{"_id":"6ab91b824fe8ae8824071a43","slug":"the-character-of-shri-ram-is-exemplary-vijay-kaushal-shamli-news-c-26-1-sal1002-174951-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय : विजय कौशल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय : विजय कौशल
Sun, 27 Sep 2026 07:04 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 27 Sep 2026 07:04 PM IST
विज्ञापन
शामली में रामकथा सुनाते संत प्रवर विजय कौशल महाराज। स्रोत आयोजक
जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन विजय कौशल जी महाराज ने राम जन्मोत्सव, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और जनकपुर आगमन के प्रसंग का वर्णन किया, जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
सूर्य और चंद्रमा से जुड़ी भावपूर्ण कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने चंद्रमा को आश्वासन दिया था कि द्वापर युग में वे उसके वंश में अवतार लेकर रात्रि के समय प्रकट होंगे। इसी प्रसंग के माध्यम से भगवान के नाम के साथ चंद्र जुड़ने की कथा का वर्णन किया गया।
उन्होंने बताया कि भगवान के बाल रूप के दर्शन के लिए भगवान शिव भी कागभुशुंडी के साथ अयोध्या पहुंचे थे। भगवान शिव ने वेश बदलकर ज्योतिषी और शिष्य के रूप में बाल स्वरूप के दर्शन किए।
विज्ञापन
इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने शुभ मुहूर्त में चारों भाइयों का नामकरण किया। कौशल्या नंदन का नाम राम, कैकेयी नंदन का भरत तथा सुमित्रा के पुत्रों का नाम लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा गया। महाराज ने कहा कि चारों भाइयों के रूप में मानो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही महाराज दशरथ के घर में साकार हो गए।
विजय कौशल महाराज ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय है, जबकि श्रीकृष्ण का कथन अनुकरणीय है। उन्होंने मां के महत्व पर कहा कि भले ही व्यक्ति मां की सेवा न कर पाए, लेकिन उसका अपमान कभी नहीं करना चाहिए।कथा के यजमान उद्यमी जेके जैन, आलोक जैन और आशीष जैन रहे। इस अवसर पर देहरादून से प्रमोद मित्तल, विनोद अग्रवाल, दिल्ली से प्रशांत गुप्ता, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन विजय कौशल जी महाराज ने राम जन्मोत्सव, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और जनकपुर आगमन के प्रसंग का वर्णन किया, जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
सूर्य और चंद्रमा से जुड़ी भावपूर्ण कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने चंद्रमा को आश्वासन दिया था कि द्वापर युग में वे उसके वंश में अवतार लेकर रात्रि के समय प्रकट होंगे। इसी प्रसंग के माध्यम से भगवान के नाम के साथ चंद्र जुड़ने की कथा का वर्णन किया गया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि भगवान के बाल रूप के दर्शन के लिए भगवान शिव भी कागभुशुंडी के साथ अयोध्या पहुंचे थे। भगवान शिव ने वेश बदलकर ज्योतिषी और शिष्य के रूप में बाल स्वरूप के दर्शन किए।
विज्ञापन
इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने शुभ मुहूर्त में चारों भाइयों का नामकरण किया। कौशल्या नंदन का नाम राम, कैकेयी नंदन का भरत तथा सुमित्रा के पुत्रों का नाम लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा गया। महाराज ने कहा कि चारों भाइयों के रूप में मानो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही महाराज दशरथ के घर में साकार हो गए।
विजय कौशल महाराज ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय है, जबकि श्रीकृष्ण का कथन अनुकरणीय है। उन्होंने मां के महत्व पर कहा कि भले ही व्यक्ति मां की सेवा न कर पाए, लेकिन उसका अपमान कभी नहीं करना चाहिए।कथा के यजमान उद्यमी जेके जैन, आलोक जैन और आशीष जैन रहे। इस अवसर पर देहरादून से प्रमोद मित्तल, विनोद अग्रवाल, दिल्ली से प्रशांत गुप्ता, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

शामली में रामकथा सुनाते संत प्रवर विजय कौशल महाराज। स्रोत आयोजक