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जंगल में तना काट कर पेड़ सुखाने का माफियाओं ने निकाला नया फार्मूला
Updated Mon, 12 Jun 2017 05:31 AM IST
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तना छीलकर सुखा रहे बेशकीमती पेड़
- गिरने पर वन विभाग से नीलामी में औने-पौने दाम पर खरीदते माफिया
- वन माफिया और विभागीय कर्मचारियों की सांठगांठ से चल रहा खेल
रतनापुर (श्रावस्ती)। वन माफिया ने जंगल से बेशकीमती पेड़ हथियाने को नया फार्मूला निकाला है। इसके तहत माफिया जंगल के कीमती पेड़ों के तने छीलकर उन्हें कमजोर कर देते हैं। इससे पेड़ सूख जाता है। इसके बाद या तो चोरी से पेड़ काट ले जाते हैं या फिर तेज हवा से ये गिर जाते हैं। पेड़ गिरने के बाद विभागीय लोगों से सांठगांठ कर धारा सी वन के तहत नीलामी में इन्हीं को औनेपौने दामों पर खरीद लेते हैं। बड़े पैमाने पर हो रहे इस गोरखधंधे की जानकारी के बाद भी विभाग के उच्चाधिकारी चुप है।
जंगल में अवैध कटान पर रोक के बाद अब वन माफिया ने विभागीय नियमों के साथ लकड़ी हथियाने का नया रास्ता निकाल लिया है। ऐसा ही कुछ हरदत्त नगर गिरंट के जंगल में देखने को मिला। यहां वन माफियाओं ने साखू के पेड़ों के तने को कुल्हाड़ी से काट कर पतला कर दिया गया। जानकारों का कहना है कि वन माफिया इसके बाद इन पेड़ों के सूखने व गिरने का इंतजार करते हैं। पेड़ गिरने के बाद इसे विभाग व निगम से साठ गांठ कर औने पौने दामों में खरीद लेते हैं। यही लकड़ी बाहर जाकर खरीदे गए मूल्य की कई गुना महंगी हो जाती है। इस तरह जंगल में किसी एक पेड़ के तने पर नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में पेड़ों पर देखा जा सकता है। जहां केवल हल्की हवा से पेड़ गिर जाते हैं। जानकारों की माने तो कई पेड़ इस तरह से गिर कर बिक भी चुके हैं।
बाक्स में-
ऐसे होती पेड़ों की बिक्री
जंगल में तूफान व अन्य कारणों से गिरे पेड़ों को विभाग एकत्र करता है। इसका मूल्यांकन विभाग करके वन अधिनियम की धारा सी वन के अंतर्गत इसे बेचने को वन निगम को पत्र भेजता है। इस तरह की लकड़ियां वन विभाग के रेगुलर लाट के अंतर्गत नहीं आती। इसलिए इसकी निलामी के लिए निगम की ओर से व्यापक प्रचार प्रसार नहीं किया जाता। इससे वन माफिया विभाग की मिली भगत से इसे खरीद कर एक नंबर से बाहर भेजते हैं। जहां इसकी कीमत खरीद से लगभग दस गुना बढ़ जाती है।
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बाक्स में-
वन विभाग सी वन की लकड़ियों की नीलामी वन निगम से कराता है। पेड़ों को काट कर उसे सुखाने की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- जावेद अख्तर, डीएफओ
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- गिरने पर वन विभाग से नीलामी में औने-पौने दाम पर खरीदते माफिया
- वन माफिया और विभागीय कर्मचारियों की सांठगांठ से चल रहा खेल
रतनापुर (श्रावस्ती)। वन माफिया ने जंगल से बेशकीमती पेड़ हथियाने को नया फार्मूला निकाला है। इसके तहत माफिया जंगल के कीमती पेड़ों के तने छीलकर उन्हें कमजोर कर देते हैं। इससे पेड़ सूख जाता है। इसके बाद या तो चोरी से पेड़ काट ले जाते हैं या फिर तेज हवा से ये गिर जाते हैं। पेड़ गिरने के बाद विभागीय लोगों से सांठगांठ कर धारा सी वन के तहत नीलामी में इन्हीं को औनेपौने दामों पर खरीद लेते हैं। बड़े पैमाने पर हो रहे इस गोरखधंधे की जानकारी के बाद भी विभाग के उच्चाधिकारी चुप है।
जंगल में अवैध कटान पर रोक के बाद अब वन माफिया ने विभागीय नियमों के साथ लकड़ी हथियाने का नया रास्ता निकाल लिया है। ऐसा ही कुछ हरदत्त नगर गिरंट के जंगल में देखने को मिला। यहां वन माफियाओं ने साखू के पेड़ों के तने को कुल्हाड़ी से काट कर पतला कर दिया गया। जानकारों का कहना है कि वन माफिया इसके बाद इन पेड़ों के सूखने व गिरने का इंतजार करते हैं। पेड़ गिरने के बाद इसे विभाग व निगम से साठ गांठ कर औने पौने दामों में खरीद लेते हैं। यही लकड़ी बाहर जाकर खरीदे गए मूल्य की कई गुना महंगी हो जाती है। इस तरह जंगल में किसी एक पेड़ के तने पर नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में पेड़ों पर देखा जा सकता है। जहां केवल हल्की हवा से पेड़ गिर जाते हैं। जानकारों की माने तो कई पेड़ इस तरह से गिर कर बिक भी चुके हैं।
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ऐसे होती पेड़ों की बिक्री
जंगल में तूफान व अन्य कारणों से गिरे पेड़ों को विभाग एकत्र करता है। इसका मूल्यांकन विभाग करके वन अधिनियम की धारा सी वन के अंतर्गत इसे बेचने को वन निगम को पत्र भेजता है। इस तरह की लकड़ियां वन विभाग के रेगुलर लाट के अंतर्गत नहीं आती। इसलिए इसकी निलामी के लिए निगम की ओर से व्यापक प्रचार प्रसार नहीं किया जाता। इससे वन माफिया विभाग की मिली भगत से इसे खरीद कर एक नंबर से बाहर भेजते हैं। जहां इसकी कीमत खरीद से लगभग दस गुना बढ़ जाती है।
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वन विभाग सी वन की लकड़ियों की नीलामी वन निगम से कराता है। पेड़ों को काट कर उसे सुखाने की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- जावेद अख्तर, डीएफओ