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आस्था का केंद्र है तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का अतिशय क्षेत्र

Sun, 31 Jul 2022 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 31 Jul 2022 11:45 PM IST
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The center of faith is the area of Tirthankar Lord Parshvanath
संवाद न्यूज एजेंसी
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जलालाबाद। भगवान पार्श्वनाथ की पाषाण मूर्ति के चमत्कार से जलालाबाद प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बना है। अतिशय क्षेत्र में चार अगस्त को भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव में उत्तर भारत के कोने-कोने से जैन श्रद्धालु पहुंचेंगे। महोत्सव की तैयारी जोरों से चल रही है।
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित कस्बा जलालाबाद जैन मंदिर के चलते उत्तर भारत में विख्यात है। श्री 1008 पार्श्वनाथ जैन अतिशय क्षेत्र में भगवान पार्श्वनाथ की पांच इंच से कम लघु पाषाण प्रतिमा अत्यंत प्राचीन है। उत्तर भारत के अतिशय क्षेत्रों में जलालाबाद एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, यहां भगवान पार्श्वनाथ की लघु पाषाण प्रतिमा है। भगवान पार्श्वनाथ की चमत्कारिक मूर्ति के दर्शनमात्र से जैन श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्राचीन मूर्र्तियां मंदिर की वेदी में रखी गई थीं।
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प्रचलित है कि एक बार रामपुर मनिहारन व आसपास क्षेत्र के जैन समाज के लोग मूर्तियों को रामपुर मनिहारन ले गए थे। रात में स्वप्न में वापस जलालाबाद में स्थापित करने की चेतावनी मिली। रामुपर मनिहारन से सकल जैन समाज ने विधिवत मूर्तियों को प्राचीन मंदिर में स्थापित कराकर क्षमा याचना की। यहां पहला विराट वार्षिक रथयात्रा महोत्सव 1962 व 1963 रामपुर मनिहारन व आसपास जैन समाज के लोगों ने भव्य तरीके से आयोजन किया।
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वर्ष 1970 में जैन संत आचार्य विधानंद जी महाराज विहार करते हुए जैन मंदिर पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र को प्राचीन व अतिशय बताया। महाराज की प्रेरणा से प्राचीन मंदिर व अतिशय क्षेत्र की जीर्णोद्वार भावना जैन समाज में उत्पन्न हुई। वर्ष 1980 के बाद से विराट वार्षिक रथयात्रा महोत्सव में श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ने लगा। मंदिर जीर्णोद्धार 1979 से शुरू हुआ। 26 जून 1980 को प्रतिष्ठा पश्चात प्रतिमा प्राचीन वेदी में स्थापित कराई गई। वर्ष 1983 में आयोजित वार्षिक रथयात्रा में आचार्य शांति सागर जी महाराज की प्रेरणा से नवीन शिखर निर्माण किया गया। अतिशय क्षेत्र में होम्योपैथिक अस्पताल, त्यागी धर्मशाला, मानस्तम्भ का निर्माण किया गया। राजस्थान के कुशल कारीगरों ने पत्थरों की नक्काशी से जैन धर्म का सार समझाया है।

वर्तमान में रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु उत्तर भारत के कोने-कोने से भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन के लिए आते हैं। चार अगस्त 2022 में आयोजित मोक्ष कल्याणक महोत्सव में हजारों जैन श्रद्धालु मंदिर में आकर धर्म लाभ लेंगे। परम संरक्षक कैलाश चंद्र जैन, मुख्य परामर्शदाता जेके जैन , सतेंद्र जैन, तरुण जैन, राकेश जैन, सुभाष चंद्र जैन, मुकेश जैन, सतेंद्र कुमार, प्रदीप जैन, उमेश जैन, नरेंद्र जैन, सुभाष चंद्र, संदीप जैन, भूपेंद्र जैन कार्यक्रम की तैयारी में लगे हैं। मंत्री सुशील जैन ने बताया कि भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। मोक्ष कल्याणक महोत्सव की तैयारियां चल रही हैं।
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