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नोटबंदी से स्टांप बिक्री हुई ठप
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:11 AM IST
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नोटबंदी का स्टांप पर असर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली में नोटबंदी होने के बाद से स्टांप न मिलने से भूमि, भवन, प्रतिष्ठानों के बैनामे प्रभावित हुए हैं। जिससे करोड़ों रुपये का सरकार को फटका लगा है। स्टांप विक्रेता, दस्तावेज लेखकों एवं अधिवक्ताओं का कार्य ठप है।
कोषागार से स्टांप नहीं मिल पा रहे हैं। नए नोट बाजार में न आने से स्टांप विक्रेता कोषागार से स्टांप नहीं खरीद पा रहे हैं। पुराने नोटों से खरीदे गए स्टांप का ज्यादातर स्टॉक खत्म हो चुका है। मालूम हो कि बैनामा, इकराना, बैंक ऋण, किराएनामा, शपथपत्र, बैंक लिमिट में काम आता है। यद्यपि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को स्टांप पंजीकरण शुल्क में छूट दिए जाने के बाद भी बैनामे में सुधार नहीं हो पा रहा है।
दस्तावेज लेखकों का कहना है कि एक दिन में 30-40 बैनामे हो जाते थे, अब 3-4 बैनामे ही हो पा रहे हैं। स्टांप विक्रेताओं को कहना है कि एक माह में एक करोड़ रुपये का शामली जिले में स्टांप जिला कोषागार से खरीदा जाता था। बाजार में नए नोटों की करेंसी न आने से उनका कार्य प्रभावित हुआ है।
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शामली उप निबंधक अमित कुमार ने बताया कि नवंबर माह का दो करोड़ 80 लाख रुपये का राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया है, किंतु बैनामों की संख्या घटने से एक करोड़ रुपये के बैनामे ही हो पाए हैं। इनमें ज्यादातर आठ नवंबर से पूर्व बैनामों का राजस्व शामिल है। उनका कहना है कि स्टांप पंजीकरण शुल्क में छूट दिए जाने के बाद भी बैनामों के राजस्व में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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कोषागार से स्टांप नहीं मिल पा रहे हैं। नए नोट बाजार में न आने से स्टांप विक्रेता कोषागार से स्टांप नहीं खरीद पा रहे हैं। पुराने नोटों से खरीदे गए स्टांप का ज्यादातर स्टॉक खत्म हो चुका है। मालूम हो कि बैनामा, इकराना, बैंक ऋण, किराएनामा, शपथपत्र, बैंक लिमिट में काम आता है। यद्यपि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को स्टांप पंजीकरण शुल्क में छूट दिए जाने के बाद भी बैनामे में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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दस्तावेज लेखकों का कहना है कि एक दिन में 30-40 बैनामे हो जाते थे, अब 3-4 बैनामे ही हो पा रहे हैं। स्टांप विक्रेताओं को कहना है कि एक माह में एक करोड़ रुपये का शामली जिले में स्टांप जिला कोषागार से खरीदा जाता था। बाजार में नए नोटों की करेंसी न आने से उनका कार्य प्रभावित हुआ है।
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शामली उप निबंधक अमित कुमार ने बताया कि नवंबर माह का दो करोड़ 80 लाख रुपये का राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया है, किंतु बैनामों की संख्या घटने से एक करोड़ रुपये के बैनामे ही हो पाए हैं। इनमें ज्यादातर आठ नवंबर से पूर्व बैनामों का राजस्व शामिल है। उनका कहना है कि स्टांप पंजीकरण शुल्क में छूट दिए जाने के बाद भी बैनामों के राजस्व में सुधार नहीं हो पा रहा है।