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महिलाओं ने तहसील घेरी, हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:02 AM IST
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public news
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ऊन। नोटबंदी हुए करीब डेढ़ माह हो गया है, लेकिन बैंकों से ग्राहकों को पूर्ण कैश नहीं मिल पा रहा है। कस्बा ऊन के बैंकों से कैश नहीं मिलने के कारण परेशान महिलाओं एवं पुरुषों ने तहसील में पहुंच कर प्रदर्शन कर तहसीलदार से कार्रवाई की मांग की।
नोटबंदी हुए 39 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक बैंकों के द्वारा लोगों को पर्याप्त धनराशि नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।
बैंकों के द्वारा खाता धारक को 24 हजार रुपये देने की सीमा तय कर रखी है, लेकिन बैंकों में कैश कम आने की वजह से ग्राहक को कम धनराशि ही मिल पा रही है। कस्बा ऊन में तीन बैंक हैं, लेकिन उनके एटीएम भी बंद हैं। मिल के द्वारा गन्ने का भुगतान भी बैंकों में भेज दिया गया है, लेकिन बैंक में कैश नहीं आने की वजह से वह भी नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को कस्बा ऊन के पीएनबी बैंक में भी लोगों की सुबह होते ही लाइन लग गयी थी।
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बैंक में कैश शाम चार बजे के करीब आया। देर से कैश आने की वजह से लाइन में लगे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं इलाहाबाद बैंक में कैश जल्दी खत्म होने की वजह से वहां पर लाइन में खड़े लोगों ने हंगामा काटा तथा बाद में तहसील परिसर में पहुंच प्रदर्शन करते हुए तहसीलदार करम सिंह से बैंक मैनेजर की शिकायत की।
लोगों का आरोप है कि बैंक में 12 लाख रुपये का कैश आया उसमें से केवल तीस चालीस लोगों को चार-चार हजार रुपये देने के बाद कैश खत्म होने की बात कही और बैंक का मुख्य गेट बंद कर दिया। इस संबंध में तहसीलदार करम सिंह ने जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक को पत्र लिखकर समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए। प्रदर्शन करने वालों में शीला, सरला, सोमती, कविता, अमित, गौरव, जसपाल, विकास, आदि शामिल रहे।
नहीं मिला कैश, मायूस होकर लौटे ग्राहक
शामली। नोटबंदी के चलते शहर के बैंकों पर लोगों की संख्या कम नहीं हो रही है। लोग सुबह ही काम छोड़कर लाइन में लगने को मजबूर हो रहे हैं। किसी बैंक से ग्राहकों को जरूरत से कम पैसा मिल रहा है तो कहीं नो कैश की तख्ती लटकी मिल रही है। बैंकों के एटीएम भी चालू नहीं हो पाए हैं।
शुक्रवार को भी शहर के ज्यादातर बैंकों पर सुबह से ही लाइन लग गई। जबकि कई बैंकों में नो कैश की तख्ती लटकी मिली। शहर के इंडियन ओवरसीज बैंक में टोकन के लिए सुबह से ही भीड़ रही। एक्सिस बैंक में भी टोकन मिलने वालों को ही कैश दिया गया। शहर के कुछ एटीएम पर कैश डलने से पहले ही ग्राहकों की लंबी लाइन लगी रही।
बैंकों में कैश की किल्लत के चलते रोज कैश की राशि कम होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। अगर किसी को 20 हजार चाहिए तो उसको केवल चार या पांच हजार ही कैश मिल रहा है। इंडियन ओवरसीज बैंक में केवल 115 ग्राहकों को ही 10 के स्थान पर केवल पांच हजार रुपये ही मिल सके।
इलाहाबाद बैंक में केवल चार हजार ही मिल सके। जबकि एक्सिस बैंक में छह हजार, एसबीआई में भी चार हजार रुपये ही मिले। पीएनबी में छह हजार रुपये मिल सके। शहर के यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में नो कैश का बोर्ड लगा होने से ग्राहकों को मायूस होकर ही लौटना पड़ा। शहर के कार्पोरेशन एटीएम, पीएनबी एटीएम पर कैश डलने से पहले ही ग्राहकों की लाइन लगी रही। कैश डलने से थोड़ी राहत मिली। ग्राहकों की संख्या ज्यादा होने से एक से डेढ़ घंटे में ही कैश समाप्त हो गया।
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नोटबंदी हुए 39 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक बैंकों के द्वारा लोगों को पर्याप्त धनराशि नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।
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बैंकों के द्वारा खाता धारक को 24 हजार रुपये देने की सीमा तय कर रखी है, लेकिन बैंकों में कैश कम आने की वजह से ग्राहक को कम धनराशि ही मिल पा रही है। कस्बा ऊन में तीन बैंक हैं, लेकिन उनके एटीएम भी बंद हैं। मिल के द्वारा गन्ने का भुगतान भी बैंकों में भेज दिया गया है, लेकिन बैंक में कैश नहीं आने की वजह से वह भी नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को कस्बा ऊन के पीएनबी बैंक में भी लोगों की सुबह होते ही लाइन लग गयी थी।
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बैंक में कैश शाम चार बजे के करीब आया। देर से कैश आने की वजह से लाइन में लगे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं इलाहाबाद बैंक में कैश जल्दी खत्म होने की वजह से वहां पर लाइन में खड़े लोगों ने हंगामा काटा तथा बाद में तहसील परिसर में पहुंच प्रदर्शन करते हुए तहसीलदार करम सिंह से बैंक मैनेजर की शिकायत की।
लोगों का आरोप है कि बैंक में 12 लाख रुपये का कैश आया उसमें से केवल तीस चालीस लोगों को चार-चार हजार रुपये देने के बाद कैश खत्म होने की बात कही और बैंक का मुख्य गेट बंद कर दिया। इस संबंध में तहसीलदार करम सिंह ने जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक को पत्र लिखकर समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए। प्रदर्शन करने वालों में शीला, सरला, सोमती, कविता, अमित, गौरव, जसपाल, विकास, आदि शामिल रहे।
नहीं मिला कैश, मायूस होकर लौटे ग्राहक
शामली। नोटबंदी के चलते शहर के बैंकों पर लोगों की संख्या कम नहीं हो रही है। लोग सुबह ही काम छोड़कर लाइन में लगने को मजबूर हो रहे हैं। किसी बैंक से ग्राहकों को जरूरत से कम पैसा मिल रहा है तो कहीं नो कैश की तख्ती लटकी मिल रही है। बैंकों के एटीएम भी चालू नहीं हो पाए हैं।
शुक्रवार को भी शहर के ज्यादातर बैंकों पर सुबह से ही लाइन लग गई। जबकि कई बैंकों में नो कैश की तख्ती लटकी मिली। शहर के इंडियन ओवरसीज बैंक में टोकन के लिए सुबह से ही भीड़ रही। एक्सिस बैंक में भी टोकन मिलने वालों को ही कैश दिया गया। शहर के कुछ एटीएम पर कैश डलने से पहले ही ग्राहकों की लंबी लाइन लगी रही।
बैंकों में कैश की किल्लत के चलते रोज कैश की राशि कम होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। अगर किसी को 20 हजार चाहिए तो उसको केवल चार या पांच हजार ही कैश मिल रहा है। इंडियन ओवरसीज बैंक में केवल 115 ग्राहकों को ही 10 के स्थान पर केवल पांच हजार रुपये ही मिल सके।
इलाहाबाद बैंक में केवल चार हजार ही मिल सके। जबकि एक्सिस बैंक में छह हजार, एसबीआई में भी चार हजार रुपये ही मिले। पीएनबी में छह हजार रुपये मिल सके। शहर के यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में नो कैश का बोर्ड लगा होने से ग्राहकों को मायूस होकर ही लौटना पड़ा। शहर के कार्पोरेशन एटीएम, पीएनबी एटीएम पर कैश डलने से पहले ही ग्राहकों की लाइन लगी रही। कैश डलने से थोड़ी राहत मिली। ग्राहकों की संख्या ज्यादा होने से एक से डेढ़ घंटे में ही कैश समाप्त हो गया।