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Shamli News: इस साल शामली में पचास फीसदी से कम बारिश, बन रहे सूखे के हालात

Fri, 06 Sep 2024 01:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Fri, 06 Sep 2024 01:24 AM IST
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This year there is less than fifty percent rainfall in Shamli, drought conditions are being created
शामली। इस साल पचास प्रतिशत से कम बारिश होने से जिले में सूखे के हालात के बन रहे हैं। कम बारिश से गन्ना- धान और अन्य फसलों का उत्पादन प्रभावित होने के आसार हैं।
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जिले में 700 से लेकर 800 एमएम बारिश सामान्य बारिश का आंकलन होता है। 800 एमएम से अधिक बारिश को सामान्य से अधिक माना जाता है। इस साल शामली जिले में मात्र 392 एमएम बारिश गत 31 अगस्त 2024 तक आंकी गई है। बरसात का मौसम जून से लेकर 15 सितंबर का माना जाता है। 15 सितंबर के बाद मौसम साफ हो जाता है।
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इस साल 392 एमएम बारिश होने पर किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए बिजली के नलकूप और नहरों से सिचाई करनी पड़ेगी, जिससे फसल की लागत बढ़ जाती है। हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ- बागपत, बिजनौर, सहारनपुर गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड, गौतमबुद्धनगर सिंचित क्षेत्र में आता है। यहां कम बारिश से भू जल स्तर प्रभावित होता है।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक प्रमोद कुमार ने बताया कि कम बारिश होने से गन्ना धान, मक्का, सब्जियों का उत्पादन प्रभावित होेने की संभावना है। कम बारिश होने से नलकूप की सिंचाई प्रभावशाली नहीं मानी गई है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र जलालपुर के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. ओमकुमार सिंह का कहना है कि गन्ना और धान के लिए कम बारिश उत्पादन को प्रभावित करता है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डाॅ. विकास मलिक के मुताबिक औसत बारिश 700-800 एमएम मानी गई है। 800 एमएम से अधिक बारिश सामान्य से अधिक माना गया है। बारिश कम होने से गन्ना, धान की बढ़वार रुक जाती है। गन्ना- धान,लोकी, तुरई, टमाटर आदि सब्जियों का उत्पादन प्रभावित होता है।
सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के निदेशक प्रसार डाॅ. पीके सिंह का कहना है कि बारिश कम होने से भूगर्भ का जलस्तर घट जाता है। शामली जिले के सभी ब्लाक डार्क जोन में है। संवाद

प्रशासन ने भी स्वीकारा
शामली। एडीएम वित्त एवं राजस्व संतोष कुमार सिंह का कहना है कि पिछले सालों की अपेक्षा इस साल सामान्य से पचास फीसदी कम बारिश हुई है। शासन के निर्देश पर संज्ञान लिया जाएगा।

बारिश से कम निकली 1509 धान का उत्पादन------

शामली। भैंसवाल के प्रगतिशील किसान उमेश कुमार का कहना है कि इस साल कम बारिश होने से 70 प्रतिशत किसानों को पिछले सालों से धान का उत्पादन कम हुआ है। चार क्विंटल प्रति बीघा धान का औसत माना जाता है। किंतु ज्यादातर किसानों के औसत से कम धान की पैदावार हुई है। किसान नामित पंवार का कहना है कि पिछले साल धान की औसत पैदावार बीस क्विंटल प्रति एकड़ थी। एक क्विंटल धान का भाव 3300 रुपये से लेकर 3600 रुपये था। इस साल धान की पैदावार दस से लेकर बारह प्रतिशत प्रति एकड़ है। धान का भाव 1900 रुपये लेकर 2200 रुपये प्रति एकड़ है।


बारिश का सालाना आंकड़ा



साल बारिश
2019 900 एमएम



2020 1005 एमएम

2021 921 एमएम



2022 940 एमएम

2023 1106 एमएम



2024 392 एमएम

बारिश का आंकड़ा पूर्वी यमुना खंड शामली के उपराजस्व विभाग से लिया गया है।
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