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Shamli News: आस्था का केंद्र है मां दुर्गा देवी का प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर
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जलालाबाद में देवी मंदिर के गर्भगृह में स्थापित संगमरमर की मूर्ति । संवाद
जलालाबाद। कस्बे का मां दुर्गा देवी का प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां पर नवरात्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।मंदिर का इतिहास करीब 150 साल पुराना है। मंदिर का निर्माण कस्बे के महंत योगी देवीनाथ द्वारा कराया गया था, जिनकी मूर्ति मंदिर के दक्षिण छोर पर लगी हुई है।
मान्यता है कि मंदिर में पूजा अर्चना करने से मांगी गई सभी मुराद पूरी होती है। मंदिर का निर्माण वास्तु शास्त्र के अनुसार किया गया है। मंदिर निर्माण में केवल चूना और लखोरी ईंटो का ही प्रयोग किया गया है। खासियत यह है कि गर्मी के मौसम में ठंडा और सर्दी के मौसम में गर्म रहता है। मंदिर के शिखर के चारों कोने पर शेर और बंदरों की आकृति आकर्षण का केंद्र है। मंदिर परिसर में मां शाकंभरी देवी की संगमरमर की पांच फिट ऊंची मूर्ति के साथ श्रीगणेश, मां भद्रकाली, नौ दुर्गा, मां संतोषी, हनुमान जी, राधा कृष्ण की मूर्तियां विराजित हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित चंद्रमोहन शास्त्री ने बताया कि मंदिर में दोनों समय शंख ध्वनि, आरती के साथ प्रत्येक चतुर्दशी को हवन यज्ञ होता है। इसमें कस्बे और क्षेत्र के श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष लाला उपेंद्र गुप्ता का कहना है कि मां के दरबार में बहुत दूर से श्रद्धालु आस्था से आते हैं, मां उनकी सब मनोकामना पूरी करती हैं। प्रतिदिन मंदिर में हवन-यज्ञ व शाम को भजन-कीर्तन और भव्य रूप से मंगल आरती होती है।
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मान्यता है कि मंदिर में पूजा अर्चना करने से मांगी गई सभी मुराद पूरी होती है। मंदिर का निर्माण वास्तु शास्त्र के अनुसार किया गया है। मंदिर निर्माण में केवल चूना और लखोरी ईंटो का ही प्रयोग किया गया है। खासियत यह है कि गर्मी के मौसम में ठंडा और सर्दी के मौसम में गर्म रहता है। मंदिर के शिखर के चारों कोने पर शेर और बंदरों की आकृति आकर्षण का केंद्र है। मंदिर परिसर में मां शाकंभरी देवी की संगमरमर की पांच फिट ऊंची मूर्ति के साथ श्रीगणेश, मां भद्रकाली, नौ दुर्गा, मां संतोषी, हनुमान जी, राधा कृष्ण की मूर्तियां विराजित हैं।
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मंदिर के पुजारी पंडित चंद्रमोहन शास्त्री ने बताया कि मंदिर में दोनों समय शंख ध्वनि, आरती के साथ प्रत्येक चतुर्दशी को हवन यज्ञ होता है। इसमें कस्बे और क्षेत्र के श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष लाला उपेंद्र गुप्ता का कहना है कि मां के दरबार में बहुत दूर से श्रद्धालु आस्था से आते हैं, मां उनकी सब मनोकामना पूरी करती हैं। प्रतिदिन मंदिर में हवन-यज्ञ व शाम को भजन-कीर्तन और भव्य रूप से मंगल आरती होती है।

जलालाबाद में देवी मंदिर के गर्भगृह में स्थापित संगमरमर की मूर्ति । संवाद
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