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Shamli News: जिला अस्पताल के कर्मचारियों, बाहरी लोगों के गठजोड़ से चल रहा खेल
Fri, 10 Jan 2025 12:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 10 Jan 2025 12:24 AM IST
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शामली। जिला अस्पताल में काला पीलिया की छोटी जांच ही नहीं बड़ी जांच यानी वायरल लोड की जांच को लेकर बड़ा खेल चल रहा है। पड़ताल की तो इसका खुलासा हुआ। भले ही अस्पताल में हेपेटाइटिस सी के वायरल लोड की जांच की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है, मगर कर्मचारी बाहरी लैबों के कर्मचारियों से मिलीभगत कर ढाई से लेकर तीन हजार रुपये में अस्पताल में ही मरीजों की वायरल लोड की जांच करा रहे हैं। होम सर्विस भी देने का दावा किया जा रहा है।
यही नहीं, मात्र दो दिन के अंदर रिपोर्ट देने का दावा किया जा रहा है। पड़ताल के दौरान जिला अस्पताल के कर्मचारी और बाहरी लैब के कर्मचारियों से कुछ इस तरह से बातचीत हुई।
जिला अस्पताल की लैब में अस्पताल का कर्मचारी
संवाददाता : भाई ,हेपेटाइटिस सी के वायरल लोड की जांच करानी है, हो जाएगी क्या?
कर्मचारी : हो जाएगी, 2500 से तीन हजार रुपये लगेंगे
संवाददाता : भाई, अस्पताल में तो जांच फ्री होती है फिर रुपये क्यूं दूं?
कर्मचारी : बाहर से कर्मचारी को बुलाउंगा, इसलिए
संवाददाता : क्यों
कर्मचारी: यहां पर वायरल लोड की जांच नहीं होती, बाहरी कर्मचारी अस्पताल के अंदर ही आकर जांच कर देगा, थोड़े और रुपये कम करा दूंगा।
संवाददाता : ठीक है।
केस-2
बाहरी लैब का कर्मचारी अस्पताल प्रांगण में पर्ची रूम के पास मिलता है, जिससे संवाददाता को अस्पताल के कर्मचारी ने मिलवाया।
संवाददाता : आप ही वायरल लोड की जांच करते हो
कर्मचारी : हां , किसकी करानी है
संवाददाता: मुझे अपनी ही करानी है, कितने में होंगी
कर्मचारी: अंदर डाक्टर साहब ने बताया तो हैं तुम्हें 2500 दे देना
संवाददाता : तुम जिला अस्पताल से ही हो
कर्मचारी: जिला अस्पताल से ही समझो, अस्पताल में आने वाले मरीजों के सैंपल मैं ही लेता हूं
संवाददाता: कब से ले रहे हो
कर्मचारी: ये मत पूछो, अपनी सब सेटिंग है
संवाददाता: रिपोर्ट कब दोंगे
कर्मचारी : दो दिन बाद ले लेना।
कॉल करते ही जांच को पहुंच जाता है कर्मचारी, एक हजार तक का कमीशन
बाहरी कर्मचारी जिला अस्पताल से सैंपल लेने वाले कर्मचारियों के कॉल करते ही तुरंत ही मौके पर पहुंच जाता है। एक जांच के बदले कर्मचारी को एक हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाता है।
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हर शुक्रवार को जिला अस्पताल में होती है निशुल्क जांच
जिला अस्पताल में हर सप्ताह शुक्रवार को हेपेटाइटिस सी के वायरल लोड की जांच के लिए शिविर आयोजित किया जाता है। जिसमें 100 से अधिक मरीजों सैंपल लिए जाते हैं, जिन्हें जांच को मेरठ प्रयोगशाला भेजा जाता है। जहां से सैंपलों की रिपोर्ट आने में तीन माह तक का समय लगता है। जिसके कारण मरीज भी प्राइवेट लैब या कर्मचारियों से जांच कराना अधिक मुनासिब समझते हैं।
वायरल लोड की जांच प्राइवेट कर्मचारियों को बुलाकर अस्पताल में ही कराने के मामले की जांच कराई जाएगी। मरीजों से वसूली करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। - डाॅ. किशोर आहूजा, सीएमएस जिला अस्पताल शामली
जिला या फिर भी सरकारी अस्पताल में प्राइवेट लैबों के कर्मचारियों या फिर दलालों को बुलाकर मरीज की जांच नहीं कराई जा सकती है। सीएमएस से जवाब-तलब किया गया है। मामले में जो भी लोग लिप्त होंगे, सभी पर कार्रवाई होगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। मरीजों से अपील है कि वह किसी के भी बहकावे में नहीं आएं। रुपये मांगने वालों की शिकायत तुरंत करें।
अरविंद चौहान, जिलाधिकारी शामली
कल के अंक में पढ़ें...
500 रुपये दो, बिना लाइन और नंबर लगवाए ही सिटी स्कैन करा लो। सिटी स्कैन कराने आने वाले मरीजों से भी अस्पताल के कर्मचारी रुपये वसूल रहे हैं, जबकि अस्पताल में यह सुविधा बिल्कुल निशुल्क है। अस्पताल में घुसते ही दलाल और कर्मचारी मरीजों को झांसे में लेना शुरू कर देते हैं।
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यही नहीं, मात्र दो दिन के अंदर रिपोर्ट देने का दावा किया जा रहा है। पड़ताल के दौरान जिला अस्पताल के कर्मचारी और बाहरी लैब के कर्मचारियों से कुछ इस तरह से बातचीत हुई।
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जिला अस्पताल की लैब में अस्पताल का कर्मचारी
संवाददाता : भाई ,हेपेटाइटिस सी के वायरल लोड की जांच करानी है, हो जाएगी क्या?
कर्मचारी : हो जाएगी, 2500 से तीन हजार रुपये लगेंगे
संवाददाता : भाई, अस्पताल में तो जांच फ्री होती है फिर रुपये क्यूं दूं?
कर्मचारी : बाहर से कर्मचारी को बुलाउंगा, इसलिए
संवाददाता : क्यों
कर्मचारी: यहां पर वायरल लोड की जांच नहीं होती, बाहरी कर्मचारी अस्पताल के अंदर ही आकर जांच कर देगा, थोड़े और रुपये कम करा दूंगा।
संवाददाता : ठीक है।
केस-2
बाहरी लैब का कर्मचारी अस्पताल प्रांगण में पर्ची रूम के पास मिलता है, जिससे संवाददाता को अस्पताल के कर्मचारी ने मिलवाया।
संवाददाता : आप ही वायरल लोड की जांच करते हो
कर्मचारी : हां , किसकी करानी है
संवाददाता: मुझे अपनी ही करानी है, कितने में होंगी
कर्मचारी: अंदर डाक्टर साहब ने बताया तो हैं तुम्हें 2500 दे देना
संवाददाता : तुम जिला अस्पताल से ही हो
कर्मचारी: जिला अस्पताल से ही समझो, अस्पताल में आने वाले मरीजों के सैंपल मैं ही लेता हूं
संवाददाता: कब से ले रहे हो
कर्मचारी: ये मत पूछो, अपनी सब सेटिंग है
संवाददाता: रिपोर्ट कब दोंगे
कर्मचारी : दो दिन बाद ले लेना।
कॉल करते ही जांच को पहुंच जाता है कर्मचारी, एक हजार तक का कमीशन
बाहरी कर्मचारी जिला अस्पताल से सैंपल लेने वाले कर्मचारियों के कॉल करते ही तुरंत ही मौके पर पहुंच जाता है। एक जांच के बदले कर्मचारी को एक हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाता है।
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हर शुक्रवार को जिला अस्पताल में होती है निशुल्क जांच
जिला अस्पताल में हर सप्ताह शुक्रवार को हेपेटाइटिस सी के वायरल लोड की जांच के लिए शिविर आयोजित किया जाता है। जिसमें 100 से अधिक मरीजों सैंपल लिए जाते हैं, जिन्हें जांच को मेरठ प्रयोगशाला भेजा जाता है। जहां से सैंपलों की रिपोर्ट आने में तीन माह तक का समय लगता है। जिसके कारण मरीज भी प्राइवेट लैब या कर्मचारियों से जांच कराना अधिक मुनासिब समझते हैं।
वायरल लोड की जांच प्राइवेट कर्मचारियों को बुलाकर अस्पताल में ही कराने के मामले की जांच कराई जाएगी। मरीजों से वसूली करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। - डाॅ. किशोर आहूजा, सीएमएस जिला अस्पताल शामली
जिला या फिर भी सरकारी अस्पताल में प्राइवेट लैबों के कर्मचारियों या फिर दलालों को बुलाकर मरीज की जांच नहीं कराई जा सकती है। सीएमएस से जवाब-तलब किया गया है। मामले में जो भी लोग लिप्त होंगे, सभी पर कार्रवाई होगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। मरीजों से अपील है कि वह किसी के भी बहकावे में नहीं आएं। रुपये मांगने वालों की शिकायत तुरंत करें।
अरविंद चौहान, जिलाधिकारी शामली
कल के अंक में पढ़ें...
500 रुपये दो, बिना लाइन और नंबर लगवाए ही सिटी स्कैन करा लो। सिटी स्कैन कराने आने वाले मरीजों से भी अस्पताल के कर्मचारी रुपये वसूल रहे हैं, जबकि अस्पताल में यह सुविधा बिल्कुल निशुल्क है। अस्पताल में घुसते ही दलाल और कर्मचारी मरीजों को झांसे में लेना शुरू कर देते हैं।