नेताजी के साथ कंधा मिलाकर लड़े शामली के सिपाही, घर छोड़कर आजाद हिंद फौज में हो गए थे भर्ती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मना रहा है। देश को आजादी दिलाने के लिए नेताजी ने लंबा संघर्ष किया और उनके साथ शामली जनपद के भी कई सपूत कंधा मिलाकर खड़े रहे। इन सिपाहियों ने अंग्रेजों की बंदूक से निकली गोली अपने शरीर पर झेली और जेल की यातनाएं भी सहीं।
विशंभर पंवार कई वर्ष बाद पहुंचे थे परिवार के बीच
कस्बा एलम निवासी विशंभर पंवार ने आजाद हिंद फौज में रहकर देश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। एलम निवासी विशंभर पंवार के पुत्र गिरिराज ने बताया कि उनके पिता का जन्म एक फरवरी 1917 में हुआ था। वह देश की सेवा के लिए सबसे पहले बच्चा प्लाटून में सिपाही के पद पर नियुक्त हुए। उसके बाद यहां से उन्हें सिंगापुर आजाद हिंद फौज में कैप्टन के पद पर नियुक्त किया गया। उनके परिवार में दो बेटे व एक बेटी है। बड़े बेटे गिरिराज दिल्ली में डीडीए में सर्विस करते हैं, जबकि छोटे पुत्र बलराज गांव में खेती करते हैं। उनके पिता ने देश की आजादी के लिए कई लड़ाई लड़ी। जिसमें एक बार उन्हें दाहिने हाथ पर गोली भी लगी थी। देश की आजादी के लिए कई वर्षों तक परिवार से दूर रहे।
परिवार के लोगों ने तो यहां तक समझ लिया था कि नहीं रहे, लेकिन कुछ वर्षों के बाद परिवार के बीच पहुंचे तो परिवार की खुशी का कोई ठिकाना न था। वह अपनी आजादी की लड़ाई के किस्से अक्सर अपने मित्रों व बच्चों को सुनाया करते थे। 20 अगस्त 2006 को अपने पीछे पूरे परिवार को छोड़कर विशंभर पंवार परलोक सिधार गए।
यह भी पढ़ें: आखिर मिट्टी में मिल गया मोस्ट वांटेड बद्दो का खौफ, जमींदोज हुई आलीशान कोठी, देखिए तस्वीरें
घर छोड़कर आजाद हिंद फौज में हो गए भर्ती
कांधला थाना क्षेत्र के गांव पंजोखरा निवासी पलटू राम घर-परिवार को छोड़कर आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए थे। उनका जन्म 20 जनवरी 1929 में हुआ था। उनके दत्तक पुत्र देवेंद्र कुमार ने बताया कि पलटू राम 13 वर्ष की उम्र में अपने घर परिवार को छोड़कर आजाद हिंद फौज में भर्ती होने के लिए चले गए थे।। कुछ समय बाद वह आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। उसके बाद उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी। एक बार वे अंग्रेजों की पकड़ में आने के बाद लंबे अरसे तक जेल में भी रहे। परिवार के लोगों को अक्सर उनकी चिंता रहती थी। जेल से आने के बाद उन्होंने एक संदेश के माध्यम से बताया था कि वह देश की सेवा में लीन हैं। अपने अंदर देश प्रेम का जज्बा रखते हुए उन्होंने अपना घर नहीं बसाया और सब कुछ देश के लिए न्यौछावर कर दिया। 21 जुलाई 2019 को उनका निधन हो गया।
नेताजी की अगवाई में लड़ी आजादी की लड़ाई
गढ़ीपुख्ता कस्बे के मोहल्ला चौधरान निवासी स्वतंत्रता सेनानी ओमप्रकाश आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे। उनका 91 वर्ष की आयु में नवंबर 2013 में निधन हो गया था। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगवाई में आजाद हिंद फौज में आजादी की जंग लड़ी थी। उनके एक पुत्र सीओ के पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि दूसरे इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। दोनों बाहर रहते हैं। गढ़ीपुख्ता में उनका पुराना मकान है।
नौकरानी से शादी की अर्जी को लेकर रहे थे चर्चाओं में
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे ओमप्रकाश अपनी नौकरानी से शादी करने की इच्छा को लेकर चर्चाओं में रहे थे। उन्होंने 16 साल तक सामाजिक व कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन उनका यह इच्छा पूरी हो पाती, इससे पहले ही उनका निधन हो गया था। ओमप्रकाश अपनी नौकरानी गासिया से शादी करना चाहते थे। 1997 में उन्होंने उससे विवाह करने का निर्णय लिया था। उनके इस निर्णय का परिजनों और कुछ रिश्तेदारों ने विरोध किया था। मार्च 2010 में उन्होंने गासिया से विवाह करने के लिए विशेष विवाह अधिकारी के अर्जी भी दी थी। कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया था।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/