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तुलसी माता और शालिग्राम का विवाह कराया
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तुलसी माता व भगवान शालिग्राम का विवाह कराया
शामली, कांधला। नगर में मोहल्ला रायजादगान स्थित मंदिर माता श्री शाकुंभरी देवी भवन में देव उठावनी एकादशी के पर्व पर तुलसी विवाह भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सोमवार को नगर के मंदिर माता श्री शाकुंभरी देवी भवन में देवउठावनी एकादशी के पर्व पर तुलसी विवाह का आयोजन किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष पांडेय ने जानकारी देते बताया कि कार्तिक शुक्ल देवउठावनी एकादशी पर भक्ति, ध्यान, जप, तप और शुभ कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। प्रात: 4 बजे उठकर मंदिर में कार्तिक स्नान कर महिलाएं महत्तम पाठ व पूजा-अर्चना करती है। कीर्तन भजन के साथ माता तुलसी व भगवान शालिग्राम के सनातन संस्कृति के अनुसार शादी के फेरे करा कर भगवान श्री हरि नारायण की आरती की गई। भगवान श्री हरि नारायण की आरती के पश्चात मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के पूर्ण होने पर प्रसाद का वितरण किया गया। अध्यक्ष भृगुवंशी आशुतोष पांडेय ने जानकारी देते बताया हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल देव उठावनी एकादशी तक चलती है। हिन्दू धर्म में ये 4 महीने भक्ति, ध्यान, जप, तप और शुभ कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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शामली, कांधला। नगर में मोहल्ला रायजादगान स्थित मंदिर माता श्री शाकुंभरी देवी भवन में देव उठावनी एकादशी के पर्व पर तुलसी विवाह भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सोमवार को नगर के मंदिर माता श्री शाकुंभरी देवी भवन में देवउठावनी एकादशी के पर्व पर तुलसी विवाह का आयोजन किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष पांडेय ने जानकारी देते बताया कि कार्तिक शुक्ल देवउठावनी एकादशी पर भक्ति, ध्यान, जप, तप और शुभ कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। प्रात: 4 बजे उठकर मंदिर में कार्तिक स्नान कर महिलाएं महत्तम पाठ व पूजा-अर्चना करती है। कीर्तन भजन के साथ माता तुलसी व भगवान शालिग्राम के सनातन संस्कृति के अनुसार शादी के फेरे करा कर भगवान श्री हरि नारायण की आरती की गई। भगवान श्री हरि नारायण की आरती के पश्चात मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के पूर्ण होने पर प्रसाद का वितरण किया गया। अध्यक्ष भृगुवंशी आशुतोष पांडेय ने जानकारी देते बताया हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल देव उठावनी एकादशी तक चलती है। हिन्दू धर्म में ये 4 महीने भक्ति, ध्यान, जप, तप और शुभ कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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