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दहेज के लिए बहू के हत्यारे को दस वर्ष की जेल

Thu, 17 Feb 2022 10:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 10:44 PM IST
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10 years jail for daughter-in-law's killer for dowry
श्रावस्ती। पहले एक पिता ने नाबालिग बेटे की शादी कर दी। इसके बाद दहेज के लिए आई बहू की हत्या कर दी। इस मामले में 12 वर्ष बाद एफटीसी न्यायालय ने आरोपी ससुर को दस वर्ष कारावास के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं घटना के दौरान पति नाबालिग होने के कारण उसे बाल अपचारी घोषित कर दिया गया। जबकि सुनवाई के दौरान ही सास की मृत्यु हो गई थी।
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बाल विवाह के मामले में जिले का स्थान देश में सबसे ऊपर है। बाल विवाह में घर लाई गई बहू की दहेज के लिए हत्या की पुष्टि हुई है। इस मामले में आरोपी ससुर को न्यायालय ने दंडित किया है। जबकि इस कांड में पति नाबालिग होने के कारण उसे बाल अपचारी घोषित कर दिया गया। मामला सिरसिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मनपुर सेमरहनिया गांव का है। यहां नंद लाल दुबे ने अपनी लड़की सुनीता का विवाह गिलौला थाना क्षेत्र के गुटुहरू निवासी लल्लन उर्फ अनीश के साथ किया था। विवाह के समय लल्लन व सुनीता दोनों नाबालिग थे। इनका विवाह 2005 में हुआ था। इसी के बाद से सुनीता को दहेज के लिए उसके ससुरालीजन परेशान करते थे। जिसका एक परिवाद उस समय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की न्यायालय में विचाराधीन था।
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इसी दौरान 2010 में सुनीता को समझौते में गुटुहरू लाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। मृतका के पिता नंद लाल ने इस मामले में सुनीता के पति लल्लन उर्फ अनीश, उसके ससुर बेचू दयाल व सास राजरानी के खिलाफ दहेज के लिए हत्या का मामला दर्ज कराया था। इस मामले की सुनवाई अपर जिला जज एफटीसी अजय सिंह की कोर्ट पर चल रहा था। जिसका फैसला बुधवार शाम न्यायालय ने सुनाया। जिसमें बेचू दयाल को दस वर्ष कारावास के साथ 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न अदा करने पर दो वर्ष अतिरिक्त कारावास व लल्लन उर्फ अनीश को बाल अपचारी घोषित कर दिया गया। इस मामले में सास राजरानी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। यह ऐसा पहला मामला जिले में देखने को मिला जहां नाबालिग का पहले विवाह किया गया फिर दहेज के लिए उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज देव गुप्ता कर रहे थे।
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