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गोशालाओं की व्यवस्थाएं बदहाल, ठंड में कांप रहे गोवंश
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चौसाना के गांव दथैडा गोशाला में बंधी गाय
- फोटो : SHAMLI
शामली। कई दिनों से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। जनमानस से लेकर पशु-पक्षी तक कांप रहे हैं, लेकिन गोशालाओं में रखे गए गोवंशों को ठंड से बचाने के लिए कोई अतिरिक्त उपाय नहीं किए गए। जो कुछ दान में मिल गया उसी के दम पर कुछ व्यवस्थाएं कर ली गईं। शासन से कोई अतिरिक्त बजट नहीं मिलने से कहीं पर टाट के बोरे भेज दिए गए तो कहीं पर थोड़ा-बहुत गुड़ उपलब्ध हो गया। ऊपर से ठंडी टिन की चादर और नीचे खाली जमीन पर गोवंश ठिठुर रहे हैं। अमर उजाला ने जनपद में कई आश्रय स्थलों का जायजा लिया, लेकिन ज्यादातर पर हालात खराब ही मिले।
जनपद में दो वृहद गो संरक्षण केंद्र और 26 आश्रय स्थल हैं। इनमें 3511 गोवंशों को रखा गया है। इनमें से ज्यादातर वृद्ध एवं बीमार गोवंश हैं। मुख्यमंत्री ने गोवंशों को ओढ़ाने के लिए टाट के बोरे तथा खिलाने के लिए गुड़ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं मिला। पशु चिकित्सा विभाग एवं गोशालाओं का संचालन कर रहे लोगों ने राशन डीलरों से दान में बोरे लेकर कुछ आश्रय स्थलों में भेजे हैं। इससे कुछ पशुओं को ओढ़ाने के लिए बोरे मिल गए, जबकि ज्यादातर ऐसे ही रहते हैं। कुछ लोगों ने दान में गुड़ दे दिया तो पशुओं को खिला दिया अन्यथा अलग से कोई व्यवस्था नहीं है।
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सर्दी में तड़पने को मजबूर गोवंश
बाबरी। क्षेत्र के गांव भंदोड़ा में अस्थाई गोशाला में 20 पशु हैं। इन्हें रात में टिन शेड में रखा जाता है, जिसके चारों ओर तिरपाल भी नहीं लगा है। ठंड में जमीन पर बिना पराली और पत्ती के ही बैठते हैं। ग्राम प्रधान अमित शर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। मंगलवार को सभी गोवंशों को शामली गोशाला में शिफ्ट कराया जाएगा। पशुओं को ना तो गुड़ मिल रहा है और न ही उन्हें ओढ़ाने के लिए टाट के बोरे हैं।
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ठंड से बचाव केे नहीं हैं बंदोबस्त
चौसाना। गांव दथेड़ा में चल रही गोशाला में पशुओं को ठंड से बचाव के लिए कोई अतिरिक्त बंदोबस्त नहीं हैं। टिन शेड में पशु रात में रहते हैं, जबकि दिन में खुले में घूमते हैं। चारे के रूप में भूसा और पराली दी जा रही है। गोशाला में कुल 52 पशु हैं। उनके लिए टाट के बोरे और गुड़ की व्यवस्था नहीं है। वहीं, खेड़ी खुशनाम की गोशाला 75 गोवंश हैं। सभी पशु टिन शेड के नीचे बांधे जाते हैं। चारे में अगोला व पराली दी जा रही है। गुड़ की कोई व्यवस्था यहां भी नहीं है।
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हवा रोकने को लगे हैं जूट एवं प्लास्टिक के बोरे
ऊन। नगर पंचायत ऊन में संचालित गोशाला में 68 गोवंश है। यहां पर साफ-सफाई की स्थिति ठीक मिली और गोवंशों को राशन में खल, चोकर, चना छिलका, गुड़, चना चूरी दिया जा रहा है। यहां हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। गोशाला की देखभाल के लिए चार कर्मचारी राकेश, सत्येंद्र कुमार, बालकराम, राजीव लगे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि पशुओं को सर्दी से बचाव के लिए जूट व प्लास्टिक के बोरे चारों ओर लगाए गए हैं।
सीमेंट के फर्श पर बैठते हैं गोवंश
कैराना। कस्बे में संचालित गोशाला में 50 गोवंश हैं। सभी फर्श पर बांधे जाते हैं। बरामदे में एक ओर हवा और रोशनी के लिए बड़े-बड़े जंगले हैं। सर्दी से बचाव के लिए तिरपाल लगाई हुई है। गोवंश की देखभाल करने वाले अमित कुमार ने बताया की प्रतिदिन एक गोवंश को 100 ग्राम गुड़ दिया जाता है। इसके अलावा हरे चारे, खल, बिनोला एवं भूसे की भी व्यवस्था है। कस्बे से गोवंश के लिए रोटी भी आती है।
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इन्होंने कहा...
पूर्ति विभाग के सहयोग से गोवंशों के लिए टाट के बोरों की व्यवस्था की गई है तथा गुड़ भी उपलब्ध कराया गया है। जिन स्थानों पर टाट के बोरे नहीं हैं वहां भिजवाए जा रहे हैं। जहां कमियां हैं, वहां गोवंशों को सर्दी से बचाने के लिए पूरी व्यवस्था की जा रही हैं। - डा. यशवंत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, शामली।
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जनपद में दो वृहद गो संरक्षण केंद्र और 26 आश्रय स्थल हैं। इनमें 3511 गोवंशों को रखा गया है। इनमें से ज्यादातर वृद्ध एवं बीमार गोवंश हैं। मुख्यमंत्री ने गोवंशों को ओढ़ाने के लिए टाट के बोरे तथा खिलाने के लिए गुड़ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं मिला। पशु चिकित्सा विभाग एवं गोशालाओं का संचालन कर रहे लोगों ने राशन डीलरों से दान में बोरे लेकर कुछ आश्रय स्थलों में भेजे हैं। इससे कुछ पशुओं को ओढ़ाने के लिए बोरे मिल गए, जबकि ज्यादातर ऐसे ही रहते हैं। कुछ लोगों ने दान में गुड़ दे दिया तो पशुओं को खिला दिया अन्यथा अलग से कोई व्यवस्था नहीं है।
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सर्दी में तड़पने को मजबूर गोवंश
बाबरी। क्षेत्र के गांव भंदोड़ा में अस्थाई गोशाला में 20 पशु हैं। इन्हें रात में टिन शेड में रखा जाता है, जिसके चारों ओर तिरपाल भी नहीं लगा है। ठंड में जमीन पर बिना पराली और पत्ती के ही बैठते हैं। ग्राम प्रधान अमित शर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। मंगलवार को सभी गोवंशों को शामली गोशाला में शिफ्ट कराया जाएगा। पशुओं को ना तो गुड़ मिल रहा है और न ही उन्हें ओढ़ाने के लिए टाट के बोरे हैं।
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ठंड से बचाव केे नहीं हैं बंदोबस्त
चौसाना। गांव दथेड़ा में चल रही गोशाला में पशुओं को ठंड से बचाव के लिए कोई अतिरिक्त बंदोबस्त नहीं हैं। टिन शेड में पशु रात में रहते हैं, जबकि दिन में खुले में घूमते हैं। चारे के रूप में भूसा और पराली दी जा रही है। गोशाला में कुल 52 पशु हैं। उनके लिए टाट के बोरे और गुड़ की व्यवस्था नहीं है। वहीं, खेड़ी खुशनाम की गोशाला 75 गोवंश हैं। सभी पशु टिन शेड के नीचे बांधे जाते हैं। चारे में अगोला व पराली दी जा रही है। गुड़ की कोई व्यवस्था यहां भी नहीं है।
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हवा रोकने को लगे हैं जूट एवं प्लास्टिक के बोरे
ऊन। नगर पंचायत ऊन में संचालित गोशाला में 68 गोवंश है। यहां पर साफ-सफाई की स्थिति ठीक मिली और गोवंशों को राशन में खल, चोकर, चना छिलका, गुड़, चना चूरी दिया जा रहा है। यहां हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। गोशाला की देखभाल के लिए चार कर्मचारी राकेश, सत्येंद्र कुमार, बालकराम, राजीव लगे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि पशुओं को सर्दी से बचाव के लिए जूट व प्लास्टिक के बोरे चारों ओर लगाए गए हैं।
सीमेंट के फर्श पर बैठते हैं गोवंश
कैराना। कस्बे में संचालित गोशाला में 50 गोवंश हैं। सभी फर्श पर बांधे जाते हैं। बरामदे में एक ओर हवा और रोशनी के लिए बड़े-बड़े जंगले हैं। सर्दी से बचाव के लिए तिरपाल लगाई हुई है। गोवंश की देखभाल करने वाले अमित कुमार ने बताया की प्रतिदिन एक गोवंश को 100 ग्राम गुड़ दिया जाता है। इसके अलावा हरे चारे, खल, बिनोला एवं भूसे की भी व्यवस्था है। कस्बे से गोवंश के लिए रोटी भी आती है।
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इन्होंने कहा...
पूर्ति विभाग के सहयोग से गोवंशों के लिए टाट के बोरों की व्यवस्था की गई है तथा गुड़ भी उपलब्ध कराया गया है। जिन स्थानों पर टाट के बोरे नहीं हैं वहां भिजवाए जा रहे हैं। जहां कमियां हैं, वहां गोवंशों को सर्दी से बचाने के लिए पूरी व्यवस्था की जा रही हैं। - डा. यशवंत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, शामली।

नगर पंचायत ऊन की गोशाला में बंधी गाय- फोटो : SHAMLI

बाबरी क्षेत्र के गांव भदौडा गोशाला में बंधी गाय- फोटो : SHAMLI

थानाभवन देहात की गोशाला में बंधी गाय- फोटो : SHAMLI