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महंगा बताकर बच्चों को नहीं दिया दूध, योजना ध्वस्त
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Thu, 03 Dec 2015 12:56 AM IST
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शामली। शासन की ओर से बुधवार को प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को दूध पिलाने की योजना दम तोड़ चुकी है। लागत अधिक आने के कारण अधिकतर स्कूलों में प्रधानाध्यापकों ने बच्चों को दूध देना बंद कर दिया है। प्रशासन ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। बुधवार को अमर उजाला टीम ने स्कूलों की पड़ताल की, तो योजना का सच सामने आया।
प्राथमिक स्कूलों में 15 जुलाई 2015 से बुधवार को मिड-डे मील के तहत बच्चों को चावल, कोफ्ता व 200 ग्राम दूध का वितरण करने की योजना शासन द्वारा शुरू की गई थी। योजना शुरू होते ही शासन स्तर से इस पर कड़ी निगरानी रखी गई, जिसकी रोजाना रिपोर्ट प्रशासन द्वारा शासन को भेजी गई, लेकिन बाद में योजना ने दम तोड़ दिया। क्योंकि मिड-डे मील के तहत मिलने वाले बजट में ही बच्चों को दूध भी पिलाने के आदेश थे।
स्कूलों में प्रधानाध्यापकों व ग्राम प्रधानों ने मिड-डे मील के तहत दूध वितरण में कॉस्ट अधिक होने का तर्क दिया और योजना चालू रखने में असमर्थता जता दी। इसके विरोध में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को ज्ञापन भी दिया था। नतीजा अब जिले के लगभग सभी स्कूलों में बच्चों को बुधवार को दूध नहीं मिल रहा है।
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गोद लिए स्कूल में मिल रहा बच्चों को दूध
बच्चों को दूध वितरण की योजना समाजसेवी रमेश चंद लंबरदार ने शुरू की थी। उन्होंने माजरा रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर छह को गोद लिया, जिसमें उन्होंने प्रत्येक बुधवार को बच्चों को दूध पिलाने की शुरुआत की। उनकी यह पहल स्थानीय प्रशासन के माध्यम से शासन तक पहुंची, तो उन्होंने भी बुधवार को दूध वितरण की योजना शुरू की। शासन की योजना तो दम तोड़ चुकी है, लेकिन लंबरदार के गोद लिए स्कूल में बच्चों को प्रत्येक बुधवार को दूध मिल रहा है। प्रधानाध्यापक सारिका ने बताया कि यहां पर हर बुधवार को बच्चों को दूध पिलाया जा रहा है।
समय दोपहर साढ़े 12 बजे
मोहल्ला नंदूप्रसाद स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक व दो में करीब 175 बच्चे हैं। बुधवार को यहां शिक्षकों को चेहल्लुम के अवकाश की तिथि बदले जाने की सूचना देर से मिली, जिस कारण स्कूल में बच्चे नहीं पहुंचे, लेकिन प्रधानाध्यापक व एक शिक्षिका मिली। प्रधानाध्यापक जयपाल सिंह ने बताया कि बच्चों के लिए मिड-डे मील बनाया जाता है, लेकिन दूध नहीं दिया जा रहा है।
समय दोपहर एक बजे
बरखंडी स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर दस में मिड-डे मील में बच्चों को चावल व कोफ्ता तो दिया गया, लेकिन दूध नहीं मिला। प्रधानाध्यापक नीरज गोयल ने बताया कि स्कूल में 294 बच्चे हैं। बच्चों को मिड-डे मील मेन्यू के मुताबिक दिया जा रहा है, लेकिन बजट कम होने के कारण दूध नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में विभाग को भी पत्र लिखकर जानकारी दी गई है।
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प्राथमिक स्कूलों में 15 जुलाई 2015 से बुधवार को मिड-डे मील के तहत बच्चों को चावल, कोफ्ता व 200 ग्राम दूध का वितरण करने की योजना शासन द्वारा शुरू की गई थी। योजना शुरू होते ही शासन स्तर से इस पर कड़ी निगरानी रखी गई, जिसकी रोजाना रिपोर्ट प्रशासन द्वारा शासन को भेजी गई, लेकिन बाद में योजना ने दम तोड़ दिया। क्योंकि मिड-डे मील के तहत मिलने वाले बजट में ही बच्चों को दूध भी पिलाने के आदेश थे।
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स्कूलों में प्रधानाध्यापकों व ग्राम प्रधानों ने मिड-डे मील के तहत दूध वितरण में कॉस्ट अधिक होने का तर्क दिया और योजना चालू रखने में असमर्थता जता दी। इसके विरोध में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को ज्ञापन भी दिया था। नतीजा अब जिले के लगभग सभी स्कूलों में बच्चों को बुधवार को दूध नहीं मिल रहा है।
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गोद लिए स्कूल में मिल रहा बच्चों को दूध
बच्चों को दूध वितरण की योजना समाजसेवी रमेश चंद लंबरदार ने शुरू की थी। उन्होंने माजरा रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर छह को गोद लिया, जिसमें उन्होंने प्रत्येक बुधवार को बच्चों को दूध पिलाने की शुरुआत की। उनकी यह पहल स्थानीय प्रशासन के माध्यम से शासन तक पहुंची, तो उन्होंने भी बुधवार को दूध वितरण की योजना शुरू की। शासन की योजना तो दम तोड़ चुकी है, लेकिन लंबरदार के गोद लिए स्कूल में बच्चों को प्रत्येक बुधवार को दूध मिल रहा है। प्रधानाध्यापक सारिका ने बताया कि यहां पर हर बुधवार को बच्चों को दूध पिलाया जा रहा है।
समय दोपहर साढ़े 12 बजे
मोहल्ला नंदूप्रसाद स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक व दो में करीब 175 बच्चे हैं। बुधवार को यहां शिक्षकों को चेहल्लुम के अवकाश की तिथि बदले जाने की सूचना देर से मिली, जिस कारण स्कूल में बच्चे नहीं पहुंचे, लेकिन प्रधानाध्यापक व एक शिक्षिका मिली। प्रधानाध्यापक जयपाल सिंह ने बताया कि बच्चों के लिए मिड-डे मील बनाया जाता है, लेकिन दूध नहीं दिया जा रहा है।
समय दोपहर एक बजे
बरखंडी स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर दस में मिड-डे मील में बच्चों को चावल व कोफ्ता तो दिया गया, लेकिन दूध नहीं मिला। प्रधानाध्यापक नीरज गोयल ने बताया कि स्कूल में 294 बच्चे हैं। बच्चों को मिड-डे मील मेन्यू के मुताबिक दिया जा रहा है, लेकिन बजट कम होने के कारण दूध नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में विभाग को भी पत्र लिखकर जानकारी दी गई है।