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Shamli News: आयोग ने डाक विभाग को ब्याज समेत क्षतिपूर्ति देने का सुनाया आदेश
Fri, 09 Oct 2026 01:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:02 AM IST
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने आरडी की परिपक्वता राशि का समय से भुगतान न करने के मामले में डाक विभाग और बैंक को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने डाक विभाग के चार अधिकारियों को 3,63,485 रुपये की परिपक्वता राशि पर ब्याज के साथ क्षतिपूर्ति जमा करने तथा भारतीय स्टेट बैंक को 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया है।
मोहल्ला गगन विहार, शामली निवासी रेणु अग्रवाल ने आयोग में चार सितंबर 2024 को डाकघर के प्रवर अधीक्षक नई मंडी मुजफ्फरनगर, अधीक्षक डाकघर बागपत, पोस्टमास्टर मुख्य डाकघर शामली, उप मंडलीय डाक निरीक्षक मुख्य डाकघर शामली और भारतीय स्टेट बैंक शाखा शामली के प्रबंधक के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। परिवादी के मुताबिक उन्होंने डाकघर में पांच वर्ष के लिए पांच हजार रुपये मासिक की आरडी कराई थी। अवधि पूरी होने पर उन्हें 3,63,485 रुपये की परिपक्वता राशि का चेक संख्या 18197 दिनांक 21 सितंबर 2021 को जारी किया गया। परिवादी ने पांच अक्तूबर 2021 को यह चेक भारतीय स्टेट बैंक की शामली शाखा में अपने खाते में जमा किया।
आरोप लगाया कि चेक क्लीयरिंग के लिए मुजफ्फरनगर भेजा गया, जहां डिसऑनर होने के बाद रास्ते में गुम हो गया। बैंक ने परिवादी से इंडिमनिटी बॉन्ड भी लिया। इसके बाद 15 दिसंबर 2022 को बैंक ने डाक विभाग को पत्र भेजकर डुप्लीकेट चेक जारी करने का अनुरोध किया, लेकिन भुगतान नहीं हो सका। परिवादी ने अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और महिला सदस्य अमरजीत कौर ने डाक विभाग के चारों अधिकारियों को सेवा में कमी के कारण परिपक्वता राशि 3,63,485 रुपये पर 8 अक्तूबर 2021 से 25 सितंबर 2024 तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से क्षतिपूर्ति आयोग में जमा करने का आदेश दिया। वहीं, भारतीय स्टेट बैंक को सेवा में कमी के कारण हुई आर्थिक, मानसिक व शारीरिक क्षति के लिए 20 हजार रुपये तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में जमा करने के आदेश दिए।
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मोहल्ला गगन विहार, शामली निवासी रेणु अग्रवाल ने आयोग में चार सितंबर 2024 को डाकघर के प्रवर अधीक्षक नई मंडी मुजफ्फरनगर, अधीक्षक डाकघर बागपत, पोस्टमास्टर मुख्य डाकघर शामली, उप मंडलीय डाक निरीक्षक मुख्य डाकघर शामली और भारतीय स्टेट बैंक शाखा शामली के प्रबंधक के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। परिवादी के मुताबिक उन्होंने डाकघर में पांच वर्ष के लिए पांच हजार रुपये मासिक की आरडी कराई थी। अवधि पूरी होने पर उन्हें 3,63,485 रुपये की परिपक्वता राशि का चेक संख्या 18197 दिनांक 21 सितंबर 2021 को जारी किया गया। परिवादी ने पांच अक्तूबर 2021 को यह चेक भारतीय स्टेट बैंक की शामली शाखा में अपने खाते में जमा किया।
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आरोप लगाया कि चेक क्लीयरिंग के लिए मुजफ्फरनगर भेजा गया, जहां डिसऑनर होने के बाद रास्ते में गुम हो गया। बैंक ने परिवादी से इंडिमनिटी बॉन्ड भी लिया। इसके बाद 15 दिसंबर 2022 को बैंक ने डाक विभाग को पत्र भेजकर डुप्लीकेट चेक जारी करने का अनुरोध किया, लेकिन भुगतान नहीं हो सका। परिवादी ने अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और महिला सदस्य अमरजीत कौर ने डाक विभाग के चारों अधिकारियों को सेवा में कमी के कारण परिपक्वता राशि 3,63,485 रुपये पर 8 अक्तूबर 2021 से 25 सितंबर 2024 तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से क्षतिपूर्ति आयोग में जमा करने का आदेश दिया। वहीं, भारतीय स्टेट बैंक को सेवा में कमी के कारण हुई आर्थिक, मानसिक व शारीरिक क्षति के लिए 20 हजार रुपये तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में जमा करने के आदेश दिए।