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Shamli News: सिस्टम ने कागजों में मारा, अब खुद को जिंदा साबित करने की जंग
Sun, 17 May 2026 12:40 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 17 May 2026 12:40 AM IST
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हसनपुर लुहारी। गांव हसनपुर लुहारी में समाज कल्याण विभाग की चूक ने छह बुजुर्गों को परेशानी में डाल दिया है। विभागीय रिकॉर्ड में इन बुजुर्गों को मृत घोषित कर उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई। अब यहीं बुजुर्ग जीते जी अपने आप को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
गांव निवासी बलवंती, कुंता, कालू, मोहम्मद उमर, महबूब और रहमत ने बताया कि करीब दो साल पहले उनकी वृद्धावस्था पेंशन अचानक बंद हो गई। जानकारी करने पर पता चला कि विभागीय अभिलेखों में उन्हें मृत दर्शाया गया है। इसके बाद से वे खुद को जिंदा साबित करने के लिए समाज कल्याण विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
वृद्धा बलवंती का दर्द है कि इस उम्र में उन्हें चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वह जिंदा होकर भी अधिकारियों के समक्ष अपने आप को जिंदा साबित नहीं कर पा रहे हैं। महबूब के अनुसार समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें इधर से उधर टहला रहे हैं, लेकिन उनकी पेंशन शुरू नहीं हो पा रही है। मो. उमर और कालू का आरोप है कि बिना किसी जांच-पड़ताल और सत्यापन के उनको मार दिया गया। न तो कोई सूचना दी गई और न ही गांव स्तर पर इसकी पुष्टि कराई गई। संवाद
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गरीब बुजुर्गों पर भारी पड़ रही विभागीय लापरवाही
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा गरीब और जरूरतमंद बुजुर्ग भुगत रहे हैं। पेंशन बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर जल्द पेंशन बहाल कराने की मांग की है।
बुजुर्गों की पेंशन बंद करने का मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद पात्र बुजुर्गों को शीघ्र पेंशन का लाभ दिलाया जाएगा। - प्रेमचंद, कार्यवाहक मुख्य विकास अधिकारी
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गांव निवासी बलवंती, कुंता, कालू, मोहम्मद उमर, महबूब और रहमत ने बताया कि करीब दो साल पहले उनकी वृद्धावस्था पेंशन अचानक बंद हो गई। जानकारी करने पर पता चला कि विभागीय अभिलेखों में उन्हें मृत दर्शाया गया है। इसके बाद से वे खुद को जिंदा साबित करने के लिए समाज कल्याण विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
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वृद्धा बलवंती का दर्द है कि इस उम्र में उन्हें चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वह जिंदा होकर भी अधिकारियों के समक्ष अपने आप को जिंदा साबित नहीं कर पा रहे हैं। महबूब के अनुसार समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें इधर से उधर टहला रहे हैं, लेकिन उनकी पेंशन शुरू नहीं हो पा रही है। मो. उमर और कालू का आरोप है कि बिना किसी जांच-पड़ताल और सत्यापन के उनको मार दिया गया। न तो कोई सूचना दी गई और न ही गांव स्तर पर इसकी पुष्टि कराई गई। संवाद
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गरीब बुजुर्गों पर भारी पड़ रही विभागीय लापरवाही
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा गरीब और जरूरतमंद बुजुर्ग भुगत रहे हैं। पेंशन बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर जल्द पेंशन बहाल कराने की मांग की है।
बुजुर्गों की पेंशन बंद करने का मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद पात्र बुजुर्गों को शीघ्र पेंशन का लाभ दिलाया जाएगा। - प्रेमचंद, कार्यवाहक मुख्य विकास अधिकारी