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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   The photographer's lover said - it was wrong to get caught, the citizens said - it is necessary to stop tokens

Shamli News: कुत्तों के प्रेमी बोले - पकड़ा जाना गलत, नागरिक बोले - पकड़कर बंद किया जाना जरूरी

Sat, 23 Aug 2025 12:16 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 12:16 AM IST
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The photographer's lover said - it was wrong to get caught, the citizens said - it is necessary to stop tokens
कुत्ते प्रेमी बोले पकड़ा जाना गलत, नागरिक बोले पकड़कर बंद किया जाना जरूरी
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जिले में हर महीने दो हजार से ज्यादा लोगों को लगते हैं एंटी रेबीज के इंजेक्शन
सड़कों और गलियों में घूमने वाले आवारा कुत्ते लोगों पर कर रहे हमले
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में आवारा कुत्तों के काटने के मामले रोज सामने आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में हर महीने दो हजार से ज्यादा लोग एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर जहां कुत्ते के प्रेेमियों ने पकड़े जाने को गलत बताया है, वहीं नागरिकों ने पकड़ा जाना जरूरी बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के मामले में कहा है कि जिन कुत्तों को पकड़ा जाता है, उनकी नसबंदी व टीकाकरणकर जहां से उठाया है, वहीं छोड़ा जाए हालांकि रेबीज से संक्रमित और आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों को शेल्टर होम में ही रखा जाए।
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काकानगर निवासी अमित शर्मा ने कहा कि शहर में गली मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं, जो आते जाते लोगों पर हमला करते हैं। आवारा कुत्तों को पकड़ा जाना चाहिए।
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गोशाला रोड निवासी नितिन वर्मा का कहना है कि आवारा कुत्तों के मामले में नगरपालिका को इन्हें पकड़कर रखने और उनके खाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इन्हें सड़काें पर नहींं छोड़ा जाना चाहिए।
विवेक विहार निवासी नीशू चौधरी का कहना है कि कुत्ते भी अन्य जीवों की तरह हैं। इन्हें पकड़ा नहीं जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है।
अंकित कश्यप का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का सही निर्णय है। कुत्ते बेजुबान होते हैं। इन्हें भी घूमने फिरने की आजादी होनी चाहिए। इन्हें नहीं पकड़ा जाना चाहिए।

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शहर में 1800 कुत्तों की हुई थी नसबंदी
शामली में नगरपालिका की तरफ से पिछले साल करीब 1800 कुत्तों की नसबंदी कराई गई थी। इसका ठेका सहारनपुर की कंपनी को दिया गया था। प्रति नसबंदी 1100 रुपये का भुगतान किया गया था। नसबंदी के लिए रेलपार में पालिका ने बैक्वट हॉल को अस्थाई तौर पर शेल्टर होम बनाया गया था। शेल्टर होम में कुत्तों की नसबंदी के बाद उपचार व उनके भोजन की व्यवस्था की गई थी। ठीक होने के बाद कुत्तों को वहीं छोड़ा गया था, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इस बार भी नसबंदी कराने का प्रस्ताव बोर्ड में रखा गया था, लेकिन बोर्ड सदस्यों के बीच सहमति न बनने पर प्रस्ताव पास नहीं हो पाया था।
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संजीव शर्मा
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