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...तो क्या बिना स्वीकृति चल रहा था डिपो
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शामली। करीब ढाई साल पहले शुरू हुए जलालाबाद डिपो की बसों को आनन-फानन सहारनपुर संबद्ध कर दिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा यह है कि बिना शासन की मंजूरी के ही जलालाबाद बस स्टैंड को डिपो का दर्जा दे दिया गया। इसकी पोल तब खुली जब जलालाबाद डिपो लिखी बस से थानाभवन में हुई दुर्घटना में तीन बच्चों की मौत हो गई।
अगस्त 2018 में जलालाबाद में रोडवेज डिपो का शुभारंभ हुआ था। गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने इसका उद्घाटन किया था। लगभग ढाई साल बाद अचानक से डिपो की बसों को सहारनपुर संबद्ध कर देने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। जब कस्बे में डिपो था तो उसे खत्म क्यों किया जा रहा है। आरएम नीरज सक्सेना का कहना है कि जलालाबाद डिपो की बस से थानाभवन चार दिसंबर को दुर्घटना हुई थी। इसके बाद इस दुर्घटना की जांच हुई। निगम मुख्यालय से उन्हें जलालाबाद डिपो की बसों को सहारनपुर संबद्ध करने के निर्देश मिले हैं।
उधर, निगम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जलालाबाद में डिपो बिना शासन की मंजूरी के चल रहा था। परिवहन निगम की बोर्ड बैठक में डिपो को मंजूरी नहीं मिली। थानाभवन में हुई दुर्घटना के बाद आई निगम मुख्यालय की टीम की जांच में यह बात खुल गई।
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तत्कालीन अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई
शामली। जलालाबाद डिपो का संचालन शुरू कराने को लेकर तत्कालीन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अधिकारी जांच के घेरे में है। निगम मुख्यालय की बिना अनुमति के डिपो का संचालन कैसे कर दिया गया।
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जिले में एकमात्र शामली डिपो बचा
शामली: जनपद में निगम की बसों का एक मात्र डिपो जलालाबाद में ही संचालित था। अब वह भी खत्म हो गया है। शामली रोडवेज डिपो में सभी बसें अनुबंधित हैं। जलालाबाद डिपो समाप्त हो जाने से जिले के यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाएगी।
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चालक-परिचालकों ने जताया विरोध
जलालाबाद। डिपो पर कार्यरत चालक-परिचालक संघ के पदाधिकारी वरुण पुंडीर व कालूराम के नेतृत्व में चालक-परिचालकों ने डिपो की बसों को सहारनपुर संबद्ध करने पर विरोध जताया। कहा कि डिपो की बसों को सहारनपुर नहीं जाने दिया जाएगा। कोई भी चालक-परिचालक सहारनपुर डिपो में जाकर कार्य नहीं करेगा। जलालाबाद बस डिपो को यथावत रखा जाए। डिपो का स्थानांतरण नहीं होने दिया जाएगा।
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अगस्त 2018 में जलालाबाद में रोडवेज डिपो का शुभारंभ हुआ था। गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने इसका उद्घाटन किया था। लगभग ढाई साल बाद अचानक से डिपो की बसों को सहारनपुर संबद्ध कर देने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। जब कस्बे में डिपो था तो उसे खत्म क्यों किया जा रहा है। आरएम नीरज सक्सेना का कहना है कि जलालाबाद डिपो की बस से थानाभवन चार दिसंबर को दुर्घटना हुई थी। इसके बाद इस दुर्घटना की जांच हुई। निगम मुख्यालय से उन्हें जलालाबाद डिपो की बसों को सहारनपुर संबद्ध करने के निर्देश मिले हैं।
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उधर, निगम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जलालाबाद में डिपो बिना शासन की मंजूरी के चल रहा था। परिवहन निगम की बोर्ड बैठक में डिपो को मंजूरी नहीं मिली। थानाभवन में हुई दुर्घटना के बाद आई निगम मुख्यालय की टीम की जांच में यह बात खुल गई।
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तत्कालीन अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई
शामली। जलालाबाद डिपो का संचालन शुरू कराने को लेकर तत्कालीन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अधिकारी जांच के घेरे में है। निगम मुख्यालय की बिना अनुमति के डिपो का संचालन कैसे कर दिया गया।
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जिले में एकमात्र शामली डिपो बचा
शामली: जनपद में निगम की बसों का एक मात्र डिपो जलालाबाद में ही संचालित था। अब वह भी खत्म हो गया है। शामली रोडवेज डिपो में सभी बसें अनुबंधित हैं। जलालाबाद डिपो समाप्त हो जाने से जिले के यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाएगी।
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चालक-परिचालकों ने जताया विरोध
जलालाबाद। डिपो पर कार्यरत चालक-परिचालक संघ के पदाधिकारी वरुण पुंडीर व कालूराम के नेतृत्व में चालक-परिचालकों ने डिपो की बसों को सहारनपुर संबद्ध करने पर विरोध जताया। कहा कि डिपो की बसों को सहारनपुर नहीं जाने दिया जाएगा। कोई भी चालक-परिचालक सहारनपुर डिपो में जाकर कार्य नहीं करेगा। जलालाबाद बस डिपो को यथावत रखा जाए। डिपो का स्थानांतरण नहीं होने दिया जाएगा।