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गेहूं में लगने वाले रोगों की जानकारी दी
ब्यूराो /अमर उजाला, शामली
Updated Thu, 26 Jan 2017 12:13 AM IST
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शामली। कृषि रक्षा इकाई परिसर पर उप कृषि निदेशक की अध्यक्षता में गेहूं फसल रोगों को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें कृषि विभाग के अधिकारियों ने गेहूं में लगने वाले रोगों के बारे में जानकारी दी।
बुधवार को माजरा रोड स्थित कृषि रक्षा इकाई परिसर में फसलों के रोगों को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम उपकृषि निदेशक आनंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें किसानों ने काफी संख्या में भाग लिया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने गेहूं में करनाल बंट में बाली में दाने, आंशिक रुप से काले चूर्ण में बदल जाना। यह रोग संक्रमित बीज व भूमि द्वारा फैलता है, पीली गेरुई रोग व पत्तियों पर पिन की नोक के आकार के धब्बे बन जाते हैं।
पत्तियां सूखना, दाना हल्का व पतला होना व हवाओं द्वारा फैलने वाले रोगों की जानकारी देते हुए उनकी रोकथाम व उपाय बताए। 15 से 20 दिन के अंतराल पर निगरानी करते रहना चाहिए। वहीं, प्रोपीकोनेजोल 25 प्रतिशत ईसी की मात्रा 500 एमएल हेक्टेयर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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जिनेव जेड-78 मात्रा 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। वहीं किसानों ने फसलों के आदि रोगों की भी प्रश्न पूछकर जानकारी की। इस दौरान समस्त कृषि अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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बुधवार को माजरा रोड स्थित कृषि रक्षा इकाई परिसर में फसलों के रोगों को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम उपकृषि निदेशक आनंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें किसानों ने काफी संख्या में भाग लिया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने गेहूं में करनाल बंट में बाली में दाने, आंशिक रुप से काले चूर्ण में बदल जाना। यह रोग संक्रमित बीज व भूमि द्वारा फैलता है, पीली गेरुई रोग व पत्तियों पर पिन की नोक के आकार के धब्बे बन जाते हैं।
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पत्तियां सूखना, दाना हल्का व पतला होना व हवाओं द्वारा फैलने वाले रोगों की जानकारी देते हुए उनकी रोकथाम व उपाय बताए। 15 से 20 दिन के अंतराल पर निगरानी करते रहना चाहिए। वहीं, प्रोपीकोनेजोल 25 प्रतिशत ईसी की मात्रा 500 एमएल हेक्टेयर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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जिनेव जेड-78 मात्रा 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। वहीं किसानों ने फसलों के आदि रोगों की भी प्रश्न पूछकर जानकारी की। इस दौरान समस्त कृषि अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।