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ये रंग बासंती नहीं मिटेगा, धरती के रुख़सार से
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शामली। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आओ गुनगुना लें गीत व्हाट्स एप समूह द्वारा ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि आकाशवाणी दिल्ली के कवि रामावतार बैरवा ने राष्ट्र को समर्पित रचनाएं सुनाते कहा कि बादल जितनी साजिश कर ले, सात समंदर पार से, ये रंग बासंती नहीं मिटेगा, धरती के रुख़सार से।
मेरठ की कवियत्री सुषमा सवेरा ने शास्त्रीय संगीत में सरस्वती वंदना प्रस्तुत करके ऑनलाइन कवि सम्मेलन की शुरुआत की। हरिद्वार के प्रसिद्ध कवि बृजेंद्र हर्ष ने देशभक्ति से ओत-प्रोत काव्य पाठ किया-ऐ हम वतन, हमराज सुनो मेरे हम सफर। लग जाए देश को ना कोई भी नजर। दिल्ली के राष्ट्रीय गीतकार डाक्टर जयसिंह आर्य ने सांप्रदायिक सौहार्द और एकता पर कविता पाठ करते हुए कहा कि बाद में ह़िंदू, सिक्ख या मुसलमान है, सबसे पहले तो इंसान हैं, इंसान है। केसर शर्मा कमल ने कविताओं में बलिदानियों की तस्वीर खींची-सिर पर लटकी थीं तलवारें, तन पड़ती कोड़ों की मारें, हंस झूले फांसी के फंदे, झुकवा दी गोरी सरकारें। मनोज मिश्र कप्तान कहा - चूमकर माटी वतन की खेल जाए जान पर, फिर कहां से आंच आए भारती की शान पर। भारत भूषण वर्मा ने कहा कि बडे़ जोशीले वीर थे जो देश के लिए लड़े, स्वराज्य की बलिवेदी पर आहुति बन चढ़े । संचालक प्रीतमसिंह प्रीतम ने सुनाया- भारती का मान स्वाभिमान तिरंगा, आन मेरी, शान मेरी, जान तिरंगा। सुषमा सवेरा ने शौर्य गीत सुनाया- दुश्मन का शीश झुकाकर मां ! मैं तेरा मान बढ़ाऊंगा, तू गर्व करेगी मुझ पर मां! मैं जंग जीतकर आऊंगा। ग्वालियर से अतुल त्रिपाठी, मेरठ से चंद्रशेखर मयूर व रचनासिंह वानिया, पानीपत से नरेश लाभ, दिल्ली से श्रीकृष्ण निर्मल, इंदौर से संतोष त्रिपाठी, सीतामढ़ी से अनुराग कश्यप, शामली से अनिल धीमान पोपट कामचोर, राजस्थान से आर जे योगी, नोएडा से डा कल्पना पांडेय और गुरुग्राम से मोनिका शर्मा ने भी कविताएं पढ़ी।
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मेरठ की कवियत्री सुषमा सवेरा ने शास्त्रीय संगीत में सरस्वती वंदना प्रस्तुत करके ऑनलाइन कवि सम्मेलन की शुरुआत की। हरिद्वार के प्रसिद्ध कवि बृजेंद्र हर्ष ने देशभक्ति से ओत-प्रोत काव्य पाठ किया-ऐ हम वतन, हमराज सुनो मेरे हम सफर। लग जाए देश को ना कोई भी नजर। दिल्ली के राष्ट्रीय गीतकार डाक्टर जयसिंह आर्य ने सांप्रदायिक सौहार्द और एकता पर कविता पाठ करते हुए कहा कि बाद में ह़िंदू, सिक्ख या मुसलमान है, सबसे पहले तो इंसान हैं, इंसान है। केसर शर्मा कमल ने कविताओं में बलिदानियों की तस्वीर खींची-सिर पर लटकी थीं तलवारें, तन पड़ती कोड़ों की मारें, हंस झूले फांसी के फंदे, झुकवा दी गोरी सरकारें। मनोज मिश्र कप्तान कहा - चूमकर माटी वतन की खेल जाए जान पर, फिर कहां से आंच आए भारती की शान पर। भारत भूषण वर्मा ने कहा कि बडे़ जोशीले वीर थे जो देश के लिए लड़े, स्वराज्य की बलिवेदी पर आहुति बन चढ़े । संचालक प्रीतमसिंह प्रीतम ने सुनाया- भारती का मान स्वाभिमान तिरंगा, आन मेरी, शान मेरी, जान तिरंगा। सुषमा सवेरा ने शौर्य गीत सुनाया- दुश्मन का शीश झुकाकर मां ! मैं तेरा मान बढ़ाऊंगा, तू गर्व करेगी मुझ पर मां! मैं जंग जीतकर आऊंगा। ग्वालियर से अतुल त्रिपाठी, मेरठ से चंद्रशेखर मयूर व रचनासिंह वानिया, पानीपत से नरेश लाभ, दिल्ली से श्रीकृष्ण निर्मल, इंदौर से संतोष त्रिपाठी, सीतामढ़ी से अनुराग कश्यप, शामली से अनिल धीमान पोपट कामचोर, राजस्थान से आर जे योगी, नोएडा से डा कल्पना पांडेय और गुरुग्राम से मोनिका शर्मा ने भी कविताएं पढ़ी।
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