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नहीं बिक रहीं सब्जियां, गोशाला में भेजने को मजबूर

Sun, 07 Jun 2020 11:23 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2020 11:23 PM IST
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Vegetables not being sold, forced to send to the cowshed
शामली सब्जीमंडी में ना बिकने पर आढ़ती के यहां रखे किसान के तरबूज। - फोटो : SHAMLI
रोहित अग्रवाल
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शामली। अनलॉक -1 में बाजार खुल गए हैं। सब्जी मंडी खुलने का समय भी प्रशासन ने तय कर दिया है। कोरोना संक्रमण से पहले जो मंडी सुबह 10 से 11 बजे तक चलती थी। अब वो सुबह पांच से सात यानी दो घंटे चल रही है। समय की यही कमी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। हालत ये है कि दो घंटे में किसान का पूरा माल नहीं बिक पा रहा। पांच रुपये किलो मिर्च और दो रुपये किलो लौकी बेचने को मजबूर है। इतने में भी माल बच रहा है और अगले दिन उसे गोशाला में पशुओं के लिए दान कर दिया जा रहा है। कर्ज लेकर फसल बोने वाला किसान को मुनाफा तो दूर लागत भी पूरी होती नजर नहीं आ रही। किसान और आढ़ती सभी वक्त बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं। सब्जी मंडी में आढ़त पर जाकर हाल जाना। पेश है रिपोर्ट...
मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं मिली
बनत कस्बे का मनीष सैनी आज अपनी मिर्च और भिंडी लेकर मंडी में बेचने आया था। बताया कि दोनों चीजें केवल पांच रुपये किलो बिकी है। जबकि इससे ज्यादा उसकी लागत आती है। पांच रुपये किलो से ज्यादा का तो खर्चा तो खेत में तुड़ाई, भराई, लदाई और मंडी तक लाने में लग जाता है। बीज, खाद की लागत और उनकी मेहनत अलग से है। पिछले साल भी उसने 22 रुपये किलो मिर्च बेची थी। बताया कि फसल बोने से पहले आढ़ती से 10 हजार रुपये उधार लिए थे, सोचा था फसल तैयार होने पर सब्जी बेचकर कर्ज चुकता हो जाएगा ।कुछ बचत हो जाएगी लेकिन यहां हालात तो ये हो गए कि बचत तो दूर उधार ली गई लागत की भरपाई भी नहीं होगी। उसकी मेहनत गई अलग से। अब धान बोने को भी रुपये नहीं है। उधार मिलना भी मुश्किल हो रहा है।
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नहीं बिकी लौकी, गोशाला भेज दी
बनत से अपनी लौकी बेचने आए किसान बिजेंद्र कश्यप ने बताया कि आज उनकी लौकी का कोई लिवाल ही नहीं मिला। बड़ी मुश्किल से कुछ लौकी शुरू में तीन रुपये किलो बिकी। जब मंडी बंद होने का वक्त आ गया तो दो रुपये किलो ही निकालनी पड़ी। कल भी वह लोकी बेचने आए थे आधे से ज्यादा लौकी नहीं बिकी। आढ़ती के यहां ही रखवानी पड़ी, आज भी लिवाली नहीं रही। कल तक वो खराब हो जाएगी। बिकने लायक नहीं रहेगी। इसलिए उसने गौशाला में ही भिजवा दी है।
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फेंकने से तो अच्छा पशुओं के काम आ जाएगी
शामली का किसान विनोद रेहडे़ में भरकर करीब पांच क्विंटल लौकी आढ़त पर बेचने लाया बनत का किसान विनोद परेशान खड़ा था। बताया कुछ माल दो रुपये किलो बिका, लेकिन आधे से ज्यादा लौकी बची रह गई। किसान ने बताया कि कल भी उसकी काफी लौकी बची रह गई जिसे उसने आढ़त पर रखवा दिया था, लेकिन अब वो भी बेचने लायक नहीं रही। अब उसे फेंकने से तो अच्छा बची हुई लौकी को गोशाला में गायों के लिए भिजवा दी हैं। यदि सब्जी बेचने का वक्त अधिक मिले तो भाव भी ठीक मिले पिछले साल उसकी लौकी आठ रुपये किलो तक बिक्री थी। ऐसा ही चलता रहा तो वह तो कर्जदार हो जाएंगे।
समय के साथ घटते हैं दाम
मंडी केवल दो घंटे चलती है। शुरू में तो कुछ रिटेलर किसान का अच्छा माल छांटकर ले लेते हैं, कीमत भी ठीक मिल जाती हे, लेकिन साढ़े छह बजने के बाद रिटेल दुकानदार की मनमर्जी चलने लगती है। उसे पता है कि सात बजते ही मंडी बंद हो जाएगी और किसान माल बचाकर ले नहीं जाएगा इसलिए वह अपने मन मुताबिक घटाकर भाव बोलते हैं और किसान मजबूर हो जाता है।

साढ़े छह बजते ही शुरू हो जाती है टेंशन
सब्जी मंडी के आढ़ती विकास सैनी ने बताया कि मंडी में सब्जी की आपूर्ति पहले की तरह ही आ रही है। कोराना की शुरूआत से पहले सब्जी मंडी सुबह 10 से 11 बजे तक लगती थी। रिटेल दुकानदार के अलावा ग्राहक भी मंडी से सब्जी ले सकते थे। इसलिए माल को बेचने का पांच घंटे का पूरा समय मिलता था। किसान को माल बेचने की जल्दी नहीं होती थी। यदि कोई भाव कम लगाता तो दूसरे ग्राहक के इंतजार का समय होता था, लेकिन अब दो घंटे मिलते हैं। साढे़ छह बजते ही किसान को घबराहट शुरू हो जाती है कि कहीं सात बजे तक उसका बिकेगा या नहीं। ऐसे में ना चाहते हुए थे वह मंदे भाव में फसल बेचने को मजबूर हो जाता है, क्योंकि उसे लगता है कि यदि माल बच गया तो वापस ले जाने का भाड़ा भी जेब से देना होगा। आढ़त पर रखा तो खराब होने का डर रहता है। समय की कमी के कारण कई किसानों का माल नहीं निकल रहा और यहीं रखकर जाते हैं अगले दिन मजबूरन गोशाला में दान करते हैं। उन्हें भी चिंता है कि किसान को बोते समय बीज, दवा के लिए एडवांस दी गई रकम वापस मिलेगी भी या नहीं।

शामली सब्जी मंडी में किसान की लोकी नहीं बिकी तो गोशाला भेजने के लिए रेहडे में भरी गई ।

शामली सब्जी मंडी में किसान की लोकी नहीं बिकी तो गोशाला भेजने के लिए रेहडे में भरी गई ।- फोटो : SHAMLI

शामली नवीन मंडी स्थित सब्जीमंडी में रक्खी लोकी की सब्जी

शामली नवीन मंडी स्थित सब्जीमंडी में रक्खी लोकी की सब्जी- फोटो : SHAMLI

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