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खून की जांच की मशीनों नहीं हुआ इस्तेमाल, वारंटी पीरियड खत्म
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कैराना सीएचसी पर लैब सहायक के बराबर में रखी सीबीसी मशीन।
- फोटो : SHAMLI
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-एक साल पहले सीएचसी में आई थी केएफटी व एलएफटी की मशीन
- एक साल में एक भी मरीज की नहीं हुई जांच
- दो साल पहले आई सीबीसी जांच की मशीन के रिजल्ट भी सही नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। सीएचसी पर दो साल पहले आई सीबीसी जांच की मशीन का रिजल्ट सही नहीं आने के कारण मरीज प्राइवेट लैब पर जांच कराने पर मजबूर है। वहीं एक साल पहले लाखों की कीमत की केएफटी व एलएफटी की मशीन सीएचसी पर आई थी, लेकिन एक साल में मशीन से एक भी मरीज के खून की जांच नहीं की जा सकी और इस दौरान मशीन का वारंटी पीरियड भी खत्म हो गया।
कैराना सीएचसी पर करीब दो साल पहले सीएचसी पर सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) की मशीन आई थी। सीबीसी मशीन से मरीज के ब्लड में इंफेक्शन, टीबी, हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स आदि के स्तर की जांच करने के बाद डॉक्टर उपचार करते हैं। लेकिन सीबीसी मशीन में ग्राफ तक सही नहीं आता। ग्राफ सही भी आ गया तो ग्राफ को काउंट करके सही परिणाम तक नहीं बताया जाता। जिस कारण मरीज प्राइवेट लैब पर जाकर जांच कराते है।
इसके अलावा एक साल पहले लाखों की कीमत की केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट) व एलएफटी (लीवर फंक्शन टेस्ट) की मशीन आई थी। इन मशीनों से मरीज के लीवर व किडनी की आधुनिक जांच की जाती है। लेकिन एक साल बीतने पर भी एक भी मरीज के खून के सैंपल में जिस केमिकल को मिलाकर जांच की जाती है, वह आज तक सीएचसी पर नहीं आया। जिसके चलते मशीन शोपीस बन कर रह गई है। अब मशीन का वारंटी पीरियड भी पूरा हो गया है। केएफटी और एलएफटी दोनों की जांच प्राइवेट लैब पर करीब 700 रुपये में होती है। मशीन के नहीं चलने के कारण गरीब मरीज को अपनी किडनी व लीवर की जांच कराने के लिए महंगी लैब का खर्च उठाना पड़ता है।
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कस्बे के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने खर्चा करके जांच मशीन भेजी है तो उसे चालू भी कराना चाहिए। जिससे गरीबों को फायदा मिल सके। सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र चौरसिया ने बताया कि केएफटी मशीन के केमिकल के लिए वह दो बार पत्र लिख चुके हैं। अभी तक केमिकल नहीं आने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। सीबीसी की मशीन पर भी ग्राफ कई बार सही नहीं आता। वह सीएमओ को पत्र लिखेंगे।
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- एक साल में एक भी मरीज की नहीं हुई जांच
- दो साल पहले आई सीबीसी जांच की मशीन के रिजल्ट भी सही नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। सीएचसी पर दो साल पहले आई सीबीसी जांच की मशीन का रिजल्ट सही नहीं आने के कारण मरीज प्राइवेट लैब पर जांच कराने पर मजबूर है। वहीं एक साल पहले लाखों की कीमत की केएफटी व एलएफटी की मशीन सीएचसी पर आई थी, लेकिन एक साल में मशीन से एक भी मरीज के खून की जांच नहीं की जा सकी और इस दौरान मशीन का वारंटी पीरियड भी खत्म हो गया।
कैराना सीएचसी पर करीब दो साल पहले सीएचसी पर सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) की मशीन आई थी। सीबीसी मशीन से मरीज के ब्लड में इंफेक्शन, टीबी, हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स आदि के स्तर की जांच करने के बाद डॉक्टर उपचार करते हैं। लेकिन सीबीसी मशीन में ग्राफ तक सही नहीं आता। ग्राफ सही भी आ गया तो ग्राफ को काउंट करके सही परिणाम तक नहीं बताया जाता। जिस कारण मरीज प्राइवेट लैब पर जाकर जांच कराते है।
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इसके अलावा एक साल पहले लाखों की कीमत की केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट) व एलएफटी (लीवर फंक्शन टेस्ट) की मशीन आई थी। इन मशीनों से मरीज के लीवर व किडनी की आधुनिक जांच की जाती है। लेकिन एक साल बीतने पर भी एक भी मरीज के खून के सैंपल में जिस केमिकल को मिलाकर जांच की जाती है, वह आज तक सीएचसी पर नहीं आया। जिसके चलते मशीन शोपीस बन कर रह गई है। अब मशीन का वारंटी पीरियड भी पूरा हो गया है। केएफटी और एलएफटी दोनों की जांच प्राइवेट लैब पर करीब 700 रुपये में होती है। मशीन के नहीं चलने के कारण गरीब मरीज को अपनी किडनी व लीवर की जांच कराने के लिए महंगी लैब का खर्च उठाना पड़ता है।
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कस्बे के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने खर्चा करके जांच मशीन भेजी है तो उसे चालू भी कराना चाहिए। जिससे गरीबों को फायदा मिल सके। सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र चौरसिया ने बताया कि केएफटी मशीन के केमिकल के लिए वह दो बार पत्र लिख चुके हैं। अभी तक केमिकल नहीं आने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। सीबीसी की मशीन पर भी ग्राफ कई बार सही नहीं आता। वह सीएमओ को पत्र लिखेंगे।