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प्रदेश में लागू कार्बन फाइनेंस योजना को किसानों से जोड़ा जाएगा

Fri, 22 Jul 2022 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jul 2022 12:09 AM IST
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The carbon finance scheme implemented in the state will be linked to the farmers.
संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। वन विभाग, ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान नई दिल्ली के सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सिल्वर बेल्स स्कूल का आयोजन किया गया। जिसमें दिल्ली से आए ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान से आए जोगा सिंह ने कृषि वानिकी से कार्बन फाइनेंस के माध्यम से कृषकों को होने वाले वित्तीय लाभ के बारे में बताया।
उन्होंने बताया कि पेड़, कार्बन अवशोषित कर वातावरण में शुद्ध ऑक्सीजन का संचार करते हैं। वातावरण में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने कार्बन फाइनेंस योजना शुरू की है। इस योजना के तहत आगामी 10 वर्ष में 50 लाख टन कार्बन खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना से किसानों को जोड़ा जाएगा। किसान खेतों की मेड़ पर पॉपुलर व यूकेलिप्टिस के पेड़ लगाएं । वन विभाग इन पेड़ों का सर्वे कराएगा। जिन भी किसानों के खेत में पेड़ लगे होंगे, उन्हें पेड़ के रखरखाव के लिए निर्धारित धनराशि दी जाएगी।
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पेड़ों के सर्वे का काम वन विभाग के साथ मिलकर एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) संस्था करेगी। संस्था कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए देश में ऊर्जा, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन जैसे विषय पर शोध करती है। कार्यशाला में प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि कार्बन फाइनेंस योजना के माध्यम से किसानों को वित्तीय लाभ दिलाने के लिए वन विभाग एवं टेरी संस्था की ओर से जिले में किसानों के साथ वार्ता करते हुए सूचना मांगी जा रही है। जिन किसानों के वर्ष 2018, 2019, 2020 व 2021 में लगाए गए पेड़ों को इस योजना के अंतर्गत चुना गया है। इन पेड़ों द्वारा शोषित कार्बन का संस्था द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा। किसानों के इन पेड़ों के रखरखाव के लिये प्रति वर्ष 200 से 250 रुपये का भुगतान उनके खातों में किया जाएगा। इस भुगतान के लिए किसान के बैंक खाते के साथ-साथ खसरा, खतौनी, गाटा संख्या, पेड़ों की संख्या का विवरण की आवश्यकता होगी। इस सूचना को किसानों द्वारा लगाए गए पेड़ों के साथ वन कार्यालय को 31 जुलाई तक उपलब्ध कराया जा सकता है। इस अवसर पर वन संरक्षक वरुण तकनीकी सहायक समेत किसान मौजूद रहे।
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