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हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं
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हिंसा समस्या का समाधान नहीं
शामली। ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर सामान्य किसान भी चिंतित नजर आए। किसानों का कहना है कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाना बेहद निंदनीय है। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए और जो भी दोषी हों उनके खिलाफ कार्रवाई हो।
थानाभवन निवासी रामकुमार सिंह का कहना है कि उन्हें कृषि कानूनों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन किसानों को रैली निकालनी थी, तो उन्हें सही समय पर शांति प्रिय रैली निकालनी थी, न कि उपद्रव करना था। लाल किले पर धार्मिक झंडा लहराना अपराध है। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
थानाभवन निवासी नाथीराम कहते हैं कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में जो कुछ भी हुआ वह शर्मसार करने वाला है। किसानों को अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन कायदे में। जिन लोगों ने देश को प्रदर्शन के नाम पर बदनाम करने की कोशिश की, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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कैराना के गांव मन्ना माजरा निवासी किसान जिंदा हसन ने बताया कि गणतंत्र दिवस पर जब पूरी दुनिया की निगाह हमारे देश पर थी, उस समय दिल्ली में हिंसा बहुत गलत हुई। कृषि कानून के बारे में वह कुछ नहीं जानते, लेकिन जिसने लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाया, वह चाहे जो भी हो, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। झंडा लगाने वाले व्यक्ति के भाजपा से जुड़े होने की भी चर्चा हो रही है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
बाबरी निवासी किसान ओमप्रकाश सैनी का कहना है कि 26 जनवरी को किसानों द्वारा किया गया आंदोलन गलत था। सरकार से वार्ता कर हल निकालने का प्रयास जारी रखना चाहिए था। आज तक किसानों का इस तरह आंदोलन नहीं देखा गया। हिंसा को किसी भी स्तर पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
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शामली। ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर सामान्य किसान भी चिंतित नजर आए। किसानों का कहना है कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाना बेहद निंदनीय है। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए और जो भी दोषी हों उनके खिलाफ कार्रवाई हो।
थानाभवन निवासी रामकुमार सिंह का कहना है कि उन्हें कृषि कानूनों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन किसानों को रैली निकालनी थी, तो उन्हें सही समय पर शांति प्रिय रैली निकालनी थी, न कि उपद्रव करना था। लाल किले पर धार्मिक झंडा लहराना अपराध है। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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थानाभवन निवासी नाथीराम कहते हैं कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में जो कुछ भी हुआ वह शर्मसार करने वाला है। किसानों को अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन कायदे में। जिन लोगों ने देश को प्रदर्शन के नाम पर बदनाम करने की कोशिश की, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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कैराना के गांव मन्ना माजरा निवासी किसान जिंदा हसन ने बताया कि गणतंत्र दिवस पर जब पूरी दुनिया की निगाह हमारे देश पर थी, उस समय दिल्ली में हिंसा बहुत गलत हुई। कृषि कानून के बारे में वह कुछ नहीं जानते, लेकिन जिसने लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाया, वह चाहे जो भी हो, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। झंडा लगाने वाले व्यक्ति के भाजपा से जुड़े होने की भी चर्चा हो रही है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
बाबरी निवासी किसान ओमप्रकाश सैनी का कहना है कि 26 जनवरी को किसानों द्वारा किया गया आंदोलन गलत था। सरकार से वार्ता कर हल निकालने का प्रयास जारी रखना चाहिए था। आज तक किसानों का इस तरह आंदोलन नहीं देखा गया। हिंसा को किसी भी स्तर पर सही नहीं ठहराया जा सकता।