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Shamli News: प्रधानों की तीन योजना बीतीं, ठीक नहीं हुई स्कूल की चहारदीवारी

Fri, 11 Jul 2025 12:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jul 2025 12:10 AM IST
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Three plans of the principals passed, the boundary wall of the school was not repaired
शामली के गांव बलवा प्राथमिक विद्यालय की टूटी दीवार के पास खड़े बच्चे । संवाद
पड़ताल:
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- चहारदीवारी न होने से आवारा पशु व असामाजिक तत्व स्कूल परिसर व पेड़ों को पहुंचा रहे नुकसान

संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जनपद के काफी स्कूलों में चहारदीवारी का बुरा हाल है। हर माह सूचना देने के बाद भी विभाग और ग्राम पंचायत प्रधानों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। वहीं बच्चों और शिक्षकों को हर समय आवारा पशुओं से बच्चों की जान व स्कूल परिसर में लगे पेड़-पौधों के नुकसान का खतरा बना रहता है। झाल स्कूल के कंपोजिट विद्यालय में तो 20 साल से टूटी पड़ी चहारदीवारी तक ठीक नहीं हो पाई।

बुधवार को परिषदीय स्कूलों में टूटी चहारदीवारी को लेकर पड़ताल की गई तो स्थिति खराब मिली। कंपोजिट विद्यालय झाल में चहारदीवारी 20 साल से खस्ताहालत में पड़ी है, ग्राम प्रधानों की तीन योजना पूरी होकर चौथी योजना का भी कार्यकाल समाप्त होने के नजदीक है, लेकिन आज भी चारों ओर से चहारदीवारी जगह-जगह से टूटी है। इस कारण आवारा पशु परिसर में गंदगी फैलाते हैं और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं विद्यालय को असामाजिक तत्वों से भी नुकसान हो रहा है।
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प्रधानाध्यापक अजय कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा हर माह चहारदीवारी की सूचना मांगी जाती है। स्कूल में चहारदीवारी लगभग वर्ष 2007 में की गई थी। इसके कुछ समय बाद चार से पांच स्थानों से दीवार टूटी पड़ी है। विभाग को हर माह सूचना देने के बाद भी ठीक नहीं हुई है, जबकि तीन प्रधानों का कार्यकाल बीत चुका है। ग्राम प्रधानों को भी हर योजना में अवगत कराया जा चुका है। वहीं गांव बलवा स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर तीन की चहारदीवारी टूटी पड़ी है। प्रधानाध्यापक का कहना है कि कई बार शिकायत की जा चुकी है। चहारदीवारी टूटी होने से बच्चों की जान को आवारा पशुओं से खतरा है।
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- देहात के स्कूलों का भी बुरा हाल
ऊन। ऊन ब्लॉक के गांव रेडा माजरा स्थित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय की दो दीवारें वर्ष 2020 से टूटी पड़ी हैं। शिक्षक शिवकुमार ने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन आज तक नहीं बन पाई है। दीवार टूटी होने से स्कूल परिसर में आवारा पशु घुस जाते हैं।
बाबरी : उच्च प्राथमिक विद्यालय हिरणवाड़ा में आज तक भी चहारदीवारी नहीं है, दीवार न होने के कारण स्कूल परिसर में ही गांव के लोगों ने उपले बनाकर बिटौड़े बनाकर अवैध कब्जा कर रखा है। इसकी शिकायत कई बार ग्रामीण पवन कुमार द्वारा भी ऑनलाइन की जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।

झिंझाना : कस्बे के काशीराम आवासीय कॉलोनी के निकट स्थित उच्च प्राथमिक स्कूल में वर्ष 2014 से दो दीवारों का निर्माण आज तक भी नहीं कराया गया। प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने बताया कि दीवार न होने के कारण स्कूल में आवारा पशु घुस जाते है, जिससे बच्चों की जान को खतरा है। हर माह इस बारे में पोर्टल भी इसकी सूचना दर्ज कराई जाती है।

- इन्होंने कहा

चहारदीवारी की सूचना विभाग द्वारा हर माह पोर्टल पर मांगी जाती है। ऐसे कार्यों की जिम्मेदारी अब प्रोजेक्ट अलंकार के तहत ग्राम प्रधानों को दी गई है। जिन स्कूलों में ऐसी समस्या है, जल्द ही चहारदीवारी ठीक कराई जाएगी।-नरेंद्र सिंह, प्रभारी बीएसए।

शामली के गांव बलवा  प्राथमिक विद्यालय की टूटी दीवार के पास खड़े बच्चे । संवाद

शामली के गांव बलवा प्राथमिक विद्यालय की टूटी दीवार के पास खड़े बच्चे । संवाद

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