{"_id":"5925cd3c4f1c1be45b53676b","slug":"the-name-is-his-god-or-ram","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाम उसका खुदा या राम है...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाम उसका खुदा या राम है...
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 May 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
cultural
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैराना। मरहूम सांसद चौधरी मुनव्वर हसन की याद में मंगलवार की रात कुल हिंद मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध शायरों ने कलाम पेश कर श्रोताओं को बांधे रखा।
मंगलवार की रात ईदगाह के पास कोट के मैदान में आयोजित मुशायरे की शुरुआत शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने कलाम पेश करते हुए कहा कि इस तरह हौसला आजमाया करो, मुश्किलें देखकर मुस्कुराया करो. दो निवाले भले कम ही खाया करो, अपने बच्चों को लेकिन पढ़ाया करो।
शायर वारिस वारसी ने सुनाया ये अमल भी इबादत का ही एक हिस्सा है, दो घड़ी बैठ के हंसना किसी बीमार के साथ। शायर फैमस खतौलवी ने सुनाया कि दुनिया बमों के दौर से आगे निकल गई, हम लोहा ढूंढते रहे तलवार के लिए।
विज्ञापन
शायर महेंद्र अश्क ने कहा कि तमाम दिन के सफर के थके हुए पंछी, घरों को लौट रहे हैं शिकार मत करना। रामपुर से पधारे शायर ताहिर फराज ने कहा कि नाम उसका खुदा या राम है, हमको तो बस बंदगी से काम है। कवि प्रदीप मायूस ने सुनाया कि वे अपने घर पे खाली हाथ आखिर किस तरह जाए, कि जिस मजदूर का दंगे में रिक्शा टूट जाता है। पंजाब के मालेर कोटला से आई ईशा नाज ने कहा कि अश्क आंखों से जो टपके तो मालूम हुआ, लौट कर आते नहीं छोड़ कर जाने वाले।
मोहतरमा उजमा परवीन ने कहा कि ना तो जालिम से ना बलवाई से डर लगता है, आज इक भाई को बस भाई से डर लगता है, जब से बेटी ने जवानी में कदम रखा है, जाने क्या बात है शहनाई से डर लगता है। इमरान झिंझानवी ने कहा कि जो उनकी याद में आंसू बहाने वाले हैं, उन्हें हुजूर मदीना बुलाने वाले हैं।
शायर साकिब गंगोही ने कहा कि नाहिद मुनव्वर, नाहिद मुनव्वर क्या खूब बनाया है, तेरा तकदीर ने मुकद्दर। सहारनपुर के प्रसिद्ध शायर शाहनवाज पप्पी ने कहा इसकी फितरत ठहरना नहीं है, ये सफर इंतहा करेगी। नदीम शान ने कलाम पेश कर श्रोताओं को बांधे रखा।
मुशायरे का उद्घाटन पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने किया। कार्यक्रम की आयोजक इकरा मुनव्वर हसन रहीं। शुभारंभ सपा विधायक चौधरी नाहिद हसन व सपा नेता रुद्रसेन गंगोह ने संयुक्त रूप से शमा रोशन करके किया। अध्यक्षता एनूदीन शाह व संचालन शायर मोईन शादाब ने किया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध शायर अलहाज कौसर जैदी, आबिद वफा, ताहिर फराज, बलराज मलिक, हाजी इलियास गंगोह, कैराना चेयरमैन हाजी राशिद, पूर्व चेयरमैन इंतजार अजीज आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
मंगलवार की रात ईदगाह के पास कोट के मैदान में आयोजित मुशायरे की शुरुआत शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने कलाम पेश करते हुए कहा कि इस तरह हौसला आजमाया करो, मुश्किलें देखकर मुस्कुराया करो. दो निवाले भले कम ही खाया करो, अपने बच्चों को लेकिन पढ़ाया करो।
विज्ञापन
शायर वारिस वारसी ने सुनाया ये अमल भी इबादत का ही एक हिस्सा है, दो घड़ी बैठ के हंसना किसी बीमार के साथ। शायर फैमस खतौलवी ने सुनाया कि दुनिया बमों के दौर से आगे निकल गई, हम लोहा ढूंढते रहे तलवार के लिए।
विज्ञापन
शायर महेंद्र अश्क ने कहा कि तमाम दिन के सफर के थके हुए पंछी, घरों को लौट रहे हैं शिकार मत करना। रामपुर से पधारे शायर ताहिर फराज ने कहा कि नाम उसका खुदा या राम है, हमको तो बस बंदगी से काम है। कवि प्रदीप मायूस ने सुनाया कि वे अपने घर पे खाली हाथ आखिर किस तरह जाए, कि जिस मजदूर का दंगे में रिक्शा टूट जाता है। पंजाब के मालेर कोटला से आई ईशा नाज ने कहा कि अश्क आंखों से जो टपके तो मालूम हुआ, लौट कर आते नहीं छोड़ कर जाने वाले।
मोहतरमा उजमा परवीन ने कहा कि ना तो जालिम से ना बलवाई से डर लगता है, आज इक भाई को बस भाई से डर लगता है, जब से बेटी ने जवानी में कदम रखा है, जाने क्या बात है शहनाई से डर लगता है। इमरान झिंझानवी ने कहा कि जो उनकी याद में आंसू बहाने वाले हैं, उन्हें हुजूर मदीना बुलाने वाले हैं।
शायर साकिब गंगोही ने कहा कि नाहिद मुनव्वर, नाहिद मुनव्वर क्या खूब बनाया है, तेरा तकदीर ने मुकद्दर। सहारनपुर के प्रसिद्ध शायर शाहनवाज पप्पी ने कहा इसकी फितरत ठहरना नहीं है, ये सफर इंतहा करेगी। नदीम शान ने कलाम पेश कर श्रोताओं को बांधे रखा।
मुशायरे का उद्घाटन पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने किया। कार्यक्रम की आयोजक इकरा मुनव्वर हसन रहीं। शुभारंभ सपा विधायक चौधरी नाहिद हसन व सपा नेता रुद्रसेन गंगोह ने संयुक्त रूप से शमा रोशन करके किया। अध्यक्षता एनूदीन शाह व संचालन शायर मोईन शादाब ने किया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध शायर अलहाज कौसर जैदी, आबिद वफा, ताहिर फराज, बलराज मलिक, हाजी इलियास गंगोह, कैराना चेयरमैन हाजी राशिद, पूर्व चेयरमैन इंतजार अजीज आदि मौजूद रहे।