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Shamli News: गन्ना छोड़ लीची और नाशपाती की फसल से लाभ ले रहे जिले के किसान

Sun, 01 Jun 2025 12:25 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Jun 2025 12:25 AM IST
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The farmers of the district are getting profit from litchi and pear crops leaving sugarcane
गोहरनी के जंगल में बाग में लगे नाशपाती के पेड़। संवाद
शामली। जिले के किसानों ने अब गन्ने के साथ-साथ बागवानी कर लाभ कमा रहे हैं। कोई लीची तो कोई नाशपाती का बाग लगाकर अच्छा लाभ कमा रहा है।
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जनपद के लगभग 90 प्रतिशत किसान अभी तक केवल गन्ने की फसल की ही बुवाई करते थे, लेकिन अब जनपद के काफी किसानों में कुछ किसानों को देखते हुए बदलाव आने लगा है। वह गन्ने की बढ़ती बीमारियों व मजदूरों की किल्लत के चलते गन्ने की फसल को छोड़कर कम मेहनत व अच्छा लाभ वाली फसल की ओर बढ़ रहे हैं।
गांव गोहरनी के किसान हितेंद्र कुमार ने करीब 47 बीघा जमीन में नाशपाती व लीची का बाग लगा रखा है। वहीं, गांव गोहरनी के किसान अविराज ने भी 40 बीघा नाशपाती व लीची का बाग तैयार कर रखा है। गांव भैंसवाल के किसान उमेश कुमार ने भी लगभग 20 बीघा में नाशपाती का बाग लगा रखा है। गांव कुड़ाना में नरेंद्र मलिक ने करीब 10 बीघा जमीन में अमरूद का बाग काटकर नाशपाती का बाग लगा रखा है। इसके साथ ही गांव गोहरनी में अन्य किसानों ने भी इसी वर्ष गन्ने के खेत में ही नाशपाती के पौधे रोपित करते हुए बाग तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी है।
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मजबूर होकर उठाया था कदम, मिल रहा अच्छा लाभ
-गोहरनी के किसान हितेंद्र का कहना है कि गन्ने की फसल अधिक बीमारी के कारण हर माह कीटनाशक का स्प्रे करना पड़ने लगा था, लेकिन इस फसल में केवल दो स्प्रे से ही काम चल जाता है। तीन माह में ही फसल तैयार होकर मंडी में बिक जाती है। जिसका अच्छा दाम और समय से भुगतान हो जाता है।
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-गोहरनी के किसान अविराज व भैंसवाल के किसान उमेश कुमार का कहना है कि गन्ने की फसल में हर माह स्प्रे करना पड़ता है। उसके बाद उसकी निराई-गुडाई करानी पड़ती है। कुछ बड़ा होने पर उसकी बंधाई करानी पड़ती है। उसके बाद छिलाई के लिए भी ठेका देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल में पूरे वर्ष लगा रहना पड़ता है और भुगतान समय से नहीं मिलता है। पूरे वर्ष मजदूरों की जरूरत पड़ती है, जो नहीं मिल पाने के कारण परेशानी झेलनी पड़ती थी।
-किसान नरेंद्र ने बताया कि नाशपाती का भाव 25 से 30 रुपये प्रति किलो रहता है और एक पेड़ से लगभग चार से पांच क्विंटल फल मिल जाता है। वहीं लीची के दाम भी 100 से 150 रुपये किलो तक रहते हैं। फसल को शामली की मंडी में ही बेचकर कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा रहा है। अन्य किसानों को भी बागवानी की ओर बढ़ना चाहिए।

-गूगल का सहारा लेकर कर रहे खेती
किसानों ने बताया कि वह फसल अच्छी लेने के लिए गूगल का सहारा लेकर अच्छी फसल तैयार करते हुए अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। फसल की बीमारी, बचाव व अच्छी किस्म के बारे में गूगल सर्च से जानकारी लेते रहते हैं।
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