकारी सिरसिया को लक्ष्मनपुर के भी बीडीओ का प्रभार सौंपा गया था।
सत्ता परिवर्तन के बाद यह घोषणा ही रही। आज भी लोगों को ब्लाक स्तरीय कार्यों के लिए सिरसिया का ही चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिससे लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि अस्तित्व में आए लक्ष्मनपुर ब्लाक तो दूर हो क्षेत्र वासियों की दुश्वारियां। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी अवनीश राय बताते हैं कि 18 जनवरी को विशेष सचिव का एक पत्र जिले को प्राप्त हुआ है।
विज्ञापन
इससे निजात दिलाने के लिए पूर्व सरकार द्वारा सिरसिया, इकौना व हरिहरपुररानी के गांवों को काट कर लक्ष्मनपुर ब्लाक का गठन किया गया था। जहां प्रभारी खंड विकास अधिकारी की तैनाती भी की गई थी।
सत्ता परिवर्तन के बाद घोषणा पर अमल नहीं हुआ। जिससे लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं। सीमावर्ती सिरसिया विकास क्षेत्र के लक्ष्मनपुर बाजार व उसके आसपास के ग्रामीणों को ब्लॉक स्तरीय कार्य के लिए आज भी सिरसिया का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
लक्ष्मनपुर सिरसिया मार्ग पर पड़ने वाले पहाड़ी नाले के कारण मार्ग पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में या तो लोगों को निजी संसाधनों से जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
उन्हें पहले पंद्रह किलोमीटर भिनगा फिर भिनगा से पच्चीस किलोमीटर वापस सिरसिया जाना पड़ता है। लक्ष्मनपुर को ब्लॉक मुख्यालय का दर्जा देने की मांग कई दशक से की जा रही थी।
पूर्व सरकार में स्थानीय विधायक के प्रयास के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा 18 अक्टूबर को आयुक्त ग्राम्य विकास की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
समिति की संस्तुति के बाद मुख्यमंत्री द्वारा सिरसिया, इकौना व हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र के करीब सात न्याय पंचायतों में शामिल गांवों को शामिल कर लक्ष्मनपुर ब्लॉक बनाया गया था।
जिसका मुख्यालय लक्ष्मनपुर बाजार को बनाया गया था। उस समय तत्कालीन सीडीओ द्वारा प्रभारी खंड विकास अधिकारी सिरसिया को लक्ष्मनपुर के भी बीडीओ का प्रभार सौंपा गया था।
सत्ता परिवर्तन के बाद यह घोषणा ही रही। आज भी लोगों को ब्लाक स्तरीय कार्यों के लिए सिरसिया का ही चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिससे लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि अस्तित्व में आए लक्ष्मनपुर ब्लाक तो दूर हो क्षेत्र वासियों की दुश्वारियां। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी अवनीश राय बताते हैं कि 18 जनवरी को विशेष सचिव का एक पत्र जिले को प्राप्त हुआ है।