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स्वयं सहायता की ताकत से चुनी कामयाबी की राह
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Fri, 06 Apr 2018 12:14 AM IST
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मानकपुर में स्वयं सहायता समूह में दोने पत्तल बनातीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली में महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का असर समाज में स्पष्ट रुप से दिखने लगा है। महिलाएं इन योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक रुप से भी सशक्त बन रही है। ग्राम्य विकास विभाग के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तैयार किए जा रहे स्वयं सहायता समूह इस अभियान की रीढ़ बनकर सामने आए है।
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जिले में महिलाओं के करीब 1500 स्वयं सहायता समूह इस समय सक्रिय रूप से संचालित हैं। खासकर थानाभवन क्षेत्र में सर्वाधिक 410 समूह संचालित हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हुई हैं बल्कि परिवार को भी आर्थिक रुप से मजबूती देने में अहम योगदान दे रही हैं। उदाहरण के रुप में थानाभवन क्षेत्र के मानकपुर गांव की 11 महिलाओं ने मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह तैयार किया और सरकार से सहायता लेकर पत्तल-दोने बनाने का काम कर रही हैं। इन महिलाओं की औसत मासिक आय छह से आठ हजार रुपये है। इसी तरह से रघुनाथपुर गांव की महिलाएं छवि समूह बनाकर अचार और मसाले बनाने का काम कर दस से 15 हजार रुपये प्रतिमाह आमदनी कर रही हैं। मसाले न सिर्फ जिला स्तर पर शामली में बेचे जाते हैं, बल्कि दिल्ली व देहरादून जैसे शहरों में लगने वाले ट्रेड फेयर में प्रदर्शनी भी लगा रही हैं। यह महिलाएं उनके लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं, जो महिलाएं आर्थिक तंगी के कारण खुद को असहाय महसूस करती हैं।
ऐसे मिलती है मदद
जब भी कोई स्वयं सहायता समूह पंजीकरण कराता है तो सबसे पहले तीन माह पूरे होने पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से समूह को रिवाल्विंग फंड के रुप में 15 हजार रुपये की मदद दी जाती है। इसके बाद छह माह बाद समूह ग्राम पंचायत मिशन के जरिये एक लाख दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता ले सकता है। यदि इसके बाद भी समूह को पैसे की जरूरत होती है तो नजदीकी बैंक से 50 हजार रुपये तक का ऋण दिलाया जाता है।
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बोली समूह की सशक्त महिलाएं
मेरे पति इलेक्ट्रीशियन हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। एक साल पहले हम आसपास की महिलाओं ने एकत्रित होकर समूह बनाया और पत्तल-दोने बनाने का काम शुरू किया। आज हम खुद तो आत्मनिर्भर हैं ही, साथ ही परिवार का दैनिक खर्च भी खुद उठा लेती हैं। -- नीता देवी, मानकपुर।
-- परिवार मजदूरी करके जैसे तैसे घर चलाता था। आठ महीने पहले मैने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मसाले बनाने का काम शुरू किया। आज मैं आठ हजार रुपये महीना तक बचा लेती हूं। इससे घर भी चल जाता है और आगे के लिए कुछ बचत भी हो जाती है। -- रुमा देवी, मानकपुर।
क्षेत्र में जितने भी स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे हैं। उनकी नियमित रुप से मॉनीटरिंग की जाती है। क्षेत्र में समूह की प्रगति अच्छी है। इसे देखते हुए सात नए समूह बनाने की तैयारी की जा रही है, जिससे सभी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। -- ममता देवी, ब्लाक मैनेजर, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन।
-- सेनेटरी पैड बेचेंगे स्वयं सहायता समूह
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शामली जिले में पहली बार सेनेटरी पैड का निर्माण शुरू हो गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के जिला प्रबंधक दलगंजन सिंह ने बताया कि एलम नगर पंचायत द्वारा सेनेटरी पैड निर्माण कराया गया है, करीब 60 हजार पैड बनकर तैयार हो गए हैं। इनकी बिक्री महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं करेंगी। मंगलवार से यह कार्य शुरू करा दिया जाएगा। प्रथम चरण में उन महिलाओं को सेनेटरी पैड बेेचे जाएंगे, जो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के आसपास रहती हैं। इसके बाद इसकी बाजार में भी सप्लाई कराई जाएगी। पैड की कीमत निर्धारित कर दी गई है, जिसके चलते छोटे पैकेट की कीमत 17 और बड़े पैकेट की कीमत 20 रुपये होगी। प्रत्येक पैकेट में छह पैड होंगे।
-- वर्जन --
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के जिला प्रबंधक दलगंजन सिंह ने बताया कि जिले में सक्रिय स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रही हैं। महिलाएं खुद भी आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं।
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