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Shamli News: प्रशासन की रिपोर्ट पुरातत्व विभाग को समझ नहीं आई, फिर मंगाई

Fri, 03 Jan 2025 11:58 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Fri, 03 Jan 2025 11:58 PM IST
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The Archaeological Department did not understand the administration's report, so asked for it again
जलालाबाद का किला । संवाद
शामली। जलालाबाद के एतिहासिक किले को लेकर जिला प्रशासन ने जो पुरातत्व विभाग को रिपोर्ट भेजी है, वह पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की समझ से बाहर है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन को पत्र भेजकर फिर से रिपोर्ट मांगी जाएगी, इसके बाद ही किले पर फैसला लिया जाएगा।
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जलालाबाद में कई सौ साल पुराना एतिहासिक किला है, जिसमें रालोद विधायक अशरफ अली अपने परिवार समेत रहते हैं। कुछ समय पूर्व मनहार खेड़ा दुर्ग कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर किला को पुरातत्व विभाग को सौंपने की मांग करते हुए डीएम को ज्ञापन सौंपा था। पुरातत्व विभाग से भी किला के संरक्षण की मांग की थी।
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दावा किया था कि किला हिंदू वंशजों का है इसलिए इसे राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाना चाहिए। पुरातत्व विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जलालाबाद किले का सरकारी रिकाॅर्ड, खसरा खतौनी, राजस्व नक्शा गाटा संख्या, रकबा आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। गत 29 दिसंबर को जलालाबाद के किले की बाबत जिला प्रशासन की रिपोर्ट पुरातत्व विभाग लखनऊ को भेज दी थी। जिला प्रशासन की जलालाबाद किले की रिपोर्ट पुरातत्व विभाग को लखनऊ में प्राप्त हो गई है।
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लखनऊ पुरातत्व विभाग के संरक्षक अनिल कुमार त्यागी का कहना है कि जिला प्रशासन ने किले को लेकर जो रिपोर्ट भेजी है, वह समझ से बाहर है। उसमें कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। जिसके कारण फिर से पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी जाएगी।

प्रशासन ने किले की जमीन को आबादी का नंबर बताते हुए रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें यह नहीं बताया था किला किसका है। जलालाबाद के एतिहासिक किले की बाबत जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद पुरातत्व विभाग संतुष्ट होने के बाद निर्णय लेगा।
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