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Shamli News: आठ महीने से मनोचिकित्सक नहीं, मरीज हो रहे परेशान
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जिला अस्पताल में दवा लेने के लिए मरीजों की लगी भीड़। संवाद
शामली। जिला अस्पताल में आठ महीने से मनोचिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। इसके चलते मानसिक रोगियों को उपचार नहीं मिल रहा है। मानसिक विकार वाले मरीजों को मेरठ, सहारनपुर या मुजफ्फरनगर रेफर किया जा रहा है। इससे मरीज परेशान हैं।
जिला अस्पताल में संविदा पर मनोचिकित्सक डॉ. उर्वशी नियुक्त थी। उनकी नियुक्ति के समय ओपीडी में एक दिन में 80 के आसपास मरीज पहुंच रहे थे, लेकिन आठ माह पहले मनोचिकित्सक ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से यह पद रिक्त चल रहा है। मनोचिकित्सक न होने से मनकक्ष में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या भी घटकर 20 के आसपास रह गई हैं।
गंभीर रोगियों को काउंसिलिंग के साथ दवा की जरूरत
मनकक्ष में नियुक्त क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट प्रेरणा पुंडीर का कहना है कि मानसिक रोग के पहले चरण वाले मरीज काउंसिलिंग के बाद ठीक हो जाते हैं, लेकिन पुराने व गंभीर रोगियों को काउंसिलिंग के साथ दवा की जरूरत होती है। जिन मरीजों को दवा की जरूरत होती हैं, उन्हें रेफर करना पड़ता है।
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इस तरह से आ रहे केस
40 वर्षीय महिला की पहले काउंसिलिंग की गई, लेकिन आराम नहीं मिला। उनकी केस हिस्ट्री देखी तो पता चला कि उसे मानसिक रोग की पुरानी समस्या थी। महिला की काउंसिलिंग यहां पर और दवा मेरठ मेडिकल से चल रही है। 30 वर्षीय युवक प्रदीप ने बताया कि उसे सिर में दर्द रहता है। वह जिला अस्पताल में इलाज के लिए आया था, लेकिन यहां आकर पता चला कि मनोचिकित्सक नहीं है। उसे अब बिना इलाज के वापस जाना पड़ रहा है।
कोट
मनोचिकित्सक का पद करीब आठ माह से रिक्त चल रहा है। शासन को रिक्त पदों पर चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए पत्राचार किया गया है।
- डॉ. किशोर कुमार आहूजा, सीएमएस जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल में संविदा पर मनोचिकित्सक डॉ. उर्वशी नियुक्त थी। उनकी नियुक्ति के समय ओपीडी में एक दिन में 80 के आसपास मरीज पहुंच रहे थे, लेकिन आठ माह पहले मनोचिकित्सक ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से यह पद रिक्त चल रहा है। मनोचिकित्सक न होने से मनकक्ष में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या भी घटकर 20 के आसपास रह गई हैं।
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गंभीर रोगियों को काउंसिलिंग के साथ दवा की जरूरत
मनकक्ष में नियुक्त क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट प्रेरणा पुंडीर का कहना है कि मानसिक रोग के पहले चरण वाले मरीज काउंसिलिंग के बाद ठीक हो जाते हैं, लेकिन पुराने व गंभीर रोगियों को काउंसिलिंग के साथ दवा की जरूरत होती है। जिन मरीजों को दवा की जरूरत होती हैं, उन्हें रेफर करना पड़ता है।
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इस तरह से आ रहे केस
40 वर्षीय महिला की पहले काउंसिलिंग की गई, लेकिन आराम नहीं मिला। उनकी केस हिस्ट्री देखी तो पता चला कि उसे मानसिक रोग की पुरानी समस्या थी। महिला की काउंसिलिंग यहां पर और दवा मेरठ मेडिकल से चल रही है। 30 वर्षीय युवक प्रदीप ने बताया कि उसे सिर में दर्द रहता है। वह जिला अस्पताल में इलाज के लिए आया था, लेकिन यहां आकर पता चला कि मनोचिकित्सक नहीं है। उसे अब बिना इलाज के वापस जाना पड़ रहा है।
कोट
मनोचिकित्सक का पद करीब आठ माह से रिक्त चल रहा है। शासन को रिक्त पदों पर चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए पत्राचार किया गया है।
- डॉ. किशोर कुमार आहूजा, सीएमएस जिला अस्पताल।