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कैराना में 20 सितंबर को निकाला जाएगा काल जुलूस
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कैराना में निकाले जाने वाले काल जुलूस का फाइल फोटो
- फोटो : SHAMLI
कैराना में 20 सितंबर को निकाला जाएगा काल जुलूस
भारत देश में एकमात्र कैराना कस्बे में श्रीरामलीला मंचन के तहत दशकों से निकाला जाता है काल जुलूस
हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक काल जुलूस में दोनों समुदाय के लोग करते हैं शिरकत
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। कर्णनगरी कैराना में हर वर्ष काल जुलूस निकाला जाता है। इस बार श्रीराम लीला कमेटी के तत्वावधान में काल जुलूस पूरे हर्षोल्लास के साथ 20 सितंबर को निकाला जाएगा। इसमें काल बना पात्र आमजन को दौड़ा-दौड़ाकर मारता है।
श्रीरामलीला का एक किरदार मौत का देवता काल भी है। काल का ही दूसरा नाम मौत है। दशकों से कैराना में श्रीरामलीला का मंचन किया जाता है। इस दौरान रामलीला प्रारंभ होने के दूसरे दिन लंकापति रावण सभी देवी-देवताओं को बंदी बनाकर कैद खाने में डाल देता है। वहीं, मौत का देवता काल तीनों लोकों ने त्राहि-त्राहि मचा देता है। रावण अपने पुत्र मेघनाथ को काल को बंदी बनाने का आदेश देता है।
काल नाट्य का मंचन कैराना में हकीकत में दिखाया जाता है। एक युवक का पूरा शरीर काले रंग में रंग दिया जाता है। जिसे काल का रूप कहा जाता है। काल हाथों में तलवार लेकर कस्बे के बाजारों में युवकों के आगे पीछे दौड़कर उन्हें तलवार मारता है। करीब 4 घंटे तक चलने वाले काल जुलूस में हिंदू हो या मुस्लिम सभी काल की तलवार से खुशी-खुशी मार खाते हैं। रामलीला के काल जुलूस मंचन में कोई हिंदू-मुसलमान नहीं होता है। सब काल जुलूस का आनंद लेते हैं। काल जुलूस का आनंद लेने के लिए युवक दूसरे शहरों से भी कैराना आते हैं।
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काल जुलूस में शाम के समय चौक बाजार में रावण पुत्र मेघनाथ रथ पर सवार होकर आता है। काल मेघनाथ का भयंकर युद्ध होता है। मेघनाथ काल को बंदी बनाकर रावण के दरबार में ले जाता है। काल जुलूस पूरे भारत वर्ष में केवल कैराना में ही दशकों से निकाला जाता है। श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष जयपाल कश्यप ने बताया कि इस बार कस्बे में 20 सितंबर को काल जुलूस निकाला जाएगा। युवा काल जुलूस निकाले जाने की खुशियां अभी से मनाने लगे हैं।
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भारत देश में एकमात्र कैराना कस्बे में श्रीरामलीला मंचन के तहत दशकों से निकाला जाता है काल जुलूस
हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक काल जुलूस में दोनों समुदाय के लोग करते हैं शिरकत
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। कर्णनगरी कैराना में हर वर्ष काल जुलूस निकाला जाता है। इस बार श्रीराम लीला कमेटी के तत्वावधान में काल जुलूस पूरे हर्षोल्लास के साथ 20 सितंबर को निकाला जाएगा। इसमें काल बना पात्र आमजन को दौड़ा-दौड़ाकर मारता है।
श्रीरामलीला का एक किरदार मौत का देवता काल भी है। काल का ही दूसरा नाम मौत है। दशकों से कैराना में श्रीरामलीला का मंचन किया जाता है। इस दौरान रामलीला प्रारंभ होने के दूसरे दिन लंकापति रावण सभी देवी-देवताओं को बंदी बनाकर कैद खाने में डाल देता है। वहीं, मौत का देवता काल तीनों लोकों ने त्राहि-त्राहि मचा देता है। रावण अपने पुत्र मेघनाथ को काल को बंदी बनाने का आदेश देता है।
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काल नाट्य का मंचन कैराना में हकीकत में दिखाया जाता है। एक युवक का पूरा शरीर काले रंग में रंग दिया जाता है। जिसे काल का रूप कहा जाता है। काल हाथों में तलवार लेकर कस्बे के बाजारों में युवकों के आगे पीछे दौड़कर उन्हें तलवार मारता है। करीब 4 घंटे तक चलने वाले काल जुलूस में हिंदू हो या मुस्लिम सभी काल की तलवार से खुशी-खुशी मार खाते हैं। रामलीला के काल जुलूस मंचन में कोई हिंदू-मुसलमान नहीं होता है। सब काल जुलूस का आनंद लेते हैं। काल जुलूस का आनंद लेने के लिए युवक दूसरे शहरों से भी कैराना आते हैं।
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काल जुलूस में शाम के समय चौक बाजार में रावण पुत्र मेघनाथ रथ पर सवार होकर आता है। काल मेघनाथ का भयंकर युद्ध होता है। मेघनाथ काल को बंदी बनाकर रावण के दरबार में ले जाता है। काल जुलूस पूरे भारत वर्ष में केवल कैराना में ही दशकों से निकाला जाता है। श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष जयपाल कश्यप ने बताया कि इस बार कस्बे में 20 सितंबर को काल जुलूस निकाला जाएगा। युवा काल जुलूस निकाले जाने की खुशियां अभी से मनाने लगे हैं।