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माता पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म
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माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म
गढ़ीपुख्ता। गढ़ीपुख़्ता के मोहल्ला पूर्वी कश्यपपुरी में डॉ. श्रीनिवास के आवास पर चल रही राम कथा में पंडित राकेश उपाध्याय ने कहा कि श्रीराम वनवास का मूल सिद्धांत है कि माता-पिता की आज्ञा का पालन करना। श्रीराम ने माता-पिता की आज्ञा पालन में संपूर्ण जीवन को त्याग दिया। पूरे राज्य का त्याग करके सबको सिखा दिया मर्यादा के सामने सब कुछ त्याग ही भक्ति है। माता पिता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
उन्होंने कहा कि जब-जब जीवन में लोभ आता है, तब तक व्यक्ति भटकता रहता है। कथावाचक ने केवट वर्णन करते हुए बताया कि राज परिवार का कर्तव्य है कि सभी समाज को एक साथ लेकर चलना। यही कार्य प्रभु श्रीराम ने किया और हमें सिखाया कि हम समाज को एकत्र करें। इस दौरान डॉक्टर श्रीनिवास बागड़ी, कुसुम बागड़ी, सलोचना देवी सहारनपुर, आचार्य अनुज भनेड़ा उद्दा, डॉ. अशोक बागड़ी, सुकमाल सभासद, माया, सुशीला, सुमन कश्यप, राजबाला सोनू, शहजाद, राजू मित्तल, नरेश सैनी आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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गढ़ीपुख्ता। गढ़ीपुख़्ता के मोहल्ला पूर्वी कश्यपपुरी में डॉ. श्रीनिवास के आवास पर चल रही राम कथा में पंडित राकेश उपाध्याय ने कहा कि श्रीराम वनवास का मूल सिद्धांत है कि माता-पिता की आज्ञा का पालन करना। श्रीराम ने माता-पिता की आज्ञा पालन में संपूर्ण जीवन को त्याग दिया। पूरे राज्य का त्याग करके सबको सिखा दिया मर्यादा के सामने सब कुछ त्याग ही भक्ति है। माता पिता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
उन्होंने कहा कि जब-जब जीवन में लोभ आता है, तब तक व्यक्ति भटकता रहता है। कथावाचक ने केवट वर्णन करते हुए बताया कि राज परिवार का कर्तव्य है कि सभी समाज को एक साथ लेकर चलना। यही कार्य प्रभु श्रीराम ने किया और हमें सिखाया कि हम समाज को एकत्र करें। इस दौरान डॉक्टर श्रीनिवास बागड़ी, कुसुम बागड़ी, सलोचना देवी सहारनपुर, आचार्य अनुज भनेड़ा उद्दा, डॉ. अशोक बागड़ी, सुकमाल सभासद, माया, सुशीला, सुमन कश्यप, राजबाला सोनू, शहजाद, राजू मित्तल, नरेश सैनी आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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