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गन्ने की फसल उधार लेकर बोई, अब धान कैसे लगाएं

Tue, 09 Jun 2020 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2020 11:45 PM IST
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Sow by borrowing sugarcane crop, now how to plant paddy
गन्ने की फसल उधार लेकर बोई, अब धान कैसे लगाएं
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शामली। एक तरफ फसलों पर मौसम की मार तो दूसरी तरफ लॉकडाउन से किसान बेहाल है। गेहूं की फसल में पीला रोग लगने से उत्पादन इतना कम हुआ कि लागत भी नहीं निकल पाई। गन्ने का भुगतान नहीं हो रहा है। गन्ने की नई फसल की बुआई के लिए दवा, खाद सब उधार लेना पड़ा है। अब धान की बुआई की तैयारी कर रहे है, उसके लिए भी खाद, दवा और पौध के लिए पैसों की जरूरत है, लेकिन पहला ही उधार नहीं दिया गया। अब फिर से उधार लेना पड़ेगा या फिर ब्याज पर रुपये लेने पड़ेंगे। किसानों का कहना है कि सरकार को सोचना चाहिए। किसानों की समस्या को देखते हुए सहूलियतें दे। अमर उजाला ने किसानों से बातचीत कर हकीकत जानी। पेश है रिपोर्ट...
धान कैसे बोएं समझ में नहीं आता
गांव टिटौली के किसान सहदेव सिंह ने बताया कि उसके पास करीब 12 बीघा खेती की जमीन है। इस बार पांच बीघा गन्ने की नई फसल बोई है। बस उन्हें ही पता है कि गन्ने की बुआई में खाद, दवा, बीज का इंतजाम कैसे उधार ले देकर किया है। जो गन्ना मिल में डाला था, उसका भुगतान न होने से परेशानी ही परेशानी है। क्रेडिट कार्ड पर जो रुपये निकाले थे, वह जमा नहीं हो पाए। अब तीन बीघा धान लगाना है। धान लगाने में जो खर्च और लागत आएगी, उसके लिए पैसे का इंतजाम कहां से होगा, यह समझ में नहीं आता।
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पीला रोग ने चौपट कर दी गेहूं की फसल
गांव टिटौली के किसान जसबीर सिंह ने बताया कि गेहूं की छह बीघा फसल बोई थी। गेहूं में पीला रोग लग गया। रोग की वजह से गेहूं इतना कम हुआ कि घर का काम चलना भी मुश्किल है। अब दो बीघा धान की फसल बोनी है, उसके लिए पैसे नहीं है। क्रेडिट कार्ड से जो रुपये निकलवाए थे, उसका ब्याज भरना पड़ेगा, वह समय पर जमा नहीं हुआ। दूध बेचकर किसी तरह घर का खर्च चलाना पड़ा रहा है।
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फसल बोने को दवा, खाद उधार लेना पड़ा
गांव लिलौन निवासी किसान सुमेश कुमार ने बताया कि गन्ने का भुगतान न होना ही सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। गेहूं की फसल अच्छी खड़ी थी, जब बाली आने लगी तो उसमें पीला रोग लग गया। इससे गेहूं कम निकला। 20 बीघा गन्ने की बुआई की। मजदूरों को भी पैसा देना पड़ा। दवा, खाद उधार लिया। अब धान की बुआई करनी है, फिर उधार लेना पड़ेगा। सरकार को किसानो के कर्जे माफ करने चाहिए, बिजली के बिलों पर छूट दे और गन्ने के बकाया भुगतान पर ब्याज देना चाहिए।

किसानों के सामने परेशानी ही परेशानी
गांव ऐरटी के किसान प्रमोद शर्मा से बातचीत की गई तो वो बोले किसान की क्या पूछो, उसकी तो परेशानी ही परेशानी है। अब गन्ने की छिलाई चल रही है। मजदूरों को लगाना पड़ रहा है। उन्हें रोज मजदूरी देनी पड़ रही है। गन्ने की फसल बोई, उसके लिए दवा, बीज, खाद सब उधार लेना पड़ा, एक-दो गन्ने की पर्ची का पेमेंट आता है, उसमें कुछ काम नहीं चलता। बिजली के बिल जमा नहीं हो रहा। घर की जरूरत पूरी नहीं हो रही। अब धान बोना है, पैसे है नहीं, गन्ने का पूरा सीजन हो गया, भुगतान दिसंबर महीने का भी नहीं हुआ। खुद ही देेख लो किसान कितनी परेशानी में है। सरकार को किसान के बारे में सोचना चाहिए।
व् संजीव शर्मा
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