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Shamli News: आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी पर लगाया तीन लाख का जुर्माना

Thu, 04 Sep 2025 12:31 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Sep 2025 12:31 AM IST
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The commission imposed a fine of Rs 3 lakh on the insurance companyThe commission imposed a fine of Rs 3 lakh on the insurance company
शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने इंश्योरेंस कंपनी पर गलत तरीके से क्लेम निरस्त करने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी के महाप्रबंधक, करनाल व शामली के शाखा प्रबंधक पर 3,06,038 रुपये का जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया है।
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शहर के मोहल्ला नौकुआं रोड अग्रसेन कॉलोनी निवासी अंजुल जैन ने नौ नवंबर 2020 को आयोग में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी करनाल के शाखा प्रबंधक, महाप्रबंधक मुंबई, कनव मोर्टस प्राइवेट लिमिटेड करनाल और इंश्योरेंस कंपनी शाखा प्रबंधक शामली के विरुद्ध परिवाद दायर कराया। परिवादी ने बताया कि उसने कनव मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड करनाल से गाड़ी पांच जून 2016 को खरीदी थी। गाड़ी की धनराशि और इंश्योरेंस की धनराशि एचडीएफसी बैंक लिमिटेड शामली द्वारा अदा की गई थी।
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इसके बाद दोबारा न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी करनाल से इंश्योरेंस कराया, जिसमें बताया गया था कि इंश्योरेंस कैशलैस पॉलिसी के अंतर्गत है। 11 मई 2018 को उनके पति नवीन जैन गाड़ी से अपने चालक परविंदर के साथ सहारनपुर जा रहे थे। रामपुर मनिहारन के निकट बाइक चालक के टकराने पर कार को नुकसान हुआ। कार को कनव मोटर्स के यहां रिपेयरिंग के लिए भेज दिया गया। इसके बाद परिवादी को बताया गया कि गाड़ी के एक्सीडेट के संबंध में शपथ पत्र देने पर उसका क्लेम पास कर दिया जाएगा और गाड़ी रिपेयरिंग के बाद वापस कर दी जाएगी। 31 मई 2018 काे गाड़ी रिपेयरिंग कर दी गई और बिल 1,96,038 रुपये का बनाया गया। कार की रिपेयरिंग का बिल इंश्योरेंस कंपनी करनाल के शाखा प्रबंधक व महाप्रबंधक मुंबई को करना था, लेकिन उन्हें तंग व परेशान करने के उद्देश्य से गलत तौर पर उनका क्लेम निरस्त कर दिया गया।
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क्लेम निरस्त करने का कारण बताया गया कि बाइक वाले को कोई इंजरी शपथ पत्र में नहीं बताई गई थी, जबकि उसे माइनर इंजरी थी। इसके लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दूसरा कारण ये बताया कि उनके पति गाड़ी चला रहे थे, जिनके पास कार चलाने के लिए वैध लाइसेंस नहीं था, जबकि कार को उनके चालक चला रहे थे।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद की सुनवाई करने के बाद जारी आदेश में कहा कि परिवादी अपने वाद को सिद्ध करने में सफल है। इंश्योरेंस कंपनी को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी द्वारा गाड़ी रिपेयरिंग के संबंध में अदा की गई धनराशि 1,96,068 रुपये भुगतान किए जाने की तिथि से वास्तविक अदायगी की दिनांक तक नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज और परिवादी को हुई आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 50 हजार रुपये, परिवाद व्यय 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में जमा करे।

इसके अलावा इश्योरेंस कंपनी करनाल व शामली के शाखा प्रबंधक और महाप्रबंधक मुंबई द्वारा सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 50 हजार रुपये अर्थदंड भी अधिरोपित किया।
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